Supreme Court: बिहार में जहरीली शराब से मौत मामले में नौ जनवरी को सुनवाई, निलंबित IAS पूजा सिंघल को मिली जमानत
झारखंड की निलंबित महिला आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को सुप्रीम कोर्ट से एक महीने के लिए अंतरिम जमानत मिल गई है।
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बिहार में पिछले महीने हुई जहरीली शराब त्रासदी की विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा स्वतंत्र जांच की मांग वाली एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में नौ जनवरी को सुनवाई होगी। इस याचिका में राज्य सरकार को पीड़ित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। बता दें कि सारण जिले में हुई त्रासदी, जहां अवैध शराब के सेवन से कम से कम 30 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ के समक्ष मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए उल्लेख किया गया था। पीठ ने इस मामले का उल्लेख करने वाले अधिवक्ता पवन प्रकाश पाठक से कहा कि इसपर नौ जनवरी को सुनवाई होगी।
झारखंड की निलंबित IAS अधिकारी पूजा सिंघल को जमानत
झारखंड की निलंबित महिला आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को मंगलवार(तीन जनवरी) को सुप्रीम कोर्ट से एक महीने के लिए अंतरिम जमानत मिल गई है। उन्हें यह जमानत मेडिकल ग्राउंड पर मिली है। सिंघल को गिरफ्तारी के सात माह 23 दिन बाद यह अंतरिम जमानत मिली है। बता दें कि 2000 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की अधिकारी पूजा सिंघल को 11 मई को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। उनके ऊपर मनरेगा योजना में कथित अनियमितता करने का गंभीर आरोप है।
बीमार बेटी की देखभाल के लिए मिली जमानत
उच्चतम न्यायालय ने पूजा सिंघल को अपनी बीमार बेटी की देखभाल के लिए एक महीना के लिए अंतरिम जमानत दी है। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति अभय एस ओका की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय को सिंघल की मुख्य जमानत याचिका पर तीन सप्ताह में जवाब देने का भी निर्देश दिया। ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि याचिका गलत है और इसमें कोई दम नहीं है। कानून अधिकारी ने कहा कि मैं इस तरह की दलीलों का विरोध करने वाला आखिरी व्यक्ति होऊंगा।
रांची जाने पर फिलहाल रोक
शीर्ष अदालत, जिसने अब निलंबित आईएएस अधिकारी की याचिका को 6 फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कुछ शर्तें भी लगाई हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि जब तक शहर में सुनवाई के लिए अदालत का मामला सूचीबद्ध नहीं हो जाता, तब तक वह रांची नहीं जाएंगी।
11 मई से हिरासत हैं पूजा सिंघल
पूजा सिंघल 11 मई से उनसे जुड़ी संपत्तियों पर छापेमारी के बाद से हिरासत में हैं। ईडी ने राज्य के खान विभाग के पूर्व सचिव सिंघल पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है और कहा है कि उनकी टीम ने दो अलग-अलग मनी लॉन्ड्रिंग जांचों के तहत कथित अवैध खनन से जुड़े 36 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी जब्त की है।
सुप्रीम कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए कांग्रेस के पूर्व पार्षद बलवान खोखर की जमानत याचिका पर मंगलवार को सीबीआई से जवाब मांगा। खोखर ने जेल में लगभग नौ साल जेल में गुजारने समेत विभिन्न आधार पर जमानत का अनुरोध किया है। खोखर के अलावा कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार इसी मामले में आजीवन कारावास और और पूर्व विधायक महेंद्र यादव को 10 साल की जेल की सजा काट रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट गुजरात कैडर के बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट की याचिका पर 10 जनवरी को सुनवाई करेगा। याचिका में भट्ट ने गुजरात हाईकोर्ट में दायर उनकी एक अपील में अतिरिक्त साक्ष्य पेश करने के लिए अनुमति देने का अनुरोध किया है। भट्ट ने हिरासत में मौत के 1990 के एक मामले में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में अपील दायर की है। भट्ट ने हिरासत में मौत के 30 साल पुराने मामले में उम्रकैद की सजा को निलंबित करने की अपनी याचिका अगस्त 2022 में सर्वोच्च अदालत से वापस ले ली थी। हाईकोर्ट ने पहले भट्ट की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि उनके मन में अदालतों के प्रति बहुत सम्मान नहीं है और उन्होंने जानबूझकर कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की कोशिश की। उन्हें मामले में जून 2019 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। मामला प्रभुदास वैष्णनी की हिरासत में मौत से संबंधित है।
छह जनवरी को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
समलैंगिक विवाहों को मान्यता देने के लिए हाई कोर्ट में लंबित याचिकाओं को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की गई है। इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 6 जनवरी को सुनवाई करेगा। सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ के समक्ष तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए मंगलवार को याचिकाओं का उल्लेख किया गया था।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 14 दिसंबर को केंद्र से दो याचिकाओं पर जवाब मांगा था जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी ताकि समलैंगिक विवाह को मान्यता देने के निर्देश दिए जा सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह आपूर्तिकर्ताओं को नामांकित करने के बजाय निविदाएं आमंत्रित कर आयुर्वेदिक दवाओं की खरीद करे। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने विभिन्न फैसलों का जिक्र करते हुए कहा, सरकार जनता के साथ व्यवहार करते समय मनमानी नहीं कर सकती, चाहे वह नौकरी दे रही हो या अनुबंध कर रही हो।
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) मेसर्स इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड की अपील को खारिज कर दिया। इसमें कहा गया था कि राज्य केवल पीएसयू से आयुर्वेदिक दवाएं नहीं खरीद सकता है।