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Supreme Court: असम में विदेशी घोषित दो महिलाओं के निर्वासन पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, केंद्र से मांगा जवाब

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवीन पारमुवाल Updated Fri, 05 Jun 2026 01:46 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने असम की दो महिलाओं, सालेहा खातून और सरभानु बेगम के निर्वासन पर रोक लगा दी है। फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित किए जाने के बाद दोनों डिटेंशन सेंटर में बंद हैं।

supreme court stays deportation of two assam women saleha khatun sarbhanu begum declared foreigners
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार

Supreme Court: असम में विदेशी घोषित की गईं दो महिलाओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश दिया है। अदालत ने सालेहा खातून और सरभानु बेगम के निर्वासन पर फिलहाल रोक लगा दी है। ये दोनों महिलाएं मार्च 2026 से गोलपाड़ा डिटेंशन सेंटर में बंद हैं। फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने इन्हें विदेशी नागरिक घोषित किया था, जिसके बाद इनके निर्वासन की तैयारी थी। इस मामले में अब केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी किया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक इनके खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी।


सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी मोहना ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने सालेहा खातून और सरभानु बेगम के साथ कुल चार महिलाओं की याचिकाओं पर संज्ञान लिया है। इन सभी महिलाओं को फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित कर दिया था। अब उच्चतम न्यायालय ने इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार से उनका पक्ष मांगा है।
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केंद्र सरकार को जारी हुआ नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस संवेदनशील मुद्दे पर जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से दी गई दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने केंद्र को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
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यह भी पढ़ें: Supreme Court: 'अदालत मामलों के निपटारे की समय सीमा तय नहीं करेगी'; याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 जुलाई की तारीख तय की है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि सालेहा खातून और सरभानु बेगम अभी हिरासत में रहती हैं, तो भी उन्हें अगली सुनवाई की तारीख तक उनके मूल देश वापस नहीं भेजा जाएगा। 

क्या है मामला?
यह पूरा मामला असम के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें इन महिलाओं को भारतीय नागरिक न मानकर विदेशी घोषित किया गया था। डिटेंशन सेंटर में लंबे समय से बंद इन महिलाओं ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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