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सुप्रिया सुले ने FCRA विधेयक का किया विरोध: बोलीं- हर विदेशी फंडिंग पर शक नहीं कर सकते; सरकार से की क्या मांग?
Sat, 08 Aug 2026 06:21 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 08 Aug 2026 06:21 PM IST
सार
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) नेता सुप्रिया सुले ने प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन को लेकर केंद्र सरकार से व्यापक चर्चा की मांग की है। उनका कहना है कि विदेश से आने वाली हर आर्थिक सहायता को संदेहास्पद मानना उचित नहीं है और वैध क्षेत्रों में काम करने वाले संगठनों को भी इससे जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने विधेयक को वापस लेने या जेपीसी के पास भेजने की बात कही।
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एफसीआरए विधेयक पर सुप्रिया सुले ने उठाए सवाल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने शनिवार को विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध किया। उन्होंने कहा कि हर विदेशी फंडिंग को संदेह की नजर से नहीं देखा जा सकता। सुले ने केंद्र सरकार से विधेयक वापस लेने या इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने की मांग की।
बारामती से लोकसभा सांसद सुले ने मुंबई में मीडिया से बातचीत में कहा कि सभी राजनीतिक दलों को विवादित विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा का मौका मिलना चाहिए। ऐसी खबरें हैं कि अगले सप्ताह संसद में विधेयक पर चर्चा और इसे पारित कराने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
एफसीआरए बिल पर क्या बोलीं सुप्रिया सुले?
सुप्रिया सुले ने विदेश में रहने वाले भारतीयों की ओर से भारत में अपने परिवारों को भेजे जाने वाले पैसे से विदेशी फंडिंग की तुलना भी की। सुले ने सरकार को विधेयक को संसद से जल्दबाजी में पारित कराने के खिलाफ आगाह किया।
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उन्होंने कहा, "हम एफसीआरए विधेयक के मौजूदा स्वरूप को खारिज करते हैं और इससे असहमत हैं। अगर सरकार विधेयक वापस लेने के लिए तैयार नहीं है तो इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजना चाहिए। मजबूत लोकतंत्र में केवल किसी चीज का विरोध करना पर्याप्त नहीं है। हमें साथ बैठकर उस पर चर्चा भी करनी चाहिए।"
सुप्रिया सुले ने की क्या मांग?
सुले ने कहा कि हर विदेशी फंडिंग पर संदेह नहीं किया जा सकता और इसे अपने आप संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी फंड का संबंध मादक पदार्थों की तस्करी या आतंकवाद जैसी अवैध गतिविधियों से है तो कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विदेशी फंड का इस्तेमाल भारत में वैध चिकित्सा और शिक्षा संबंधी कार्यों के लिए भी हो सकता है। उन्होंने विदेश में रहने वाले भारतीयों की ओर से भारत भेजे जाने वाले पैसे का उदाहरण भी दिया। सुले ने कहा, "गेट्स फाउंडेशन और यूएसएआईडी जैसे संगठन हैं, जो कई वर्षों से अच्छा काम कर रहे हैं। हमें हर विदेशी फंड से जुड़े संगठन को बुरी नजर से क्यों देखना चाहिए?"
एफसीआरए बिल में क्या है प्रावधान?
