सुप्रीम कोर्ट फर्जी मतदान पर सख्त: क्या बायोमेट्रिक सिस्टम से मतदान? अदालत ने केंद्र-चुनाव आयोग से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने मतदान केंद्रों पर फिंगर और आईरिस आधारित बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली लागू करने की मांग पर केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और राज्यों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि इसे फिलहाल आगामी चुनावों में लागू नहीं किया जा सकता, लेकिन भविष्य के चुनावों से पहले इस पर विचार जरूरी है।
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मतदान केंद्रों पर फिंगर और आईरिस आधारित बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली लागू करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह की तकनीक अपनाने से फर्जी और डुप्लीकेट वोटिंग पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
अदालत ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिका में मांगी गई व्यवस्था को फिलहाल आने वाले विधानसभा चुनावों में लागू नहीं किया जा सकता। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि यह विचार करने योग्य मुद्दा है कि क्या आगामी लोकसभा या राज्य विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह की प्रणाली लागू की जानी चाहिए।
पीठ ने कहा कि यह जांचने की जरूरत है कि क्या भविष्य के चुनावों से पहले ऐसे उपाय अपनाए जा सकते हैं, और इसी के साथ केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और कई राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
याचिका में क्या कहा गया?
यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि रिश्वत, अनुचित प्रभाव, फर्जी पहचान , डुप्लीकेट वोटिंग और घोस्ट वोटिंग जैसी समस्याएं अब भी चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता और निष्पक्षता को प्रभावित कर रही हैं, जिससे नागरिकों को व्यापक नुकसान होता है। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में केंद्र, चुनाव आयोग और संबंधित राज्यों के जवाब मिलने के बाद आगे की सुनवाई करेगा।
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