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दो दशक बाद कोलकाता आगमन: 'जिंदगी वापस मिल गई'; निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन पुराने दिनों पर और क्या बोलीं?
Tue, 04 Aug 2026 09:15 AM IST
ज्योति भास्कर
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 04 Aug 2026 09:15 AM IST
सार
दो दशक बाद कोलकाता आगमन के अवसर पर लेखिका तसलीमा नसरीन ने 'जिंदगी वापस मिल गई' जैसे उद्गार व्यक्त किए। निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन ने कोलकाता में कॉलेज स्ट्रीट और कॉफी हाउस समेत कई अन्य पुरानी यादों को ताजा कर और भी बातें कहीं।
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कोलकाता में तस्लीमा नसरीन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स-पीटीआई
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विस्तार
निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने सोमवार को कॉलेज स्ट्रीट और कॉफी हाउस का दौरा किया। इसे कोलकाता की सांस्कृतिक विरासत का केंद्र माना जाता है। करीब दो दशक बाद शहर में वापसी को उन्होंने 'मेरी जिंदगी वापस मिल गई' जैसा एहसास बताया। 19 साल के अंतराल के बाद शहर के दौरे पर आईं नसरीन ने अगले साल कोलकाता बुक फेयर के लिए लौटने की उम्मीद भी जताई।
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'19 साल बाद एक अड्डा', आगे की योजना क्या?
उन्होंने कॉलेज स्ट्रीट स्थित कॉफी हाउस में समय बिताया। यह शहर के सबसे प्रसिद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक स्थलों में से एक है। बाद में उन्होंने इस दौरे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित लेखकों, कलाकारों और फिल्म निर्माताओं ने कॉफी हाउस का दौरा किया है। उन्होंने यहां कॉफी का आनंद लिया और पटकथाओं, कहानियों तथा संघर्षों पर चर्चा की है। नसरीन ने अपनी पोस्ट में लिखा, "19 साल बाद एक अड्डा, और भी बहुत कुछ आएगा।"
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शहर से इतना गहरा जुड़ाव क्यों?
पत्रकारों से बात करते हुए नसरीन ने कहा कि वह शहर और इसकी साहित्यिक संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई महसूस करती हैं। उन्होंने कहा, "मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैं पहले कॉलेज स्ट्रीट आती थी। मैं यहां बहुत बार आई हूं।" कॉलेज स्ट्रीट को 'बोई पारा' या किताबों का केंद्र भी कहा जाता है। यह बौद्धिक गतिविधियों, किताबों की दुकानों और स्थापत्य चमत्कारों का संगम है। नसरीन ने इस दौरे को एक भावनात्मक घर वापसी बताया। उन्होंने कहा, "यह मेरी जिंदगी वापस मिलने जैसा है। मैं बंगाली भाषा और साहित्य के बीच रहना चाहती हूं। यहां आकर ऐसा लगता है जैसे मैं अपने ही देश में हूं।" उन्होंने कहा कि अपनी मातृभाषा में किताबें प्रकाशित करना उनके लिए बहुत मायने रखता है।
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क्या है नई किताबों की योजना?
लेखिका ने आने वाले महीनों में कई नई बंगाली किताबें प्रकाशित करने की योजना की भी घोषणा की। उन्होंने बताया, "मेरी आत्मकथा, 'आत्मजीवनी समग्र' खंड 1 प्रकाशित हो रही है। संभवतः इसका दूसरा भाग बाद में प्रकाशित होगा। कविताओं की एक किताब और संभवतः एक कहानी संग्रह भी पाइपलाइन में है। एक आ रही है और दूसरी उसके बाद आएगी।" नसरीन ने अगले कोलकाता बुक फेयर में भाग लेने की इच्छा भी व्यक्त की। उन्होंने कहा, "मैं निश्चित रूप से अगले कोलकाता बुक फेयर में आऊंगी।"
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कोलकाता से निष्कासन कब और क्यों?
लेखिका कई वर्षों तक कोलकाता में रहीं। उनकी किताब 'द्विखंडितो' (स्प्लिट: ए लाइफ) के प्रकाशन को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन लेफ्ट फ्रंट सरकार ने उन्हें 2007 में शहर से बाहर जाने के लिए मजबूर कर दिया था। इससे पहले 1994 में, वह अपनी लेखनी और धर्म पर अपने विचारों को लेकर कट्टरपंथी समूहों से मिली मौत की धमकियों के कारण बांग्लादेश छोड़ चुकी थीं।