एफसीआरए विधेयक में विदेशी अंशदान और उससे जुड़ी संपत्तियों को एक 'निर्दिष्ट प्राधिकरण' के अधीन रखने, उनकी निगरानी, प्रबंधन और निपटान के लिए व्यापक व्यवस्था का प्रावधान है। इसमें अस्थायी और स्थायी रूप से अधिकार में लेने की व्यवस्था भी शामिल है। विधेयक के आलोचकों का कहना है कि इससे कानून का उद्देश्य विदेशी धन को नियंत्रित करने से आगे बढ़कर स्वतंत्र संगठनों को नियंत्रित करने की दिशा में जा सकता है।
परिसीमन विधेयक पर बोलीं- अभी टिप्पणी जल्दबाजी होगी
प्रस्तावित परिसीमन कानून के बारे में सुले ने कहा कि विधेयक अभी पेश नहीं हुआ है, इसलिए इस पर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा, "जब यह आएगा, तब हम अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ हर विधेयक पर चर्चा करेंगे।"
मोहन भागवत की टिप्पणी का किया स्वागत
सुले ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को युवा पीढ़ी की बात सुननी चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को धन्यवाद देती हूं कि उन्होंने इस नई पीढ़ी की ईमानदारी को पहचाना। मैं उनके बयान का स्वागत करती हूं। अगर भाजपा भी उनकी कही बातों को सुने तो मुझे खुशी होगी।"
युवाओं के प्रदर्शनों को लेकर सुले ने दावा किया कि नई पीढ़ी सरकार पर नौकरियों, ठेकों या दूसरे लाभों के लिए निर्भर नहीं है, इसलिए वह खुलकर अपनी बात रख सकती है। उन्होंने कहा, "ये युवा शिक्षित हैं। उन्हें आईएएस, आयकर विभाग, सीबीआई या ईडी से कोई समस्या नहीं है। उन्हें ठेके नहीं चाहिए। चूंकि उनके ऐसे कोई हित नहीं हैं, इसलिए वे खुलकर उस बात के बारे में बोल सकते हैं, जिसे वे सच मानते हैं।"
महाराष्ट्र सरकार पर चुनाव केंद्रित रवैये का आरोप
सुले ने महाराष्ट्र सरकार पर चुनाव केंद्रित रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने किसानों को दी जाने वाली सहायता से जुड़ी "शर्तों" का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "जब चुनाव आते हैं तो दोनों हाथ खोलकर फैसले लिए जाते हैं। चुनाव खत्म होने और सत्ता में आने के बाद हाथ कसकर बंद कर लिए जाते हैं।"
विपक्ष की आलोचना के बीच महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने पिछले महीने अपनी नई कृषि ऋण माफी योजना में महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी थी। इसमें पात्रता की प्रमुख शर्तें हटाई गईं, जिनमें 2019 की ऋण माफी के लाभार्थियों के लिए लागू 50,000 रुपये की पिछली अधिकतम सीमा भी शामिल थी।
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बारामती से लोकसभा सांसद सुले ने मुंबई में मीडिया से बातचीत में कहा कि सभी राजनीतिक दलों को विवादित विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा का मौका मिलना चाहिए। ऐसी खबरें हैं कि अगले सप्ताह संसद में विधेयक पर चर्चा और इसे पारित कराने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
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एफसीआरए बिल पर क्या बोलीं सुप्रिया सुले?
सुप्रिया सुले ने विदेश में रहने वाले भारतीयों की ओर से भारत में अपने परिवारों को भेजे जाने वाले पैसे से विदेशी फंडिंग की तुलना भी की। सुले ने सरकार को विधेयक को संसद से जल्दबाजी में पारित कराने के खिलाफ आगाह किया।
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VIDEO | NCP (SP) opposes the FCRA Bill in its current form; party leader Supriya Sule says the bill must be discussed and referred to a Joint Parliamentary Committee. pic.twitter.com/uaKOqUg7r3
— Press Trust of India (@PTI_News) August 8, 2026
उन्होंने कहा, "हम एफसीआरए विधेयक के मौजूदा स्वरूप को खारिज करते हैं और इससे असहमत हैं। अगर सरकार विधेयक वापस लेने के लिए तैयार नहीं है तो इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजना चाहिए। मजबूत लोकतंत्र में केवल किसी चीज का विरोध करना पर्याप्त नहीं है। हमें साथ बैठकर उस पर चर्चा भी करनी चाहिए।"
सुप्रिया सुले ने की क्या मांग?
