सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court on Monday said that RTI activism has become a new business

'यह नया व्यवसाय बन गया है' :RTI एक्टिविज्म पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, आरोपियों को अग्रिम जमानत देने से इनकार

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Updated Mon, 15 Jun 2026 04:27 PM IST
विज्ञापन
सार

सुप्रीम कोर्ट ने ने आरटीआई सक्रियता को नया व्यवसाय बताते हुए पीत पत्रकारिता पर सवाल उठाए हैं और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोपों को गंभीर माना है।

Supreme Court on Monday said that RTI activism has become a new business
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत सक्रियता को "एक नया व्यवसाय" करार देते हुए एक आरटीआई कार्यकर्ता और सड़क निर्माण कार्य में सरकारी कर्मचारी को बाधा पहुंचाने के आरोपी अन्य लोगों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।



जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने आरटीआई एक्टिविस्ट राकेश कुमार बहल और उनके सहयोगी को जमानत देने से इनकार कर दिया और सड़क निर्माण के काम की निगरानी करने के उनके अधिकार पर भी सवाल उठाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


न्यायालय ने क्या कहा?
जस्टिस मेहता ने कहा, आरटीआई सक्रियता लोगों के बीच एक नया व्यवसाय बन गया है। केंद्र सरकार ने फंड जारी किया है, वही सड़क निर्माण का ध्यान रखेगी। आप कोई नहीं हैं। तथाकथित आईटीआई  एक्टिविस्ट! येलो जर्नलिज्म... याचिका खारिज। 
विज्ञापन


जस्टिस मेहता की राय से सहमत होते हुए जस्टिस बिश्नोई ने कहा, इन सभी सड़कों के निर्माण की निगरानी करने वाले आप कौन हैं? क्या आप कोई उच्च अधिकारी हैं या क्या हैं? बहल ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। उनके वकील ने तर्क दिया कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है क्योंकि उन्होंने सड़क निर्माण कार्य में शामिल भ्रष्टाचार को उजागर किया था।

मामले की पृष्ठभूमि
एफआईआर के अनुसार, बहल ने एक अन्य आरोपी राजीव कुमार उर्फ मिंटू के साथ मिलकर पंजाब के गुरदासपुर जिले के बटाला में चल रहे सड़क निर्माण कार्य में बाधा डाली और उस शिकायतकर्ता को भी धमकाया जिसकी देखरेख में काम हो रहा था और साइट पर मौजूद मजदूरों को भी डराया-धमकाया।

उन्होंने मजदूर के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और शिकायतकर्ता को चोट भी पहुंचाई। उनके खिलाफ बीएनएस 2023 की धारा 304(2), 132, 221, 121(1), 351(2), 351(3) (बीएनएस 2023 की धारा 3(5), 121(2) और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 14 मई के अपने आदेश में कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोप सरकारी काम में बाधा डालने में उनकी विशिष्ट और सीधी संलिप्तता को दर्शाते हैं। मामले की सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed