CMO: सरकारी उपलब्धियों के मैसेज भेजने के लिए मांगी निजी जानकारी, कांग्रेस ने डेटा प्राइवेसी का उल्लंघन बताया
केरल में कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने राज्य सरकार पर चुनावी प्रचार के लिए कर्मचारियों की निजी जानकारी मांगने का आरोप लगाया। हाईकोर्ट ने निजता चिंता जताई, सरकार ने 27 फरवरी तक मैसेज रोकने का आश्वासन दिया।
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केरल में वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला मे राज्य सरकार पर डेटा प्राइवेसी का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता ने दावा किया है कि सीएमओ के एक अधिकारी ने राज्य सरकार की उपलब्धियों के मैसेज भेजने के लिए सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों की नीजि जानकारी मांगी है।
रमेश चेन्निथला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बाता कि मुख्यमंत्री दफ्तर में विशेष कर्तव्य पर तैनात अधिकारी (ओएसडी) ने राज्य में आने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की नीजि जानकारी ने मांगी थीं। उन्होंने दावा किया कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम के मालिकों की नीजि जानकारी समेत, केरल सॉल्यूशंस फॉर मैनेजिंग एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्मेशन एंड ट्रांसफॉर्मेशन (KSMART) सिस्टम और सर्विस एंड पेरोल एडमिनिस्ट्रेटिव रिपॉजिटरी फॉर केरल (SPARK) से निजी जानकारी मांगी गई थीं।
उन्होंने आगे कहा कि ओएसडी की तरफ से 31 दिसंबर 2025 को एक पत्र जारी किया गया था। इस पत्र के जरिए 12 फरवरी तक जानकारी देने के लिए कहा गया था। यह डेटा प्राइवेसी का एक बड़ा उल्लंघन है। क्या ओएसडी, सीएम की जानकारी या मंज़ूरी के बिना ऐसा पत्र जारी कर सकता है? चेन्निथला ने कहा इसके पीछे एक बहुत बड़ी राजनीतिक साज़िश है। उन्होंने आगे कहा कि माकपा और एलडीएफ का राजनीतिक कैंपेन के लिए नीजि जानकारी का इस्तेमाल करना गैर-कानूनी और अलोकतांत्रिक था और ऐसा नहीं किया जाना चाहिए था।
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि OSD के लेटर के मुताबिक, डिटेल्स एक डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम -- सरकारी सेवाओं के लिए सेंट्रलाइज़्ड नोटिफिकेशन हब -- के हिस्से के तौर पर इकट्ठा की गई थीं, जिसे लॉन्च किया जा रहा है और जिसके लिए इन्फॉर्मेशन एंड पब्लिक रिलेशन्स डिपार्टमेंट (IPRD) काम कर रहा है।
कांग्रेस नेता के बयान से एक दिन पहले केरल हाईकोर्ट ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया था। कोर्ट ने मलप्पुरम के एक कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रशीद अहमद और तिरुवनंतपुरम में सेक्रेटेरिएट में क्लेरिकल असिस्टेंट अनिल कुमार के. एम. की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये बात कही थी। इन लोगों ने दावा किया था कि ऐसे मैसेज भेजना चुनाव कैंपेन जैसा है। हाई कोर्ट ने कहा था कि सीएमओ द्वारा अधिकारियों को कथित तौर पर भेजे गए ईमेल और मैसेज में राज्य सरकार की उपलब्धियां निजता में दखल हैं।
राज्य सरकार ने कोर्ट से वादा किया कि वह मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी तक ऐसे मैसेज नहीं भेजेगी।