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Tamil Nadu: तमिलनाडु सरकार की कुर्सी सचिवालय में, लेकिन जमीन कोलाथुर में होगी तय

उपमिता वाजपेयी, अमर उजाला Published by: Nitin Gautam Updated Sat, 11 Apr 2026 05:35 AM IST
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सार

लोग कहते हैं स्टालिन साहब कोलाथुर की गली-गली पहचानते हैं। चुनाव से पहले मेन रोड से निकल भर जाएंगे, तब भी जीतेंगे। गणित भले गलियों की समझ का हो, लेकिन बाढ़ और बोरियत (एंटी इंकंबैंसी) दो ऐसी चीजें हैं, जो स्टालिन के लिए आजमाइश साबित हो सकते हैं।

tamil nadu assembly election ground report how kolathur is key of power in state
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार करते सीएम स्टालिन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कोलाथुर तमिलनाडु के चुनावी रण का सबसे अहम मैदान है। इसलिए नहीं, क्योंकि यहां कड़ा मुकाबला है। बल्कि इसलिए क्योंकि यह मौजूदा सीएम एम. स्टालिन की सीट है। सरकार की कुर्सी भले सचिवालय में धरी हो, लेकिन जमीन कोलाथुर से तैयार होती है। पिछले चार चुनावों से तमिलनाडु की राजनीति के धुरंधर बनकर बैठे स्टालिन कोलाथुर से चुनाव लड़ रहे हैं। पहली बार 2011 में चुनाव लड़े तो सिर्फ 2,500 वोट से जीते, 2016 में अंतर 36 हजार पहुंच गया और 2021 में 76 हजार। कोलाथुर सीट पर उनका चुनावी बंदोबस्त संभालने वाले डीएम के सेक्रेटरी पीटीसी रवि का दावा है, इस बार जीत का अंतर एक लाख पार जाएगा।
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कोलाथुर की गली-गली से वाकिफ हैं सीएम स्टालिन
छोटी गलियों, स्लम, सोसायटी और बड़े मोहल्लों से मिलकर बनी कोलाथुर विधानसभा में दो लाख सात हजार वोटर्स हैं। सबसे ज्यादा वोटर लगभग 45 प्रतिशत ओबीसी हैं। जबकि 6 प्रतिशत ईसाई और 11 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं। डीएमके नेता मुरलीधरन कहते हैं, सीएम जब कोलाथुर आते हैं तो मंदिर-मस्जिद-चर्च तीनों जगह जाते हैं। रमजान, पोंगल और क्रिसमस तीनों त्योहारों का हिस्सा बनते हैं। पिछले पांच साल में 87 बार अपने इलाके में आए हैं। इसके अलावा 300 से ज्यादा घरों तक शादी-ब्याह या फिर दुख-सुख में उन्होंने अपने दफ्तर से चिट्ठियां भेजी हैं।
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कोलाथुर में विकास हुआ, लेकिन पानी की निकासी अभी भी समस्या
अपोलो जैसे अस्पतालों को टक्कर देता 1069 बेड का सरकारी अस्पताल एक साल पहले ही बनकर तैयार हुआ है। चुनाव के तीन महीने पहले आर्ट एंड साइंस कॉलेज की बिल्डिंग भी बन चुकी है। सरकार ने 6,000 बच्चों को यूपीएससी से लेकर टेलरिंग तक की कोचिंग-ट्रेनिंग दिलाई है। मुफ्त लैपटॉप और सिलाई मशीन बांटी हैं। लेकिन, 40 साल से बाढ़ ऐसा संकट है जिसका डर पीढ़ियों में बह रहा है। एमटी राव कोलाथुर में अपने पुश्तैनी घर में रहने वाली चौथी पीढ़ी के सदस्य हैं। कहते हैं, बारिश आने से पहले हम इलाके वाले बस यही सवाल सोचते और पूछते हैं-इस बार बारिश का पानी घरों में घुसेगा या नहीं। उन्हें आज भी वह दिन याद है, जब हफ्तेभर उनके घरों में बिजली नहीं थी। यहां तक की एमएलए ऑफिस वाली सड़क पर भी नावें चलीं थीं। वह भी तब, जब डीएमके बारिश के पानी से निपटने के लिए 450 किमी की ड्रेनेज लाइन डलवाने का दावा करता है।

हर गली में डीएमके का बूथ कार्यालय बना है। बाकी पार्टियों के इक्का-दुक्का पंडाल हैं। डीएमके कार्यकर्ता डोर-टू-डोर प्रचार कर रहे हैं। उनकी शिफ्ट भी तय है-सुबह 7:30 से 9:30 और शाम 4:30 से 7:30 तक। 14 डिवीजन में इलाके को बांटा है और ये 100 कार्यकर्ताओं के हवाले है। यह तब, जब उनके नेताओं की समझ में ये चुनाव आसान है। डीएमके को लगता है चुनाव आसान है। भाजपा-अन्नाद्रमुक और विजय की पार्टी टीवीके भले जीतने के लिए नहीं, लेकिन जीत को छोटा बनाने के लिए मेहनत कर रही है।

डीएमके का गढ़ है कोलाथुर सीट
टीवीके से वीएस बाबू स्टालिन से मुकाबला कर रहे हैं। वह कांग्रेस, डीएमके और अन्नाद्रमुक तीनों पार्टी में रह चुके हैं। 70 प्रतिशत तक पढ़े-लिखे लोगों वाली विधानसभा में ग्रेजुएट स्टालिन के सामने आठवीं पास बाबू चुनावी परीक्षा देंगे। यहां तीन प्रतिशत फर्स्ट टाइम वोटर्स हैं। पुरुषों के मुकाबले 6,000 महिला वोटर ज्यादा हैं। वरिष्ठ पत्रकार टी रामकृष्णन कहते हैं, चुनाव के ठीक पहले चर्चा थी कि स्टालिन अपने पिता करुणानिधि की सीट तिरुवरुर से चुनाव लड़ सकते हैं। करुणानिधि ने 91 साल की उम्र में 2016 में यहीं से चुनाव लड़ा और जीता था। इस बार स्टालिन ने प्रचार की शुरुआत यहीं से की थी। वरना 30 मार्च को अपना पर्चा भरने के बाद से तो वो इलाके की तरफ मुंह करके भी नहीं सोए हैं। हालांकि उनके इलेक्शन शेड्यूल की मानें, तो वह प्रचार खत्म होने से पहले 21 तारीख को कोलाथुर आ सकते हैं।

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