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कौन हैं प्रतीक जैन: जिन्हें बचाने के लिए ईडी से भिड़ गईं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, क्या हैं उन पर आरोप?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 08 Jan 2026 04:53 PM IST
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सार
Who is Pratik Jain: ईडी ने कोयला चोरी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक के कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस छापेमारी के कारण एक नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं, वह है टीएमसी के आईटी सेल के प्रमुख प्रतीक जैन का। जानें उनके बार में, क्यों उन पर ईडी ने कार्रवाई...
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कोलकाता में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक के सह संस्थापक और निदेशक प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी की है। ईडी के अधिकारियों ने प्रतीक जैन के ऑफिस के साथ-साथ कोलकाता स्थित उनके आवास पर भी छापेमारी की है। बता दें कि यह फर्म ममता की पार्टी के टीएमसी के लिए काम कर रही है। बता दें यह वही आई-पैक है, जिससे जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर भी जुड़े थे।
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गुरुवार सुबह ईडी की टीमों ने आई-पैक से जुड़े दो ठिकानों पर छापा मारा। करीब 11:30 बजे के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ आ गया, जब कोलकाता पुलिस कमिश्नर प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचे और कुछ समय बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित प्रतीक जैन के घर पहुंच गईं। ममता बनर्जी वहां कुछ देर रुकीं और जब वो बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी। आई-पैक वह संस्था है, जो आगामी विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ईडी ने उपर सबूत साथ ले जाने का आरोप लगाया है।
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कौन हैं प्रतीक जैन?
प्रतीक जैन पेशे से इंजीनियर थे, बाद में वह राजनीतिक सलाहकार बन गए। प्रतीक ने विनेश चंदेल और ऋषि राज सिंह के साथ मिलकर दस साल पहले 2015 में आई-पैक की स्थापना की थी। जैन ने आईआईटी बॉम्बे से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग और मटीरियल साइंस में इंजीनियरिंग की। इस दौरान उन्होंने एक्सिस म्यूचुअल फंड में इंटर्नशिप की। इंजीनियरिंग के बाद 2012 में जैन ने डेलॉइट में एक एनालिस्ट के तौर पर काम किया, जिसके बाद वह 'सिटिजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस' के फाउंडिंग मेंबर बने।
उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, यह एक नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन है, जिसका विजन भारत में जवाबदेह गवर्नेंस को और मजबूत करना है, जो बाद में आई-पैक में बदल गया। जैन पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के आईटी सेल के हेड भी हैं। जिसकी पुष्टि खुद ममता बनर्जी ने की है। आई-पैक खुद को छात्रों और युवा प्रोफेशनल्स के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म बताता है, जहां वे किसी पॉलिटिकल पार्टी का हिस्सा बने बिना देश के राजनीतिक मामलों और गवर्नेंस में हिस्सा ले सकते हैं और महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
ईडी ने क्यों की यह कार्रवाई
ईडी के मुताबिक, इस मामले के तार कोयला चोरी से जुड़े हैं। जांच में सामने आया है कि हवाला ऑपरेटरों की मदद से कोयला चोरी का पैसा, आई-पैक में लगा है। हालांकि ईडी की कार्रवाई के दौरान सीएम ममता बनर्जी ने छापे वाली जगह पर पहुंचकर इलेक्ट्रॉनिक सबूत अपने कब्जे में ले लिए हैं। ईडी का कहना है कि यह तलाशी अभियान साक्ष्य आधारित है। इसका मकसद किसी भी राजनीतिक प्रतिष्ठान को टारगेट नहीं करना है। पार्टी कार्यालय की तलाशी नहीं ली गई है और न ही यह रेड किसी भी चुनाव से संबंधित है।
जांच के दौरान यह पता चला है कि अनूप मजी के नेतृत्व वाला कोयला तस्करी गिरोह पश्चिम बंगाल के ईसीएल लीजहोल्ड क्षेत्रों से कोयला चुराकर अवैध रूप से उसका खनन करता था। इसके बाद, इस कोयले को बांकुरा, बर्धमान, पुरुलिया और पश्चिम बंगाल के अन्य जिलों में स्थित विभिन्न कारखानों/संयंत्रों में बेचा जाता था। जांच में सामने आया है कि इस कोयले का एक बड़ा हिस्सा शाकंभरी ग्रुप ऑफ कंपनीज को बेचा गया था। जांच में पता चला कि कोयला तस्करी से प्राप्त धन को छिपाने में शामिल एक हवाला ऑपरेटर ने इंडियन पैसिफिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड को करोड़ों रुपये के लेनदेन में मदद की थी।
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ममता के ईडी पर गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बृहस्पतिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के बीच आई-पैक प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं और आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक दस्तावेजों, हार्ड डिस्क और उसकी चुनाव रणनीति से जुड़े संवेदनशील डाटा को जब्त करने का प्रयास कर रही थी। बनर्जी ने कहा कि मेरे आईटी प्रकोष्ठ के प्रभारी जैन के आवास और कार्यालयों पर छापेमारी राजनीतिक रूप से प्रेरित और असंवैधानिक है। ईडी ने मेरे आईटी सेल (प्रकोष्ठ) के आवास और कार्यालयों पर छापा मारा और मेरे आईटी सेल (प्रकोष्ठ) के प्रभारी के आवास की तलाशी ली। वे मेरी पार्टी के दस्तावेज और हार्ड डिस्क जब्त कर रहे थे, जिनमें विधानसभा चुनाव के लिए हमारी पार्टी के उम्मीदवारों का विवरण था। मैंने इन्हें वापस ले लिया है। उन्होंने ईडी अधिकारियों पर सत्तारूढ़ पार्टी की हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन, लैपटॉप, उम्मीदवारों की सूची और आंतरिक रणनीति संबंधी दस्तावेजों को जब्त करने का आरोप लगाया।