सुले ने कहा कि हर विदेशी फंडिंग पर संदेह नहीं किया जा सकता और इसे अपने आप संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी फंड का संबंध मादक पदार्थों की तस्करी या आतंकवाद जैसी अवैध गतिविधियों से है तो कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विदेशी फंड का इस्तेमाल भारत में वैध चिकित्सा और शिक्षा संबंधी कार्यों के लिए भी हो सकता है। उन्होंने विदेश में रहने वाले भारतीयों की ओर से भारत भेजे जाने वाले पैसे का उदाहरण भी दिया। सुले ने कहा, "गेट्स फाउंडेशन और यूएसएआईडी जैसे संगठन हैं, जो कई वर्षों से अच्छा काम कर रहे हैं। हमें हर विदेशी फंड से जुड़े संगठन को बुरी नजर से क्यों देखना चाहिए?"
एफसीआरए बिल में क्या है प्रावधान?
एफसीआरए विधेयक में विदेशी अंशदान और उससे जुड़ी संपत्तियों को एक 'निर्दिष्ट प्राधिकरण' के अधीन रखने, उनकी निगरानी, प्रबंधन और निपटान के लिए व्यापक व्यवस्था का प्रावधान है। इसमें अस्थायी और स्थायी रूप से अधिकार में लेने की व्यवस्था भी शामिल है। विधेयक के आलोचकों का कहना है कि इससे कानून का उद्देश्य विदेशी धन को नियंत्रित करने से आगे बढ़कर स्वतंत्र संगठनों को नियंत्रित करने की दिशा में जा सकता है।
परिसीमन विधेयक पर बोलीं- अभी टिप्पणी जल्दबाजी होगी
प्रस्तावित परिसीमन कानून के बारे में सुले ने कहा कि विधेयक अभी पेश नहीं हुआ है, इसलिए इस पर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा, "जब यह आएगा, तब हम अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ हर विधेयक पर चर्चा करेंगे।"
मोहन भागवत की टिप्पणी का किया स्वागत
सुले ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को युवा पीढ़ी की बात सुननी चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को धन्यवाद देती हूं कि उन्होंने इस नई पीढ़ी की ईमानदारी को पहचाना। मैं उनके बयान का स्वागत करती हूं। अगर भाजपा भी उनकी कही बातों को सुने तो मुझे खुशी होगी।"
Mumbai, Maharashtra: On RSS Chief Mohan Bhagwat's statement regarding Gen Z, NCP (SP) MP Supriya Sule says, "I welcome it wholeheartedly. That’s exactly what I said, that I wholeheartedly welcome whatever they have said..." pic.twitter.com/tfhxx9RFZq
— IANS (@ians_india) August 8, 2026
युवाओं के प्रदर्शनों को लेकर सुले ने दावा किया कि नई पीढ़ी सरकार पर नौकरियों, ठेकों या दूसरे लाभों के लिए निर्भर नहीं है, इसलिए वह खुलकर अपनी बात रख सकती है। उन्होंने कहा, "ये युवा शिक्षित हैं। उन्हें आईएएस, आयकर विभाग, सीबीआई या ईडी से कोई समस्या नहीं है। उन्हें ठेके नहीं चाहिए। चूंकि उनके ऐसे कोई हित नहीं हैं, इसलिए वे खुलकर उस बात के बारे में बोल सकते हैं, जिसे वे सच मानते हैं।"
महाराष्ट्र सरकार पर चुनाव केंद्रित रवैये का आरोप
सुले ने महाराष्ट्र सरकार पर चुनाव केंद्रित रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने किसानों को दी जाने वाली सहायता से जुड़ी "शर्तों" का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "जब चुनाव आते हैं तो दोनों हाथ खोलकर फैसले लिए जाते हैं। चुनाव खत्म होने और सत्ता में आने के बाद हाथ कसकर बंद कर लिए जाते हैं।"
विपक्ष की आलोचना के बीच महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने पिछले महीने अपनी नई कृषि ऋण माफी योजना में महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी थी। इसमें पात्रता की प्रमुख शर्तें हटाई गईं, जिनमें 2019 की ऋण माफी के लाभार्थियों के लिए लागू 50,000 रुपये की पिछली अधिकतम सीमा भी शामिल थी।