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Maharashtra Hindi Row: राज्य के स्कूलों में हिंदी भाषा पर नया नियम फिलहाल लागू नहीं होगा, CM फडणवीस का एलान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: पवन पांडेय Updated Sun, 29 Jun 2025 07:33 PM IST
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सार

Maharashtra Hindi Row: अब महाराष्ट्र में स्कूलों में हिंदी या किसी तीसरी भाषा को लेकर कोई नया नियम लागू नहीं होगा। राज्य सरकार ने विवाद को गंभीरता से लेते हुए एक विशेषज्ञ समिति बनाने का फैसला किया है। जब तक समिति की रिपोर्ट नहीं आती, तब तक पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी।

The new rule on Hindi language will not be implemented in the state schools for now, CM Fadnavis announced
महाराष्ट्र के सीएम और दोनों डिप्टी सीएम - फोटो : ANI
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विस्तार

महाराष्ट्र में स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने पर चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा एलान किया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इस विषय पर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है और दोनों पुराने सरकारी आदेश (जीआर) रद्द कर दिए गए हैं।
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कैबिनेट बैठक के बाद कहा, 'आज तीन-भाषा नीति पर मंत्रिमंडल में चर्चा हुई। हमने तय किया है कि डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी, जो यह तय करेगी कि किस कक्षा से कौन-सी भाषा लागू की जाए, कैसे की जाए और छात्रों को क्या विकल्प दिए जाएं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक यह समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपती, तब तक 16 अप्रैल 2025 और 17 जून 2025 को जारी दोनों सरकारी आदेश रद्द माने जाएंगे।
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क्या है त्रिभाषा नीति विवाद?
हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने आदेश जारी कर कहा था कि पहली से पांचवीं तक मराठी और अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। इस पर कई शिक्षाविदों, मराठी भाषा प्रेमियों और भाषा सलाहकार समिति ने आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि प्राथमिक कक्षाओं में मातृभाषा पर ही ध्यान होना चाहिए, अन्यथा बच्चों की भाषा सीखने की क्षमता कमजोर होगी।

नई समिति क्या करेगी काम?
  • यह तय करना कि तीसरी भाषा कौन-सी कक्षा से शुरू हो,
  • भाषा लागू करने का तरीका क्या हो,
  • और छात्रों को कितने और कौन से विकल्प दिए जाएं।

सलाहकार समिति ने सरकार से की थी मांग
इससे पहले राज्य सरकार की तरफ से नियुक्त भाषा सलाहकार समिति ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अपील की है कि इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाए। पुणे में आयोजित एक बैठक में समिति के 27 में से 20 सदस्य उपस्थित थे। इस बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि कक्षा 5 से पहले किसी भी तीसरी भाषा — चाहे वह हिंदी ही क्यों न हो — को पढ़ाना उचित नहीं है। इस बैठक में मराठी भाषा विभाग के सचिव किरण कुलकर्णी भी मौजूद थे।

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तीन-भाषा नीति पर क्या बोले एकनाथ शिंदे
वहीं इस पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, 'महाराष्ट्र सरकार ने तीन-भाषा नीति के कार्यान्वयन से संबंधित दो सरकारी संकल्प वापस ले लिए हैं और डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता वाली एक नई समिति इसका अध्ययन करेगी और अपनी रिपोर्ट पेश करेगी... जो लोग हमारे खिलाफ आरोप लगा रहे हैं, जब वे सत्ता में थे, तो उन्होंने तीन भाषाओं - मराठी, अंग्रेजी और हिंदी की शिक्षा को अनिवार्य कर दिया था, जिसकी सिफारिश रघुनाथ माशेलकर समिति ने की थी... जब वे सत्ता में थे, तो उनकी राय अलग थी और अब जब वे सत्ता में नहीं हैं, तो वे अलग तरह से प्रतिक्रिया दे रहे हैं... जनता जानती है कि मराठी भाषी लोगों के मुंबई छोड़ने के लिए कौन जिम्मेदार है और हमारी सरकार उन्हें वापस मुंबई ला रही है'।
 

क्या था राज्य सरकार का आदेश?
महाराष्ट्र सरकार ने एक संशोधित आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया कि मराठी और अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पहली से पांचवीं तक हिंदी को आम तौर पर तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया कि अगर किसी स्कूल में हर कक्षा में कम से कम 20 छात्र किसी अन्य भारतीय भाषा को पढ़ना चाहें, तो वे हिंदी से छूट पा सकते हैं। इसके लिए या तो नया शिक्षक नियुक्त किया जाएगा या ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था की जाएगी।
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