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Supreme Court: 'लापता बच्चों की बरामदगी के लिए देश में एक समान एसओपी जरूरी', कोर्ट ने कहा- यह राष्ट्रीय समस्या

अमर उजाला ब्यूरो Published by: लव गौर Updated Thu, 22 Jan 2026 05:09 AM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह देशभर में लापता बच्चों की बरामदगी के लिए एक सामान्य मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करेगा। अदालत ने कहा कि बच्चों की गुमशुदगी के मामले किसी एक राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि यह एक राष्ट्रीय समस्या बन चुकी है।

Supreme Court indicated that it will formulate a common SoP for recovery of missing children across country
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बच्चों के लापता होने के बढ़ते मामलों और इस समस्या पर गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि बच्चों की गुमशुदगी के मामले किसी एक राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि यह एक राष्ट्रीय समस्या बन चुकी है। कोर्ट ने लापता बच्चों की बरामदगी के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है और शुरुआती स्तर पर की गई प्रभावी कार्रवाई ही बच्चे के सुरक्षित मिलने की संभावना को तय करती है।
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जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की पीठ तमिलनाडु से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें वर्ष 2011 में 22 महीने की बच्ची के लापता होने का मामला सामने आया था। पीठ ने कहा कि इतने वर्षों बाद अब जाकर राज्य सरकार इस मामले में सक्रिय होती दिखाई दे रही है। पीठ ने कहा कि लापता बच्चों के मामले केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं हैं। यह एक राष्ट्रीय समस्या बन चुकी है। इसके बावजूद कई राज्य सरकारें इन मामलों को आवश्यक प्राथमिकता नहीं दे रही हैं। अदालत का प्रयास होगा कि पूरे देश में लागू होने वाली एक समान एसओपी तैयार की जाए, क्योंकि ऐसे मामलों में समय की भूमिका सबसे निर्णायक होती है। अदालत ने केंद्र को गृह सचिव के माध्यम से सभी राज्य सरकारों व केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है।
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पुलिस पर लापरवाही का आरोप
याचिकाकर्ता, जो लापता बच्ची के पिता हैं, ने आरोप लगाया कि उन्होंने बच्ची के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने प्रभावी कदम नहीं उठाए और मजिस्ट्रेट के समक्ष क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। इसके बाद मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश पर सेंट्रल क्राइम ब्रांच से जांच कराई गई, जिसने बच्ची को अनट्रेसेबल बताया। बाद में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने भी यही निष्कर्ष निकाला। जिसके बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष मामला बंद कर दिया गया।

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हाईकोर्ट ने खारिज की पुनरीक्षण याचिका
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि गृह मंत्रालय की 2013 के दिशानिर्देश के अनुसार, अगर चार महीने के भीतर कोई लापता बच्चा नहीं मिलता है तो मामला एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को सौंपा जाना चाहिए। हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट ने यह कहते हुए पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी कि बच्ची के लापता होने की घटना 2011 की है, इसलिए 2013 की गाइडलाइन उस पर लागू नहीं होती। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ बच्ची के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी।

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