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असम: गौहाटी हाईकोर्ट ने कहा- तलाक-ए-हसन वैध, उच्च न्यायालय ने नए कानून के तहत पंजीकरण कराने का दिया निर्देश

Fri, 11 Sep 2026 03:35 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: अमन तिवारी Updated Fri, 11 Sep 2026 03:35 PM IST
सार

गौहाटी हाईकोर्ट ने कहा है कि तलाक-ए-हसन भारत में फिलहाल वैध तलाक का तरीका है और इस पर प्रतिबंध नहीं है। कोर्ट ने असम के एक व्यक्ति को 2024 के कानून के तहत संबंधित मैरिज एंड डिवोर्स रजिस्ट्रार के पास तलाक पंजीकरण कराने को कहा। 

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Talaq-E-Hassan valid form of divorce, to be registered under new Act: Gauhati high court
गौहाटी हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

गौहाटी हाईकोर्ट ने ‘तलाक-ए-हसन’ को तलाक का वैध तरीका माना है। कोर्ट ने कहा कि देश में तलाक-ए-हसन पर रोक नहीं है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपने तलाक के रजिस्ट्रेशन के लिए असम अनिवार्य मुस्लिम विवाह एवं तलाक रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 2024 के तहत संबंधित मैरिज एंड डिवोर्स रजिस्ट्रार के पास जाने का निर्देश दिया।
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तीन अलग-अलग तारीखों पर दिया तलाक
जस्टिस अरुण देव चौधरी ने मंगलवार को एक याचिका पर यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता के मुताबिक, उसकी शादी 2016 में हुई थी। दोनों के बीच मतभेद के बाद उसकी पत्नी 2018 में कथित तौर पर घर छोड़कर चली गई। दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिश भी सफल नहीं हुई। इसके बाद याचिकाकर्ता ने 22 मार्च, 26 अप्रैल और 27 मई 2026 को तीन अलग-अलग तारीखों पर तलाक-ए-हसन के तहत तलाक दिया। इसके बाद उसने संबंधित अधिकारी के पास तलाक के रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया।
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कोर्ट ने क्या कहा?
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि तलाक-ए-हसन प्रतिबंधित नहीं है और उसने इसके सभी जरूरी नियमों का पालन करते हुए तलाक दिया है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि 1935 का पुराना कानून अब खत्म हो चुका है और उस कानून के तहत नियुक्त अधिकारी अब तलाक का रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से दिया गया तलाक-ए-हसन तलाक का वैध तरीका है और वर्तमान में देश में इस पर रोक नहीं है।
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पुराने अधिकारी से रजिस्ट्रेशन का आदेश नहीं दिया
हालांकि, कोर्ट ने पुराने बारपेटा प्राधिकरण को तलाक-ए-हसन का रजिस्ट्रेशन करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि 1935 का कानून रद्द हो चुका है और उसके तहत बनाया गया पद भी समाप्त कर दिया गया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 2024 के नए कानून के तहत संबंधित मैरिज एंड डिवोर्स रजिस्ट्रार के पास जाने को कहा।


रजिस्ट्रार को पहचान और तलाक की जांच करनी होगी
कोर्ट ने कहा कि रजिस्ट्रार को यह जांचना होगा कि तलाक वास्तव में याचिकाकर्ता ने ही दिया है या नहीं। इसके साथ ही उसकी पहचान भी सत्यापित करनी होगी। इसके बाद रजिस्ट्रार यह तय करेगा कि 2024 के कानून की धारा 12 के तहत तलाक का रजिस्ट्रेशन किया जाना है या नहीं। अगर रजिस्ट्रार रजिस्ट्रेशन से इनकार करता है तो याचिकाकर्ता 2024 के कानून की धारा 17 के तहत अपील कर सकता है।

पत्नी को चुनौती देने की आजादी
कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता की पत्नी को नोटिस दिए जाने के बावजूद वह अदालत में मौजूद नहीं थीं। ऐसे में उन्हें उचित मंच के सामने तलाक-ए-हसन को चुनौती देने की स्वतंत्रता रहेगी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
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