मतदाता सूची की सटीकता पर सवाल: असम में SR की जगह SIR कराने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों खारिज कर दी याचिका?
सुप्रीम कोर्ट ने असम में मतदाता सूची के गहन विशेष संशोधन (एसआईआर) की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। चुनाव आयोग पहले ही अंतिम वोटर सूची प्रकाशित कर चुका है। याचिका मृणाल कुमार चौधरी ने साधारण संशोधन के फैसले को चुनौती देने के लिए दायर की थी।
विस्तार
असम में विधानसभा चुनाव से मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता को लेकर सियासत में गर्माहट तेज है। ऐसे में इस मामले में चर्चा ज्यादा तेज तब हो गई जब सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें चुनाव आयोग से गहन विशेष संशोधन (एसआईआर) कराने की मांग थी। याचिका असम में केवल सामान्य विशेष संशोधन पर रोक लगाने की कोशिश थी, जबकि आयोग पहले ही अंतिम सूची प्रकाशित कर चुका था।
मामले में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमल्या बगची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने चुनाव आयोग की बात को ध्यान में रखते हुए कहा कि असम की अंतिम वोटर सूची पहले ही तैयार हो चुकी है और इसलिए याचिका अब अप्रासंगिक हो गई है।
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किस मामले में दायर की गई थी याचिका, समझिए
बता दें कि याचिका मृणाल कुमार चौधरी ने दायर की थी। इसमें चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें असम में साधारण विशेष संशोधन कराने का निर्णय लिया गया, जबकि अन्य राज्यों में जैसे पश्चिम बंगाल और बिहार में गहन विशेष संशोधन (एसआईआर) किया जा रहा है या कराया गया।
याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने कहा कि असम में वोटर सूची की सही और सटीक जानकारी के लिए गहन संशोधन की जरूरत है। लेकिन चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी एस नायडू ने कोर्ट को बताया कि असम की अंतिम वोटर सूची 10 फरवरी, 2026 को पहले ही प्रकाशित कर दी गई है।
याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया रुख
इसके बाद चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि अब कुछ भी बचा नहीं है। बेंच ने यह भी जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने का अधिकार खुद से नहीं ले सकता, क्योंकि इस तरह के मामलों के लिए कानून में समीक्षा तिथियां और विशेष न्यायाधिकरण तय हैं। उन्होंने हंसारिया से कहा कि इस मामले में बहुत संवेदनशील और सतर्क रहना जरूरी है।
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असम में एसआईआर कराने की मांग
गौरतलब है कि याचिका में चुनाव आयोग के 17 नवंबर, 2025 के आदेश को रद्द करने और असम में बिहार की तरह गहन विशेष संशोधन (एसआईआर) कराने की मांग की गई थी। इसके अलावा, याचिका में यह भी कहा गया था कि वोटर सूची में शामिल करने के लिए आधार कार्ड को वैध दस्तावेज न माना जाए। विशेष संशोधन (एसआर) के बाद असम के मुख्य चुनाव अधिकारी के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल मतदाता संख्या 2.43 लाख कम हुई है।
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