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Supreme Court: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जजों की नियुक्तियों पर कॉलेजियम की मुहर, दो एडिशनल जज होंगे स्थायी
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 03 Jun 2026 05:51 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस हरमीत सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपेंद्र सिंह नलवा को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में स्थायी जज बनाने की मंजूरी दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला हुआ। इसके साथ ही अन्य राज्यों के लिए भी नियुक्तियों की सिफारिश की गई है।
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर)
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में दो एडिशनल जजों को स्थायी जज बनाने की सिफारिश की है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने यह महत्वपूर्ण फैसला लिया। बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि 2 जून 2026 को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
कॉलेजियम ने जस्टिस हरमीत सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपेंद्र सिंह नलवा को स्थायी जज नियुक्त करने के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है। ये दोनों जज अभी एडिशनल जज के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अब इन्हें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में स्थायी तौर पर नियुक्त किया जाएगा।
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संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (एक) के तहत राष्ट्रपति हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और जजों की नियुक्ति करते हैं। किसी एडिशनल जज को स्थायी बनाने की सिफारिश करते समय हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को कई जरूरी आंकड़े देने होते हैं। इसमें संबंधित जज के काम का पूरा ब्यौरा शामिल होता है।
इन आंकड़ों में यह बताना होता है कि जज ने हर महीने कितने केस निपटाए और कितने फैसले सुनाए। इसके अलावा कानून की पत्रिकाओं में छपे उनके फैसलों की संख्या की जानकारी भी देनी पड़ती है। साथ ही जज के काम के कुल दिनों, कोर्ट में उनकी वास्तविक उपस्थिति और अनुपस्थिति का पूरा रिकॉर्ड देना भी अनिवार्य है।
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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इसी दिन कुछ और सिफारिशें भी की हैं। इसमें कर्नाटक, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के हाई कोर्ट के लिए नई नियुक्तियों के प्रस्ताव शामिल हैं। कॉलेजियम ने इन राज्यों के हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए नए नामों की सूची भेजी है।
कॉलेजियम ने जस्टिस हरमीत सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपेंद्र सिंह नलवा को स्थायी जज नियुक्त करने के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है। ये दोनों जज अभी एडिशनल जज के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अब इन्हें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में स्थायी तौर पर नियुक्त किया जाएगा।
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इन आंकड़ों में यह बताना होता है कि जज ने हर महीने कितने केस निपटाए और कितने फैसले सुनाए। इसके अलावा कानून की पत्रिकाओं में छपे उनके फैसलों की संख्या की जानकारी भी देनी पड़ती है। साथ ही जज के काम के कुल दिनों, कोर्ट में उनकी वास्तविक उपस्थिति और अनुपस्थिति का पूरा रिकॉर्ड देना भी अनिवार्य है।
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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इसी दिन कुछ और सिफारिशें भी की हैं। इसमें कर्नाटक, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के हाई कोर्ट के लिए नई नियुक्तियों के प्रस्ताव शामिल हैं। कॉलेजियम ने इन राज्यों के हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए नए नामों की सूची भेजी है।