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Supreme Court: देशभर के थानों में CCTV व्यवस्था को लेकर सुनवाई, अदालत ने राज्यों की प्रगति पर जताई संतुष्टि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: शिवम गर्ग
Updated Wed, 13 May 2026 08:28 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि अधिकांश राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पुलिस स्टेशनों में CCTV लगाने के काम में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अदालत ने फंडिंग और कार्यान्वयन पर चर्चा करते हुए अगली सुनवाई 22 जुलाई तय की है।
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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विस्तार
देश के अधिकतर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और इस संबंध में काफी काम पूरा हो चुका है। यह जानकारी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को दी गई। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच (जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई) ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केंद्र सरकार राज्यों द्वारा CCTV इंस्टॉलेशन के लिए मांगी गई फंडिंग पर विचार करेगी। यह मामला पुलिस स्टेशनों में कार्यरत CCTV कैमरों की कमी से जुड़ी एक सुओ मोटो (स्वतः संज्ञान) याचिका से संबंधित है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट पहले से सुनवाई कर रहा है।
राज्यों की प्रगति पर क्या कहा गया?
कोर्ट की मदद कर रहे अमिकी क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने बताया कि 28 अप्रैल के आदेश के बाद 6 मई को केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई थी। उन्होंने इसकी रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर दी है। दवे ने कहा कि कई राज्यों ने केंद्र से अतिरिक्त फंड की मांग की है और इस दिशा में प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ तकनीकी और प्रशासनिक मुद्दों पर आगे चर्चा की जरूरत है, जिसके लिए जून या जुलाई में एक और बैठक प्रस्तावित है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यह देखकर अच्छा लग रहा है कि काम सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि केंद्र सरकार राज्यों की फंडिंग संबंधी मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी। मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को निर्धारित की गई है।
CCTV सिस्टम को लेकर सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि:-
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में केंद्र और राज्यों को बैठक कर CCTV इंस्टॉलेशन की फंड उपयोगिता और कार्यान्वयन पर चर्चा करने का निर्देश दिया था। इससे पहले अदालत ने 2018 में आदेश दिया था कि देश के सभी पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाए जाएं ताकि मानवाधिकार उल्लंघन पर रोक लगाई जा सके। इसके बाद दिसंबर 2020 में कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जांच एजेंसियों जैसे सीबीआई, ईडी और एनआईए के कार्यालयों में भी CCTV कैमरे लगाए जाएं।
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राज्यों की प्रगति पर क्या कहा गया?
कोर्ट की मदद कर रहे अमिकी क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने बताया कि 28 अप्रैल के आदेश के बाद 6 मई को केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई थी। उन्होंने इसकी रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर दी है। दवे ने कहा कि कई राज्यों ने केंद्र से अतिरिक्त फंड की मांग की है और इस दिशा में प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ तकनीकी और प्रशासनिक मुद्दों पर आगे चर्चा की जरूरत है, जिसके लिए जून या जुलाई में एक और बैठक प्रस्तावित है।
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यह देखकर अच्छा लग रहा है कि काम सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि केंद्र सरकार राज्यों की फंडिंग संबंधी मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी। मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को निर्धारित की गई है।
CCTV सिस्टम को लेकर सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि:-
- हर पुलिस स्टेशन में CCTV कैमरे अनिवार्य होंगे।
- सभी एंट्री और एग्जिट पॉइंट कवर किए जाएंगे।
- लॉकअप, कॉरिडोर, लॉबी और रिसेप्शन भी निगरानी में रहेंगे।
- नाइट विजन और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग सुविधा जरूरी होगी।
- डेटा स्टोरेज कम से कम एक साल तक अनिवार्य होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में केंद्र और राज्यों को बैठक कर CCTV इंस्टॉलेशन की फंड उपयोगिता और कार्यान्वयन पर चर्चा करने का निर्देश दिया था। इससे पहले अदालत ने 2018 में आदेश दिया था कि देश के सभी पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाए जाएं ताकि मानवाधिकार उल्लंघन पर रोक लगाई जा सके। इसके बाद दिसंबर 2020 में कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जांच एजेंसियों जैसे सीबीआई, ईडी और एनआईए के कार्यालयों में भी CCTV कैमरे लगाए जाएं।