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Supreme Court: 'सरेंडर करो या गुण-दोष पर फैसला होगा'; सोनम रघुवंशी को अदालत से दो विकल्प; मामले में आगे क्या?

Wed, 22 Jul 2026 07:44 AM IST
ज्योति भास्कर एजेंसी / अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
एजेंसी / अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 22 Jul 2026 07:44 AM IST
सार

Supreme Court: मध्य प्रदेश के राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट ने दो विकल्प दिए हैं। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा, सरेंडर करो या गुण-दोष पर फैसला करेंगे। पति की हत्या के आरोप का सामना कर रही सोनम रघुवंशी के इस बहुचर्चित मामले में आगे क्या होगा? जानिए इस खबर में...

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Supreme Court Sonam Raghuvanshi Case Surrender or order on merits what next in Raja Murder in Meghalaya issue
सोनम रघुवंशी के आचरण पर 'सुप्रीम' सवाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मेघालय में हनीमून के दौरान पति की हत्या की आरोपी सोनम रघुवंशी के आचरण पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़े सवाल उठाए हैं। शीर्ष अदालत ने सोनम रघुवंशी को कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण कर मुकदमे का सामना करने का सुझाव दिया। मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली सोनम को जून, 2025 में अपने व्यवसायी पति राजा रघुवंशी की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। यह जोड़ा पिछले साल 23 मई को मेघालय के सोहरा इलाके में छुट्टियों के दौरान लापता हो गया था। इसके बाद 2 जून, 2025 को राजा का शव एक गहरी खाई में मिला।

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मामले की जांच कर रही पुलिस का आरोप है कि सोनम ने किराये के हत्यारों के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची थी। मेघालय की ट्रायल अदालत ने 27 अप्रैल, 2026 सोनम को जमानत दी थी और 29 जून, 2026 को मेघालय हाईकोर्ट ने जमानत रद्द करने की राज्य पुलिस की याचिका खारिज कर दी थी। मेघालय सरकार ने जमानत के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
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मेघालय सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सोनम की ओर से पेश वकील से कहा, आपकी मुवक्किल अपने आचरण को कैसे स्पष्ट करेंगी? पुलिस का कहना है कि वह मृतक के साथ उस स्थान पर गई थीं। घटना वहीं हुई जहां उन पर हमला किया गया और उनकी मृत्यु हो गई। उसके बाद आपने क्या किया? यही मुख्य मुद्दा है। दूसरी बात, गिरफ्तारी के आधार को लेकर, क्या आपने इसे सबसे शुरुआती बिंदु पर उठाया था?
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सुप्रीम कोर्ट ने जिरह के दौरान क्या कहा?

  • जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सोनम रघुवंशी से पूछा- पति पर हमले के बाद आपने क्या किया?
  • पीठ ने कहा- जमानत पर गुण-दोष के आधार पर आदेश देंगे या सोनम को आत्मसमर्पण का निर्देश देंगे।

सोनम के वकील को दो-टूक, सरेंडर करो या मुकदमे...
शीर्ष अदालत ने साफ किया कि वह या तो गुण-दोष के आधार पर विचार कर आदेश पारित करेगी या सोनम को आत्मसमर्पण कर मुकदमे का सामना करने का निर्देश देगी। पीठ ने सोनम के वकील से कहा, हम यह बात आपके सामने इसलिए रख रहे हैं ताकि आपको अचानक कोई हैरानी न हो और साथ ही आप हमारी सोच भी समझ सकें। आप अपने मुवक्किल से निर्देश लेकर अदालत के सामने वापस आएं।


गलत धारा लिखी होने के कारण सोनम को मिली थी जमानत
हाईकोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत इस आधार पर बरकरार रखी थी कि पुलिस गिरफ्तारी के उचित लिखित आधार देने में विफल रही। गिरफ्तारी मेमो में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) (हत्या की सजा) के बजाय गलती से धारा 403 दर्ज हो गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने न्यायिक दिमाग का इस्तेमाल न करना करार दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि यह केवल एक क्लर्क के टाइपिंग की गलती थी और हत्या के इतने गंभीर मामले में केवल इस आधार पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

अभी अभियोजन के आरोपों की विस्तृत जांच नहीं
मंगलवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि वह इस स्तर पर अभियोजन पक्ष के आरोपों की विस्तृत जांच का इच्छुक नहीं है। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी। दूसरी ओर, सोनम के वकील ने तर्क दिया कि इस मामले को मीडिया ने तूल दिया है और इसमें केवल परिस्थितिजन्य सबूत ही हैं।

जमानत पर रोक से इन्कार कर चुका है सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 3 जुलाई को हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया था। 9 जुलाई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस सवाल को बड़ी पीठ को भेजने का संकेद दिया था कि क्या महज टाइपिंग की गलती के कारण किसी गिरफ्तारी को अवैध ठहराया जा सकता है और आरोपी को जमानत दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया था कि वह इस बात की बारीकी से जांच करेगा कि क्या अरेस्ट मेमो में टाइपिंग की गलती के आधार पर सोनम को जमानत देना हाईकोर्ट के लिए सही था।


सरकार की तरफ से मेहता ने कोर्ट के सामने क्या कहा?
राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया, शादी के तुरंत बाद यह जोड़ा हनीमून के लिए मेघालय गया था। आरोपी महिला पति को पहाड़ियों में एक सुनसान जगह पर ले गई। सोनम के प्रेमी की ओर से किराए पर लिए गए तीन लोग भी उनके पीछे पहुंचे। वहां पति की हत्या कर दी गई और उसके बाद शव को खाई में फेंक दिया गया। मौत खाई में फेंकने से नहीं, बल्कि पहले ही हत्या कर देने से हुई थी। आरोपी महिला मौके से भाग गई और बाद में गाजीपुर में अपने प्रेमी के कहने पर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सोनम अपनी गिरफ्तारी के कारणों से पूरी तरह वाकिफ थी।

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