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CJI Surya Kant: 'सुबह अखबार पढ़कर शाम तक याचिका दाखिल!'; सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल की बाढ़ पर बिफरे चीफ जस्टिस

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Wed, 25 Feb 2026 08:46 AM IST
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सार

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जनहित याचिकाओं की अचानक बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि लोग सुबह अखबार पढ़कर शाम को याचिका दायर कर देते हैं। कोर्ट ने वकीलों के एआई का इस्तेमाल करने पर भी नाराजगी दिखाई है, क्योंकि इससे याचिकाओं में फर्जी फैसलों का जिक्र हो रहा है।

Supreme Court CJI Surya Kant warns on PIL publicity interest litigation comment ai draft petition concerns
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत - फोटो : एएनआई
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विस्तार

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेाई) सूर्यकांत ने जनहित याचिकाओं यानी पीआईएल की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के वक्त उन्होंने कहा कि आजकल कई लोगों का मकसद सिर्फ याचिका दाखिल करना रह गया है। ऐसा लगता है कि वे सुबह अखबार पढ़ते हैं और शाम तक कोर्ट में पीआईएल दाखिल कर देते हैं। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेआई ने कहा कि कुछ लोगों का यह एजेंडा बन गया है। उन्होंने कहा कि हम देख रहे हैं कि पीआईएल की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है।
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प्रचार के लिए हो रहा कानून का इस्तेमाल
इससे पहले साल 2022 में भी सुप्रीम कोर्ट ने तेजी से बढ़ती याचिकाओं पर टिप्पणी की थी। तब अदालत ने कहा था कि इनमें से कई याचिकाओं का जनता की भलाई से कोई लेना-देना नहीं होता। ये या तो खुद के प्रचार (पब्लिसिटी) के लिए होती हैं या निजी फायदे के लिए। कोर्ट ने कहा था कि ऐसी फालतू याचिकाओं से अदालत का कीमती समय बर्बाद होता है। इस समय का इस्तेमाल जरूरी और गंभीर मुद्दों पर हो सकता था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि ऐसी याचिकाओं को शुरू में ही खारिज कर देना चाहिए ताकि ताकि बड़े जनहित में होने वाले विकास कार्यों में रुकावट न आए।
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एआई के इस्तेमाल से जजों की बढ़ी मुश्किलें
सीजेआई सूर्यकांत ने वकीलों के याचिका लिखने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तैयार की गई याचिकाओं पर नाराजगी जाहिर की। मंगलवार को सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस पर बात की।

ये भी पढ़ें: Supreme Court: 'मेरे कोर्ट में बदतमीजी नहीं चलेगी', अंबानी का जिक्र करने पर वकील पर भड़के सीजेआई

बेंच ने कहा कि यह देखना परेशान करने वाला है कि वकील याचिका का मसौदा बनाने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह बिल्कुल गलत है। जजों ने बताया कि एआई से बनी याचिकाओं में ऐसे फैसलों का जिक्र किया जा रहा है जो कभी हुए ही नहीं। उदाहरण के लिए, हाल ही में 'मर्सी बनाम मैनकाइंड' नाम के एक फैसले का हवाला दिया गया, जबकि ऐसा कोई केस कभी था ही नहीं।

फर्जी फैसलों का दिया जा रहा हवाला
कोर्ट ने यह टिप्पणी शिक्षाविद रूप रेखा वर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। इस याचिका में नेताओं के भाषणों को लेकर नियम बनाने की मांग की गई थी। जस्टिस नागरत्ना ने बताया कि कई बार असली फैसलों के साथ फर्जी बातें जोड़ दी जाती हैं। इससे यह पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है कि क्या सही है।

जस्टिस नागरत्ना ने बताया कि जस्टिस दीपांकर दत्ता की अदालत में भी ऐसे कई फर्जी फैसलों का हवाला दिया गया था। जजों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से जजों पर काम का बोझ बेवजह बढ़ जाता है, क्योंकि उन्हें हर जानकारी की गहराई से जांच करनी पड़ती है।

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