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Supreme Court: 'ट्रॉमा केयर का अधिकार, जीवन के अधिकार का हिस्सा', सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 28 May 2026 02:22 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रामा केयर को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर आपात सेवाओं के लिए एकीकृत हेल्पलाइन नंबर जारी करने का निर्देश दिया है। 

supreme court said Right to trauma care of citizens integral part of right to life
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नागरिकों को ट्रॉमा केयर उपलब्ध कराना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर आपातकालीन सेवाओं के लिए एकीकृत हेल्पलाइन नंबर '112' पूरी तरह लागू करने और गुड समैरिटन शिकायत निवारण तंत्र (नेक मददगार शिकायत निवारण प्रणाली) स्थापित करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चांदूरकर की पीठ ने मंगलवार को यह आदेश सेव लाइफ फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में ट्रॉमा केयर को भारतीय सार्वजनिक कानून व्यवस्था में एक अधिकार के रूप में मान्यता देने की मांग की गई थी।


सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़क दुर्घटना या किसी गंभीर हादसे के बाद हर मिनट बेहद अहम होता है और समय पर इलाज न मिलने से व्यक्ति के बचने की संभावना तेजी से कम हो जाती है। अदालत ने टिप्पणी की, 'ऐसी स्थिति में त्वरित मदद किसी दवा की तरह काम करती है।' पीठ ने कहा कि ट्रॉमा केयर व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ऐसी सोच अपनाने की जरूरत है, जिसमें आम नागरिकों से लेकर अस्पताल और प्रशासन तक सभी की भूमिका तय हो।
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घायलों की मदद करने वाले लोगों को सुरक्षा देने का निर्देश
अदालत ने माना कि कई बार लोग मदद करने से इसलिए हिचकते हैं क्योंकि उन्हें पुलिस पूछताछ, कानूनी प्रक्रिया या गवाह बनाए जाने का डर रहता है। इसे देखते हुए कोर्ट ने एक समान ट्रॉमा केयर ढांचा, प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण और प्रभावी गुड समैरिटन कानून लागू करने पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन महीने के भीतर ट्रॉमा मामलों के लिए मेडिकल रेस्क्यू प्रोटोकॉल जारी करने की अनुमति देने को कहा और राज्यों को इसे लागू करने का निर्देश दिया।
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सुप्रीम कोर्ट ने दिए अहम निर्देश
  • अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सार्वजनिक और निजी एम्बुलेंस में एआईएस-125 मानकों का पालन सुनिश्चित करने, जीपीएस और वाहन ट्रैकिंग सिस्टम लगाने तथा हेल्पलाइन 112 से रियल-टाइम इंटीग्रेशन करने का भी आदेश दिया।
  • इसके अलावा, स्वास्थ्य मंत्रालय को आठ सप्ताह के भीतर ट्रॉमा रजिस्ट्री के लिए डेटा प्रारूप संबंधी दिशानिर्देश जारी करने को कहा गया है। राज्यों को चार महीने के भीतर राज्य स्तरीय ट्रॉमा रजिस्ट्री बनाकर उसे राष्ट्रीय समन्वित प्रणाली से जोड़ना होगा।
  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को हेल्पलाइन 112, गुड समैरिटन सुरक्षा कानून और पीएम राहत कैशलेस उपचार योजना को लेकर बहुभाषी जनजागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया है।
  • अदालत ने कहा कि जिन राज्यों ने अभी तक पीएम राहत योजना लागू नहीं की है, वे तीन महीने के भीतर इसे पूरी तरह लागू करें। मामले की अगली सुनवाई चार महीने बाद होगी।

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