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साइबर फ्रॉड पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: RBI को दिए 'म्यूल अकाउंट्स' पर SOP बनाने के आदेश; पीड़ितों को मिलेगी राहत?
Tue, 04 Aug 2026 05:40 PM IST
प्रशांत तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Tue, 04 Aug 2026 05:40 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी पर सख्त रुख अपनाते हुए RBI को 'म्यूल अकाउंट्स' समेत साइबर धोखाधड़ी से जुड़े बैंक खातों के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी करने का निर्देश दिया है। साथ ही राज्यों, बैंकों और जांच एजेंसियों को शिकायत निवारण, धन वापसी और जागरूकता बढ़ाने के लिए कई अहम निर्देश दिए गए हैं।
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सु्प्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को निर्देश दिया कि वह साइबर धोखाधड़ी से जुड़े बैंक खातों, जिनमें 'म्यूल अकाउंट्स' भी शामिल हैं, से निपटने के लिए एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर जारी करे। अदालत ने कहा कि इससे डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।
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कोर्ट ने राज्यों और एजेंसियों को क्या निर्देश दिए?
साइबर आधारित वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने की व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों के लिए विकसित शिकायत निवारण और धन वापसी (मनी रेस्टोरेशन) की व्यवस्था को शीघ्र अपनाकर प्रभावी ढंग से लागू करें।
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यह मामला किस याचिका से जुड़ा है?
सुप्रीम कोर्ट की पीठ 'इन री: विक्टिम्स ऑफ डिजिटल अरेस्ट रिलेटेड टू फोर्ज्ड डॉक्यूमेंट्स' मामले में स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेकर सुनवाई कर रही थी। यह मामला डिजिटल अरेस्ट और फर्जी दस्तावेजों के जरिए की जा रही साइबर ठगी से संबंधित है।
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RBI को और क्या जिम्मेदारी सौंपी गई?
अदालत ने RBI को यह भी निर्देश दिया कि वह तैयार की गई SOP की प्रति सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को उपलब्ध कराए। वहीं, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया कि वे लोगों को शिकायत निवारण और धन वापसी की उपलब्ध व्यवस्था के बारे में जागरूक करने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाएं।
हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को क्या निर्देश मिले?
सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से कहा कि वे अधीनस्थ अदालतों को शिकायत निवारण और मनी रेस्टोरेशन की व्यवस्था के बारे में जानकारी दें, ताकि साइबर धोखाधड़ी के पीड़ित उपलब्ध कानूनी उपायों का समय पर लाभ उठा सकें।
जवाबदेही बढ़ाने के लिए कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे साइबर धोखाधड़ी रोकथाम प्रणाली के तहत दर्ज और निपटाई गई शिकायतों का राज्यवार और बैंकवार विवरण प्रस्तुत करें। कोर्ट का मानना है कि इससे विभिन्न एजेंसियों और बैंकों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
फ्रीज़ किए गए बैंक खातों पर कोर्ट ने क्या कहा?
पीठ ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि साइबर धोखाधड़ी की जांच के दौरान फ्रीज़ किए गए बैंक खातों से जुड़े मामलों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए, ताकि निर्दोष खाताधारकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
अंतर-विभागीय समिति (IDC) को क्या जिम्मेदारी दी गई?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा गठित अंतर-विभागीय समिति (IDC) से कहा कि वह बैंकों और अन्य वित्तीय मध्यस्थों के साथ विचार-विमर्श कर 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे साइबर अपराधों पर रोक लगाने और पीड़ितों से ठगी गई रकम की शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने के लिए ठोस सुझाव तैयार करे।
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डिजिटल अरेस्ट पर पहले क्या सुझाव दे चुका है सुप्रीम कोर्ट?
ये निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले सप्ताह दिए गए उस महत्वपूर्ण सुझाव के बाद आए हैं, जिसमें केंद्र सरकार से कहा गया था कि वह 'डिजिटल अरेस्ट' को आपराधिक कानून में औपचारिक रूप से परिभाषित करने और इसे कड़ी सजा वाले एक अलग अपराध के रूप में शामिल करने पर गंभीरता से विचार करे।