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Maharashtra: पॉक्सो के आरोपी को ठाणे की अदालत से मिली राहत, कहा- मामले में पर्याप्त सबूत नहीं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Wed, 07 Jan 2026 12:22 PM IST
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सार

अदालत के फैसले में जोर दिया गया कि यौन इरादे का निर्धारण करना और न करना एक तथ्यात्मक प्रश्न है। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोपित अपराधों के कानूनी तत्वों को स्थापित करने में विफल रहा। अदालत ने यह स्वीकार करते हुए कि पीड़िता उस समय नाबालिग थी, यह माना कि दोष सिद्ध करने के लिए सबूत अपर्याप्त थे।

Thane court acquits man of stalking harassing minor girl finds no physical intent maharashtra
ठाणे की अदालत ने पॉक्सो के आरोपी को किया बरी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ठाणे की एक अदालत ने एक नाबालिग लड़की का पीछा करने और यौन उत्पीड़न करने के आरोपी व्यक्ति को बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि उसके कृत्यों में यौन इरादा नजर नहीं आया, जो यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत आवश्यक एक प्रमुख तत्व है।
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मजदूरी का काम करने वाले मयूरेश कैलाश शेल्के (25) आरोप है कि उसने 2019 में महाराष्ट्र के ठाणे शहर में 15 वर्षीय पीड़िता के घर में प्रवेश किया और उससे अपने प्यार का इजहार किया।
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'पीड़िता के साथ नहीं हुआ शारीरिक संपर्क', कोर्ट की टिप्पणी
न्यायाधीश रूबी यू मालवणकर ने टिप्पणी की कि पीड़िता के साथ कोई शारीरिक संपर्क नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि आरोपी की ओर से इस्तेमाल किए गए शब्द इस मामले के तथ्यों के हिसाब से किसी प्रकार के 'यौन इरादे' को प्रदर्शित करने वाले 'इरादे' के बराबर नहीं होंगे। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, 'यौन इरादे में क्या शामिल है और क्या नहीं, यह एक तथ्यात्मक प्रश्न है। इस मामले में आरोपी की ओर से प्रयुक्त शब्दों से ऐसा कोई यौन इरादा प्रतीत नहीं होता है।'

ये भी पढ़ें: Kerala High Court: कांग्रेस नेता ममकुटाथिल की फिलहाल गिरफ्तारी नहीं, पार्टी से निष्कासित MLA को अदालत से राहत

22 दिसंबर, 2025 को पारित हुए आदेश की प्रति मंगलवार को सामने आने के बाद ये जानकारी मिली। पीड़िता की ओर से इस मामले को लेकर 2019 में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराई गई थी। इसमें पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसका पड़ोसी शेल्के 1 नवंबर, 2019 को डोम्बिवली के म्हात्रे नगर स्थित एक चॉल में उसके घर में घुस गया, जब वह अकेले पढ़ाई कर रही थी।

मामले में आरोपी के खिलाफ सबूत अपर्याप्त थे
अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी ने पीड़िता से कहा, 'मुझे दादा कहकर मत पुकारो, मैं तुमसे प्यार करता हूं। आरोप लगाया गया कि वह उसका पीछा कर रहा था और बार-बार फोन कर रहा था। अभियोजन पक्ष ने शेल्के पर भारतीय दंड संहिता की धारा 354डी (पीछा करना) और 441 (आपराधिक अतिक्रमण) के साथ पॉक्सो अधिनियम की धारा 7 (यौन उत्पीड़न) और 11 (यौन शोषण) के तहत आरोप लगाए।

हालांकि, बचाव पक्ष के वकील अमरीश एस जाधव ने अभियोजन पक्ष के मामले को चुनौती दी। अदालत ने बताया कि यह घटना कथित तौर पर घनी आबादी वाली चॉल में हुई थी, फिर भी किसी और स्वतंत्र गवाह का कोई अन्य सबूत पेश नहीं किया गया जो इस तरह के कृत्य को देखने के बारे में गवाही दे सकता था।

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