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Temple Politics: 'सोमनाथ से सबसे अधिक नफरत पंडित नेहरू को थी'; इतिहास के दस्तावेज साझा कर भाजपा ने किया दावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 07 Jan 2026 02:19 PM IST
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सार
भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का विरोध करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि नेहरू ने पाकिस्तान को खुश करने के लिए मंदिर के इतिहास को नकारा और तत्कालीन राष्ट्रपति को भी उद्घाटन समारोह में जाने से रोका था। यह बयान प्रधानमंत्री मोदी की आगामी सोमनाथ यात्रा से ठीक पहले आया है।
सुधांशु त्रिवेदी
- फोटो : एएनआई वीडियो ग्रैब
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विस्तार
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रुख की कड़ी आलोचना की है। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि महमूद गजनवी और अलाउद्दीन खिलजी जैसे ऐतिहासिक आक्रांताओं ने तो मंदिर को केवल भौतिक रूप से लूटा था, लेकिन नेहरू के मन में भगवान सोमनाथ के प्रति सबसे ज्यादा घृणा थी।
पाकिस्तानी पीएम को लिखे पत्र पर मचा बवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए त्रिवेदी ने नेहरू द्वारा कथित तौर पर पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को लिखे गए एक पत्र को साझा किया। त्रिवेदी ने दावा किया कि, इस पत्र में नेहरू ने खान को 'प्रिय नवाबजादा' कहकर संबोधित किया और सोमनाथ के दरवाजों की कथा को पूरी तरह झूठा बताया।
ये भी पढ़ें: Somnath Temple: कब और किसने बनवाया था सोमनाथ मंदिर? जिसे महमूद गजनवी ने एक दो नहीं, बल्कि 17 बार लूटा
हिंदू ऐतिहासिक प्रतीकों को कम आंका: भाजपा
भाजपा नेता का तर्क है कि यह पत्र एक प्रकार का आत्मसमर्पण था, जिससे यह संकेत मिलता है कि नेहरू ने भारत की सभ्यतागत विरासत की रक्षा करने के बजाय मंदिर के पुनर्निर्माण को कम महत्व देने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के दुष्प्रचार का सामना करने के स्थान पर नेहरू ने पड़ोसी देश को खुश करने के लिए हिंदू ऐतिहासिक प्रतीकों को कम आंका।
त्रिवेदी ने दावा किया कि नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का पूर्णतः विरोध किया था। उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और मंत्रिमंडल के सहयोगियों को पत्र लिखकर मंदिर के पुनर्निर्माण की आवश्यकता पर प्रश्न उठाए थे और उन्हें उद्घाटन समारोह में शामिल न होने की सलाह दी थी।
दो बार पत्र लिखकर शिकायत की, भाजपा ने बताया
भाजपा नेता ने कहा कि नेहरू ने कथित तौर पर सभी मुख्यमंत्रियों को दो बार पत्र लिखकर शिकायत की थी कि मंदिर निर्माण से विदेशों में भारत की छवि धूमिल हुई है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री आर.आर. दिवाकर को पत्र लिखकर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के प्रचार-प्रसार को कम करने का आग्रह किया था और इसे आडंबरपूर्ण बताया था।
ये भी पढ़ें: Supreme Court: 'भगवान को भी नहीं छोड़ा', सबरीमाला सोना चोरी मामले में कोर्ट की सख्त टिप्पणी; ये याचिका खारिज
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' समारोह में भाग लेने के लिए सोमनाथ मंदिर जाने वाले हैं। यह पर्व 8 जनवरी से 11 जनवरी तक मनाया जाएगा। इस दौरान भारत की आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक गौरव को प्रदर्शित करने वाले कई कार्यक्रम आयोजित होंगे।
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हिंदू ऐतिहासिक प्रतीकों को कम आंका: भाजपा
भाजपा नेता का तर्क है कि यह पत्र एक प्रकार का आत्मसमर्पण था, जिससे यह संकेत मिलता है कि नेहरू ने भारत की सभ्यतागत विरासत की रक्षा करने के बजाय मंदिर के पुनर्निर्माण को कम महत्व देने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के दुष्प्रचार का सामना करने के स्थान पर नेहरू ने पड़ोसी देश को खुश करने के लिए हिंदू ऐतिहासिक प्रतीकों को कम आंका।
त्रिवेदी ने दावा किया कि नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का पूर्णतः विरोध किया था। उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और मंत्रिमंडल के सहयोगियों को पत्र लिखकर मंदिर के पुनर्निर्माण की आवश्यकता पर प्रश्न उठाए थे और उन्हें उद्घाटन समारोह में शामिल न होने की सलाह दी थी।
दो बार पत्र लिखकर शिकायत की, भाजपा ने बताया
भाजपा नेता ने कहा कि नेहरू ने कथित तौर पर सभी मुख्यमंत्रियों को दो बार पत्र लिखकर शिकायत की थी कि मंदिर निर्माण से विदेशों में भारत की छवि धूमिल हुई है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री आर.आर. दिवाकर को पत्र लिखकर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के प्रचार-प्रसार को कम करने का आग्रह किया था और इसे आडंबरपूर्ण बताया था।
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यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' समारोह में भाग लेने के लिए सोमनाथ मंदिर जाने वाले हैं। यह पर्व 8 जनवरी से 11 जनवरी तक मनाया जाएगा। इस दौरान भारत की आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक गौरव को प्रदर्शित करने वाले कई कार्यक्रम आयोजित होंगे।
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