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Supreme Court: भगदड़ पीड़ितों से CM विजय की मुलाकात, अदालत ने DMK को सवाल उठाने पर फटकारा; मामला क्या?

Tue, 07 Jul 2026 01:59 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 07 Jul 2026 01:59 PM IST
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Supreme Court reprimands DMK question over CM Vijay meeting Karur stampede victims other cases hearing updates
सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स - फोटो : अमर उजाला

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को DMK को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की करूर भगदड़ पीड़ितों के परिवारों से निर्धारित मुलाकात पर सवाल उठाने के लिए फटकार लगाई। अदालत ने DMK की उस याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य के मंत्री मामले में गवाहों को प्रभावित कर रहे हैं। न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की खंडपीठ ने DMK से पूछा कि अदालत कार्यपालिका प्रमुख के दौरे को कैसे विनियमित कर सकती है। पीठ ने DMK के वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार से पूछा कि भगदड़ पीड़ितों से मिलना गवाहों को प्रभावित करने जैसा कैसे है।

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किस मामले में याचिका वापस ली गई?
मुख्यमंत्री विजय 10 जुलाई को भगदड़ पीड़ितों के परिवारों से मिलने वाले हैं। अदालत ने कुमार से कहा कि DMK अपनी याचिका वापस ले सकती है और कानून के तहत कोई अन्य उपाय अपना सकती है, अन्यथा अदालत इसे खारिज कर देगी। कुमार ने किसी अन्य मंच पर जाने की स्वतंत्रता के साथ याचिका वापस लेने पर सहमति व्यक्त की। शीर्ष अदालत ने याचिका को वापस लिया हुआ मानकर खारिज कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट में किसने दायर की थी याचिका?
DMK सचिव आर एस भारती ने यह याचिका दायर की थी। इसमें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री, राज्य मंत्री आधाव अर्जुन और अन्य आरोपियों को मामले पर सार्वजनिक बयान देने से रोकने की मांग की गई थी। साथ ही, CBI जांच लंबित रहने के दौरान पीड़ितों के परिवारों के साथ उनकी बातचीत को विनियमित करने की भी मांग की गई थी। याचिका में उन रिपोर्टों का उल्लेख किया गया था कि मुख्यमंत्री करूर का दौरा कर मृतक और घायल पीड़ितों के परिवारों को सरकारी आदेश, अनुकंपा नियुक्तियां और अन्य लाभ वितरित करने वाले हैं। भारती ने एक लंबित मामले में हस्तक्षेप की अपील की थी। उन्होंने कोर्ट से कहा, 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद मामले में शुरू में आरोपपत्रित कई लोग अब तमिलनाडु मंत्रिमंडल में मंत्री हैं। पिछले साल 13 अक्तूबर को शीर्ष अदालत ने भगदड़ की CBI जांच का आदेश दिया था, जिसमें 41 लोग मारे गए थे। अदालत ने कहा था कि इस घटना ने राष्ट्रीय अंतरात्मा को झकझोर दिया था और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता थी।

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