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SIR: 'एसआईआर कराना चुनाव आयोग का अधिकार', मतदाता सूची पुनरीक्षण की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 27 May 2026 11:11 AM IST
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सार

एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अहम फैसला सुनाते हुए एसआईआर को सही ठहराया और कहा कि यह चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है और मुक्त और निष्पक्ष चुनाव के लिए ये जरूरी है। याचिकाओं में चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर करने की शक्ति को चुनौती दी गई थी। आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला....

Supreme court to deliver verdict on pleas challenging SIR of electoral rolls updates
सुप्रीम कोर्ट का एसआईआर को लेकर अहम फैसला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि एसआईआर कराना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि मुक्त और निष्पक्ष चुनाव के लिए एसआईआर जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस साल की शुरुआत में 29 जनवरी को लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था और बुधवार को अपना फैसला सुनाया। 





एसआईआर पर सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने क्या कहा?
  • पीठ ने अपने फैसले में कहा कि मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण कराना चुनाव आयोग का अधिकार है। एसआईआर प्रक्रिया सांविधानिक है। पीठ ने कहा, चुनाव आयोग ने शक्तियों का दुरुपयोग नहीं किया और न ही एसआईआर के दौरान नियमों के खिलाफ जाकर मतदाताओं के नाम काटे गए।
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  • मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस  जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 , प्रतिनिधि कानून, 1950 के तहत एसआईआर कराने की शक्ति दी गई है। पीठ ने अपने फैसले में कहा कि ये नहीं कहा जा सकता कि चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया के जरिए अपनी वैधानिक शक्तियों के परे जाकर काम किया है। 
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  • कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की उस दलील को भी खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया कि एसआईआर लाल बाबू हुसैन मामले में दिए गए फैसले का उल्लंघन करती है। 
  • अदालत ने फैसले में कहा कि चुनाव आयोग के पास शक्ति है कि वे मतदाता सूची के उद्देश्य के लिए नागरिकता की भी जांच कर सकता है। हालांकि चुनाव आयोग ये तय नहीं कर सकता कि कौन भारतीय नागरिक है या नहीं, लेकिन मतदाता सूची के संबंध में नागरिकता संबंधी सवालों की जांच करना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में है। अदालत ने कहा प्रतिनिधि कानून की धारा 16 के तहत चुनाव आयोग के पास इसका वैधानिक अधिकार है।
  • अदालत ने ये भी साफ किया कि अगर आयोग को लगता है कि कोई व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल होने की वैधानिक शर्तें पूरी नहीं करता है तो आयोग उस व्यक्ति को सक्षम प्राधिकारी के पास भेज सकता है। मतदाता सूची से कोई भी नाम हटाना सक्षम प्राधिकारी द्वारा किए गए फैसले पर निर्भर होगा। 


चुनाव आयोग मानता है एसआईआर को जरूरी
एसआईआर के खिलाफ अधिकांश याचिकाएं पिछले साल जून में दाखिल की गई थीं, जब चुनाव आयोग ने बिहार में एसआईआर अभियान शुरू करने का फैसला लिया था। इसके बाद यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ा दी गई। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाए रखने तथा फर्जी या अयोग्य मतदाताओं को हटाने के लिए यह अभियान जरूरी है।

याचिका में उठाए गए थे ये सवाल
याचिकाओं में चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे एसआईआर अभियान की वैधता पर सवाल उठाए गए थे। एसआईआर के खिलाफ याचिकाएं दायर करने वालों में लोकतांत्रिक सुधार संघ, योगेंद्र यादव, महुआ मोइत्रा, मनोज झा, केसी वेणुगोपाल, सुप्रिया सुले आदि बड़े नाम शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और उससे जुड़े नियमों के तहत चुनाव आयोग को मिले अधिकारों के तहत नहीं आती है। विवाद का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की वह शर्त है, जिसके तहत जिन मतदाताओं का नाम 2002 या कुछ राज्यों में 2003 की मतदाता सूची में नहीं था, उन्हें ऐसे व्यक्ति से पारिवारिक संबंध साबित करना होगा, जिसका नाम उन सूचियों में दर्ज था।

गरीब और प्रवासियों के मताधिकार पर खतरे का था दावा
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि यह शर्त गरीब, प्रवासी और हाशिए पर रहने वाले लोगों को मतदान अधिकार से वंचित कर सकती है, क्योंकि उनके पास पुराने रिकॉर्ड से जुड़ा दस्तावेजी प्रमाण मिलना मुश्किल है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रभावित मतदाताओं को राहत देने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अंतरिम निर्देश भी जारी किए थे। शुरुआत में चुनाव आयोग ने सत्यापन के लिए 11 दस्तावेज तय किए थे, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को भी एसआईआर प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया था। 
 
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