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Supreme Court: संसद में महिला आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल, तुरंत लागू करने को लेकर तेज हो रही मांग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Sun, 12 Apr 2026 10:58 PM IST
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सार

महिलाओं को संसद में 33% आरक्षण देने वाले कानून पर कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। यह याचिका कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि इसे जनगणना और परिसीमन से न जोड़ा जाए और तुरंत लागू किया जाए।

Supreme Court Hearing on Women Reservation in Parliament scheduled for Monday News In Hindi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : PTI
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विस्तार

देशभर में जहां एक ओर महिलाओं को संसद और विधानसभा में 33% आरक्षण देने के मुद्दे को लेकर सियासत तेज हो गई है। वहीं दूसरी ओर अब इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। सर्वोच्च न्यायालय कल यानी सोमवार 13 अप्रैल को सुनवाई करेगा। यह याचिका कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने दाखिल की है। इसमें मांग की गई है कि महिलाओं को आरक्षण देने वाला कानून नारी शक्ति वंदन अधिनियम तुरंत लागू किया जाए और इसे जनगणना व परिसीमन से न जोड़ा जाए।

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फिलहाल इस कानून में यह प्रावधान है कि महिलाओं को 33% आरक्षण तभी मिलेगा, जब अगली जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। लेकिन याचिका में कहा गया है कि यह शर्त जरूरी नहीं है, क्योंकि सीटों की संख्या पहले से तय है और देश की लगभग आधी आबादी होने के बावजूद महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है।
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जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच करेगी सुनवाई
इस मामले की सुनवाई जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच करेगी। इससे पहले 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कानून के इस प्रावधान को रद्द करना बहुत मुश्किल होगा। यह सुनवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र शुरू होने वाला है, जिसमें महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए संशोधन बिल लाया जा सकता है।

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पीएम मोदी ने सभी नेताओं से की है अपील
बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर इस कानून को सर्वसम्मति से पास करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि देश को विकसित बनाने के लिए महिलाओं की ज्यादा भागीदारी जरूरी है। हालांकि, कांग्रेस ने इस विशेष सत्र का विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि यह कदम चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हो सकता है, क्योंकि इस समय तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। साथ ही कांग्रेस ने मांग की है कि पहले परिसीमन पर सभी दलों की बैठक होनी चाहिए, उसके बाद ही महिला आरक्षण पर आगे बढ़ना चाहिए।

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