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Supreme Court Updates: मणिपुर हिंसा से CBSE के त्रि-भाषा फॉर्मूले के खिलाफ, अदालत में इन मुद्दों पर आज सुनवाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 27 May 2026 12:05 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित याचिकाओं को अपने पास स्थानांतरित करे।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष केंद्र सरकार की स्थानांतरण याचिका का जिक्र करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि संशोधित कानून को चुनौती देने वाली याचिकाएं कई उच्च न्यायालयों में लंबित हैं, जिससे परस्पर विरोधी फैसलों की संभावना बढ़ जाती है।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा, "हमने ट्रांसजेंडर संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को इस अदालत में स्थानांतरित करने के लिए याचिका दायर की हैं। क्या स्थानांतरण याचिका शुक्रवार को सूचीबद्ध की जा सकती है? अगर नोटिस भी जारी होता है, तो हम उच्च न्यायालयों से प्रतीक्षा करने के लिए कह सकते हैं।"
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अनुरोध के जवाब में, सीजेआई ने टिप्पणी की कि उच्च न्यायालयों की भिन्न राय कभी-कभी फायदेमंद हो सकती है।सीजेआई ने साथ ही यह भी कहा कि शीर्ष अदालत मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने के अनुरोध पर विचार करेगी। इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित कानून को चुनौती देने वाली एक याचिका पर नोटिस जारी किया था। मामले को सीजेआई द्वारा गठित की जाने वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष रखने का निर्देश दिया था।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष केंद्र सरकार की स्थानांतरण याचिका का जिक्र करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि संशोधित कानून को चुनौती देने वाली याचिकाएं कई उच्च न्यायालयों में लंबित हैं, जिससे परस्पर विरोधी फैसलों की संभावना बढ़ जाती है।
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सॉलिसिटर जनरल ने कहा, "हमने ट्रांसजेंडर संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को इस अदालत में स्थानांतरित करने के लिए याचिका दायर की हैं। क्या स्थानांतरण याचिका शुक्रवार को सूचीबद्ध की जा सकती है? अगर नोटिस भी जारी होता है, तो हम उच्च न्यायालयों से प्रतीक्षा करने के लिए कह सकते हैं।"
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अनुरोध के जवाब में, सीजेआई ने टिप्पणी की कि उच्च न्यायालयों की भिन्न राय कभी-कभी फायदेमंद हो सकती है।सीजेआई ने साथ ही यह भी कहा कि शीर्ष अदालत मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने के अनुरोध पर विचार करेगी। इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित कानून को चुनौती देने वाली एक याचिका पर नोटिस जारी किया था। मामले को सीजेआई द्वारा गठित की जाने वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष रखने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को कई बड़े मामलों पर सुनवाई होनी है। इनमें सीबीएससी की ओर से तीसरी भाषा को अनिवार्य बनाए जाने को चुनौती दिए जाने पर सुनवाई होगी। वहीं, इस मामले की आज होने वाली सुनवाई से पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। वहीं, दूसरे वकील ने आज ही मामले की सुनवाई करने का अनुरोध किया।
इसके इतर ट्रांसजेंडर संरक्षण अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं और केंद्र सरकार द्वारा उच्च न्यायालय से इन याचिकाओं को स्थानांतरित करने की याचिका भी आज पेश की गई है। वहीं, अदालत में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट जाली दस्तावेजों से संबंधित डिजिटल गिरफ्तारी के पीड़ितों के मामले की स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई करेगा। इसी के साथ 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।
इसके इतर ट्रांसजेंडर संरक्षण अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं और केंद्र सरकार द्वारा उच्च न्यायालय से इन याचिकाओं को स्थानांतरित करने की याचिका भी आज पेश की गई है। वहीं, अदालत में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट जाली दस्तावेजों से संबंधित डिजिटल गिरफ्तारी के पीड़ितों के मामले की स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई करेगा। इसी के साथ 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।