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SC: अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, एनसीपी नेता की हत्या के मामले में सजा और दोषसिद्धि पर लगी रोक

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Nitin Gautam Updated Thu, 23 Apr 2026 01:36 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए अमित जोगी की सजा और दोषसिद्धी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई को नोटिस जारी किया है। 

supreme court stays conviction life term of Amit Jogi in NCP leader murder case
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को बड़ी राहत देते हुए उनकी सजा पर रोक लगा दी। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अमित जोगी को एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की 2003 में हुई हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। 
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अमित जोगी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश 
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की पीठ ने अमित जोगी की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अमित जोगी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें बरी करने वाले ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए दोषी करार दिया गया था और आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की आगे की सुनवाई पूरी होने तक अमित जोगी की सजा पर रोक रहेगी। 
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यह मामला 4 जून 2003 को रायपुर में हुए एनसीपी नेता और कारोबारी राम अवतार जग्गी की हत्या से जुड़ा है। उस समय छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी मुख्यमंत्री थे। राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसे एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताया गया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने फैसले में अमित जोगी को आपराधिक साजिश और हत्या का दोषी ठहराया था। इससे पहले 2007 में ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया था, जबकि 28 अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

हाईकोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा
हाईकोर्ट ने सीबीआई और पीड़ित परिवार की अपीलों पर सुनवाई करते हुए कहा था कि सह-आरोपियों के खिलाफ मौजूद सबूतों को अमित जोगी के मामले में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस मामले की जांच 2004 में सरकार बदलने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी। गौरतलब है कि नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की देरी को माफ करते हुए हाईकोर्ट को मामले की दोबारा सुनवाई करने का निर्देश दिया था। अब इस मामले में आगे की सुनवाई जारी रहेगी।

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