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क्रीमी लेयर पर सुप्रीम टिप्पणी: 'दोनों माता-पिता IAS हैं तो आरक्षण क्यों?', कोर्ट ने कहा- संतुलन जरूरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: रिया दुबे
Updated Fri, 22 May 2026 02:20 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट ने क्रीमी लेयर और आरक्षण को लेकर सुनवाई के दौरान कहा कि अगर माता-पिता शिक्षा और आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति में पहुंच चुके हैं, खासकर दोनों आईएएस अधिकारी हैं, तो उनके बच्चों को आरक्षण की जरूरत पर सवाल उठता है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आरक्षण और सामाजिक गतिशीलता के मुद्दे पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। पिछड़े वर्गों में क्रीमी लेयर को मिलने वाले आरक्षण लाभ से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि जिन परिवारों ने शिक्षा और आर्थिक रूप से प्रगति कर ली है, क्या उनके बच्चों को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।
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जस्टिस नागरत्ना ने आगे कहा कि छात्रों के माता-पिता अच्छी नौकरियों में हैं, अच्छी आय प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन उनके बच्चे फिर भी आरक्षण चाहते हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि उन्हें अब आरक्षण से बाहर निकलना चाहिए।
कोर्ट ने पूछे सख्त सवाल
न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अगर दोनों माता-पिता आईएएस अधिकारी हैं तो फिर उनके बच्चों को आरक्षण क्यों मिलना चाहिए?
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याचिकाकर्ता ने क्या कहा?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता शशांक रतनू ने कहा कि लोगों को उनकी सैलरी की वजह से नहीं, बल्कि उनके सामाजिक दर्जे के आधार पर बाहर किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रुप-ए कर्मचारियों को बाहर किया गया है और ग्रुप-बी कर्मचारियों को भी बाहर किया जाता है।
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आरक्षण को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?
इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के साथ सामाजिक गतिशीलता आती है। ऐसे में अगर अगली पीढ़ी भी आरक्षण मांगती रहेगी तो समाज कभी इससे बाहर नहीं निकल पाएगा। उन्होंने कहा कि यह भी एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है।जस्टिस नागरत्ना ने आगे कहा कि छात्रों के माता-पिता अच्छी नौकरियों में हैं, अच्छी आय प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन उनके बच्चे फिर भी आरक्षण चाहते हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि उन्हें अब आरक्षण से बाहर निकलना चाहिए।