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'सिर्फ सवाल पूछने के लिए नहीं कर सकते गिरफ्तार': सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को दी कड़ी नसीहत; जानें क्या-क्या कहा?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नवीन पारमुवाल
Updated Fri, 06 Feb 2026 05:04 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी के अधिकार पर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि पुलिस सिर्फ सवाल पूछने के लिए किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकती। यह पुलिस का एक अधिकार है, कोई अनिवार्य काम नहीं।
पुलिस को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी नसीहत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Supreme Court: पुलिस की गिरफ्तारी की शक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति को सिर्फ सवाल पूछने के लिए गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। गिरफ्तारी पुलिस अधिकारी का एक कानूनी अधिकार है, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं कहा जा सकता। यह फैसला नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के प्रावधानों के संबंध में आया है।
जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस एन के सिंह की बेंच ने कहा कि पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। गिरफ्तारी तभी की जानी चाहिए जब यह जांच के लिए बेहद जरूरी हो, न कि पुलिस अधिकारी की सुविधा के लिए। पुलिस को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या गिरफ्तारी के बिना जांच आगे नहीं बढ़ सकती।
सात साल तक की सजा वाले मामलों में नियम
कोर्ट ने आगे कहा कि सात साल तक की सजा वाले अपराधों में यह नियम और भी सख्ती से लागू होता है। पुलिस अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित व्यक्ति को हिरासत में लिए बिना जांच प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ सकती। इसके विपरीत कोई भी व्याख्या बीएनएसएस, 2023 की धारा 35(1)(बी) और धारा 35(3) से 35(6) के उद्देश्य को विफल कर देगी।
यह बेंच इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी। इसमें यह सवाल तय किया जाना था कि क्या सात साल तक की सजा वाले सभी मामलों में बीएनएसएस, 2023 की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करना अनिवार्य है।
यह भी पढ़ें: संसद असुरक्षा विवाद: संजय राउत बोले- लोकसभा स्पीकर के दावे हास्यास्पद; बिरला ने जताई थी PM की सुरक्षा पर चिंता
गिरफ्तारी अपवाद है, सामान्य नियम नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल सामान्य प्रक्रिया के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए। यह एक अपवाद है और पुलिस अधिकारी से उम्मीद की जाती है कि वे इस शक्ति का प्रयोग करते समय धीमे और सतर्क रहें। कोर्ट ने कहा, "एक पुलिस अधिकारी द्वारा की गई गिरफ्तारी केवल एक कानूनी अधिकार है, जो उसे सबूत इकट्ठा करने जैसी उचित जांच करने में मदद करता है, इसलिए इसे अनिवार्य नहीं कहा जाएगा।"
जांच के लिए गिरफ्तारी जरूरी नहीं
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी करने से पहले खुद से पूछना होगा कि यह जरूरी है या नहीं। जांच बिना किसी को गिरफ्तार किए भी आगे बढ़ सकती है। सबूत इकट्ठा करने की प्रक्रिया के दौरान, पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी की जरूरत पर विचार करना चाहिए। यह एक सुरक्षा उपाय है, क्योंकि किसी भी हाल में आरोपी को गिरफ्तार करने की शक्ति पुलिस के पास बाद में भी उपलब्ध रहती है।
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जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस एन के सिंह की बेंच ने कहा कि पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। गिरफ्तारी तभी की जानी चाहिए जब यह जांच के लिए बेहद जरूरी हो, न कि पुलिस अधिकारी की सुविधा के लिए। पुलिस को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या गिरफ्तारी के बिना जांच आगे नहीं बढ़ सकती।
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सात साल तक की सजा वाले मामलों में नियम
कोर्ट ने आगे कहा कि सात साल तक की सजा वाले अपराधों में यह नियम और भी सख्ती से लागू होता है। पुलिस अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित व्यक्ति को हिरासत में लिए बिना जांच प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ सकती। इसके विपरीत कोई भी व्याख्या बीएनएसएस, 2023 की धारा 35(1)(बी) और धारा 35(3) से 35(6) के उद्देश्य को विफल कर देगी।
यह बेंच इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी। इसमें यह सवाल तय किया जाना था कि क्या सात साल तक की सजा वाले सभी मामलों में बीएनएसएस, 2023 की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करना अनिवार्य है।
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गिरफ्तारी अपवाद है, सामान्य नियम नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल सामान्य प्रक्रिया के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए। यह एक अपवाद है और पुलिस अधिकारी से उम्मीद की जाती है कि वे इस शक्ति का प्रयोग करते समय धीमे और सतर्क रहें। कोर्ट ने कहा, "एक पुलिस अधिकारी द्वारा की गई गिरफ्तारी केवल एक कानूनी अधिकार है, जो उसे सबूत इकट्ठा करने जैसी उचित जांच करने में मदद करता है, इसलिए इसे अनिवार्य नहीं कहा जाएगा।"
जांच के लिए गिरफ्तारी जरूरी नहीं
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी करने से पहले खुद से पूछना होगा कि यह जरूरी है या नहीं। जांच बिना किसी को गिरफ्तार किए भी आगे बढ़ सकती है। सबूत इकट्ठा करने की प्रक्रिया के दौरान, पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी की जरूरत पर विचार करना चाहिए। यह एक सुरक्षा उपाय है, क्योंकि किसी भी हाल में आरोपी को गिरफ्तार करने की शक्ति पुलिस के पास बाद में भी उपलब्ध रहती है।
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