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महिला आरक्षण बिल: चुनाव के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने पर जयराम रमेश बोले- ये आचार संहिता का उल्लंघन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 12 Apr 2026 02:36 PM IST
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सार
कांग्रेस ने विशेष सत्र के दौरान परिसीमन संबंधी विधेयक पेश किए जाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने पहले परिसीमन के संबंध में सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। पार्टी ने मांग की है कि यह सब 29 अप्रैल के बाद किया जाए, जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए सक्रिय प्रचार समाप्त हो जाएगा।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाया जाना आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है।
जयराम रमेश ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पत्र को शेयर किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर संसद के विशेष सत्र पर अपनी बात रखी है। यह सत्र अगले हफ्ते, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनावी अभियान के बीच बुलाया जा रहा है, जो कि आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने (खरगे ने) विपक्ष के इस अनुरोध को दोहराया है कि सर्वदलीय बैठक 29 अप्रैल के बाद ही किसी भी समय बुलाई जाए।"
पीएम मोदी ने लिखा सभी पार्टियों के सदन के नेताओं को पत्र
दरअसल, महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक पर विचार-विमर्श करने और उसे पारित करने के लिए अगले सप्ताह एक विशेष सत्र बुलाया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में सभी पार्टियों के सदन के नेताओं को पत्र लिखकर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को सर्वसम्मति से पारित कराने के लिए समर्थन मांगा, ताकि 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण का कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने की आलोचना
प्रधानमंत्री के पत्र के जवाब में, मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह महिला सशक्तिकरण के बजाय राजनीतिक लाभ उठाने के लिए महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक के कार्यान्वयन में जल्दबाजी कर रही है। अपने जवाब में खरगे ने लिखा, "विशेष सत्र विपक्ष को विश्वास में लिए बिना बुलाया गया है और सरकार परिसीमन के संबंध में कोई भी विवरण साझा किए बिना ही एक बार फिर विपक्ष से सहयोग की अपेक्षा कर रही है।"
कांग्रेस अध्यक्ष ने मांग की कि अगर इस विशेष सत्र का उद्देश्य हमारे लोकतंत्र को मजबूत करना और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है, तो सरकार को सुझाव है कि 29 अप्रैल के बाद किसी भी समय एक 'सर्वदलीय बैठक' बुलाए, ताकि परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा की जा सके, जिस मुद्दे को 'नारी शक्ति वंदन' अधिनियम में किए जा रहे संशोधन से जोड़ा जा रहा है।
(इनपुट आईएएनएस से)
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जयराम रमेश ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पत्र को शेयर किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर संसद के विशेष सत्र पर अपनी बात रखी है। यह सत्र अगले हफ्ते, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनावी अभियान के बीच बुलाया जा रहा है, जो कि आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने (खरगे ने) विपक्ष के इस अनुरोध को दोहराया है कि सर्वदलीय बैठक 29 अप्रैल के बाद ही किसी भी समय बुलाई जाए।"
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पीएम मोदी ने लिखा सभी पार्टियों के सदन के नेताओं को पत्र
दरअसल, महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक पर विचार-विमर्श करने और उसे पारित करने के लिए अगले सप्ताह एक विशेष सत्र बुलाया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में सभी पार्टियों के सदन के नेताओं को पत्र लिखकर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को सर्वसम्मति से पारित कराने के लिए समर्थन मांगा, ताकि 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण का कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने की आलोचना
प्रधानमंत्री के पत्र के जवाब में, मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह महिला सशक्तिकरण के बजाय राजनीतिक लाभ उठाने के लिए महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक के कार्यान्वयन में जल्दबाजी कर रही है। अपने जवाब में खरगे ने लिखा, "विशेष सत्र विपक्ष को विश्वास में लिए बिना बुलाया गया है और सरकार परिसीमन के संबंध में कोई भी विवरण साझा किए बिना ही एक बार फिर विपक्ष से सहयोग की अपेक्षा कर रही है।"
कांग्रेस अध्यक्ष ने मांग की कि अगर इस विशेष सत्र का उद्देश्य हमारे लोकतंत्र को मजबूत करना और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है, तो सरकार को सुझाव है कि 29 अप्रैल के बाद किसी भी समय एक 'सर्वदलीय बैठक' बुलाए, ताकि परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा की जा सके, जिस मुद्दे को 'नारी शक्ति वंदन' अधिनियम में किए जा रहे संशोधन से जोड़ा जा रहा है।
(इनपुट आईएएनएस से)
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