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रक्षा क्षेत्र में बड़ी छलांग: DRDO ने किया स्वदेशी लॉन्ग रेंज क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण, भारत की बढ़ी ताकत
एएनआई, भुवनेश्वर।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 15 Jun 2026 07:48 PM IST
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सार
डीआरडीओ ने ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (एलआरएलएसीएम) का सफल टेस्ट किया है। भारतीय उद्योगों की मदद से बनी यह मिसाइल बेहद सटीक मार करती है, जो रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' को मजबूत करेगी।
क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारत ने रक्षा क्षेत्र में आज एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ओडिशा के तट पर एक बड़ा परीक्षण किया है। यह टेस्ट डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया है। यहां भारत में ही बनी 'लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल' (एलआरएलएसीएम) का सफल परीक्षण हुआ। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस टेस्ट के दौरान मिसाइल ने अपने सभी लक्ष्यों को पूरा किया।
सभी मिशन उद्देश्यों में सफल और सटीक मारक क्षमता
इस सफल परीक्षण से भारत की ताकत का पता चलता है। अब भारत लंबी दूरी तक बिल्कुल सटीक निशाना लगा सकता है। उड़ान के दौरान मिसाइल की नई तकनीकों को परखा गया। यह मिसाइल सभी पैमानों पर पूरी तरह खरी उतरी है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि मिसाइल के सभी कलपुर्जों ने बेहतरीन काम किया। यह कामयाबी देश की सैन्य ताकत को बहुत मजबूत करेगी।
भारतीय उद्योग की भागीदारी
यह मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी है। इसे भारत में ही तैयार किया गया है। डीआरडीओ ने इसे भारतीय उद्योगों के सहयोग से बनाया है। रक्षा मंत्रालय ने इस सफलता को 'आत्मनिर्भर भारत' के लिए एक बहुत बड़ा कदम बताया है। इससे हमारे देश के रक्षा उद्योग को बहुत बढ़ावा मिलेगा। अब रक्षा तकनीकों के लिए दूसरे देशों पर भारत की निर्भरता कम होगी।
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यह भी पढ़ें: DRDO LRDE Internship: बंगलुरू स्थित डीआरडीओ लैब में इंटर्नशिप, 75 पदों पर होगी भर्ती, स्टाइपेंड भी मिलेगा
क्रूज मिसाइल का विकास और इसकी ताकत
यह लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल भारत के पुराने 'निर्भय' मिसाइल कार्यक्रम का ही एक बेहद आधुनिक और स्वदेशी रूप है। भारत ने साल 2013 में 'निर्भय' मिसाइल का परीक्षण शुरू किया था, जिसके बाद डीआरडीओ ने इसमें से विदेशी कलपुर्जे हटाकर पूरी तरह भारत में बना 'माणिक' इंजन और स्वदेशी नेविगेशन तकनीक लगाई। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने तीनों सेनाओं के लिए इस मिसाइल प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी, जिसका पहला सफल फ्लाइट-टेस्ट अब ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से पूरा कर लिया गया है।
उपयोग और भारत के मिसाइल बेड़े में इसका महत्व
यह एक मल्टी-प्लेटफॉर्म मिसाइल है, जिसे भारतीय नौसेना अपने युद्धपोतों और पनडुब्बियों पर तैनात करेगी, जबकि थल सेना और वायुसेना भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगी। भारत के पास पहले से मौजूद 'ब्रह्मोस' मिसाइल अपनी तेज रफ्तार के कारण 290 से 500 किमी तक मार करती है, वहीं यह मिसाइल जमीन से बिल्कुल सटकर उड़ती है, जिससे दुश्मन का रडार इसे पकड़ नहीं पाता और यह कम खर्च में लंबी दूरी के लक्ष्यों को तबाह करने की भारत को बड़ी क्षमता देती है।
सभी मिशन उद्देश्यों में सफल और सटीक मारक क्षमता
इस सफल परीक्षण से भारत की ताकत का पता चलता है। अब भारत लंबी दूरी तक बिल्कुल सटीक निशाना लगा सकता है। उड़ान के दौरान मिसाइल की नई तकनीकों को परखा गया। यह मिसाइल सभी पैमानों पर पूरी तरह खरी उतरी है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि मिसाइल के सभी कलपुर्जों ने बेहतरीन काम किया। यह कामयाबी देश की सैन्य ताकत को बहुत मजबूत करेगी।
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भारतीय उद्योग की भागीदारी
यह मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी है। इसे भारत में ही तैयार किया गया है। डीआरडीओ ने इसे भारतीय उद्योगों के सहयोग से बनाया है। रक्षा मंत्रालय ने इस सफलता को 'आत्मनिर्भर भारत' के लिए एक बहुत बड़ा कदम बताया है। इससे हमारे देश के रक्षा उद्योग को बहुत बढ़ावा मिलेगा। अब रक्षा तकनीकों के लिए दूसरे देशों पर भारत की निर्भरता कम होगी।
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क्रूज मिसाइल का विकास और इसकी ताकत
यह लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल भारत के पुराने 'निर्भय' मिसाइल कार्यक्रम का ही एक बेहद आधुनिक और स्वदेशी रूप है। भारत ने साल 2013 में 'निर्भय' मिसाइल का परीक्षण शुरू किया था, जिसके बाद डीआरडीओ ने इसमें से विदेशी कलपुर्जे हटाकर पूरी तरह भारत में बना 'माणिक' इंजन और स्वदेशी नेविगेशन तकनीक लगाई। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने तीनों सेनाओं के लिए इस मिसाइल प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी, जिसका पहला सफल फ्लाइट-टेस्ट अब ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से पूरा कर लिया गया है।
उपयोग और भारत के मिसाइल बेड़े में इसका महत्व
यह एक मल्टी-प्लेटफॉर्म मिसाइल है, जिसे भारतीय नौसेना अपने युद्धपोतों और पनडुब्बियों पर तैनात करेगी, जबकि थल सेना और वायुसेना भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगी। भारत के पास पहले से मौजूद 'ब्रह्मोस' मिसाइल अपनी तेज रफ्तार के कारण 290 से 500 किमी तक मार करती है, वहीं यह मिसाइल जमीन से बिल्कुल सटकर उड़ती है, जिससे दुश्मन का रडार इसे पकड़ नहीं पाता और यह कम खर्च में लंबी दूरी के लक्ष्यों को तबाह करने की भारत को बड़ी क्षमता देती है।