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CAPF: केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में नहीं घटेंगे ‘आईपीएस’ के पद, पीएमओ की सलाह के बाद होगा 'नियमों में बदलाव'
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सार
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) में 'आईपीएस' अफसरों की प्रतिनियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार, वैधानिक संशोधन की तैयारी में है। अब यह मामला, गृह मंत्रालय से 'पीएमओ' में जा चुका है। पीएमओ की सलाह के बाद ही आईपीएस प्रतिनियुक्ति के 'नियमों में बदलाव' होगा।
केंद्रीय बल
- फोटो : फोटो - फ्रीपिक
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विस्तार
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) में 'आईपीएस' अफसरों की प्रतिनियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार, वैधानिक संशोधन की तैयारी में है। अब यह मामला, गृह मंत्रालय से 'पीएमओ' में जा चुका है। पीएमओ की सलाह के बाद ही आईपीएस प्रतिनियुक्ति के 'नियमों में बदलाव' होगा। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि फिलहाल पीएमओ, किसी भी तरह से केंद्रीय बलों में आईपीएस की प्रतिनियुक्ति का कोटा घटाने के मूड में नहीं है। इसके पक्ष में सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया है। साथ ही अर्धसैनिक बलों के कैडर अफसर, जो पदोन्नति के मोर्चे पर पिछड़ रहे हैं, उन्हें भी कुछ राहत दी जा सकती है। सीएपीएफ अफसरों के कैडर रिव्यू में विभिन्न रैंकों के लिए तय अपग्रेडेशन के प्रतिशत में बढ़ोतरी किए जाने की उम्मीद है।
क्यों पड़ रही वैधानिक संशोधन की जरुरत ...
पिछले साल 23 मई को सीएपीएफ कैडर अफसरों के करियर प्रोग्रेशन के संबंधित एक केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सीएपीएफ में 'एसएजी' (वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड) स्तर तक के पदों पर आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को सरकार, अगले दो साल में धीरे-धीरे कम करे। इन बलों में आईपीएस के चलते सीएपीएफ के कैडर अधिकारी, पदोन्नति में पिछड़ जाते हैं। उन्हें नेतृत्व का अवसर नहीं मिल पाता। इन बलों में केवल एनएफएफयू (नॉन फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन) के लिए नहीं, बल्कि सभी कार्यों के लिए 'संगठित समूह ए सेवा' (ओजीएएस) पैटर्न' लागू हो। छह महीने में 'कैडर रिव्यू' हो। सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 'पुनर्विचार याचिका' दायर की, मगर वह भी खारिज हो गई। अवमानना केस में सरकार को नोटिस जारी हो गया। अब सरकार के पास, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए वैधानिक संशोधन के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
सभी रैंकों में आईपीएस प्रतिनियुक्ति का कोटा बना रहेगा ...
फिलहाल केंद्रीय बलों में आईपीएस प्रतिनियुक्ति का कोटा डीआईजी स्तर पर 20-25 प्रतिशत, आईजी स्तर पर 50 प्रतिशत और एडीजी स्तर पर 75 प्रतिशत तय है। अब इन पदों में कटौती नहीं होगी। गत वर्ष सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरित केंद्र में आईपीएस प्रतिनियुक्ति की संख्या बढ़ा दी गई। गत जून माह के दौरान केंद्र में 678 आईपीएस थे, दिसंबर में यह संख्या 700 के पार चली गई। आईपीएस की संख्या कम होने की जगह बढ़ गई। पीएमओ में कई प्रपोजल पर विचार के बाद यह निर्णय लिया गया है कि आईपीएस के पदों में कटौती न की जाए। यानी मौजूदा कोटा बना रहेगा। अब यह देखने वाली बात है कि सरकार किस तरह से नियमों में बदलाव करती है।
सुप्रीम कोर्ट में दिया था ये शपथ पत्र ...
सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल शपथ पत्र में कहा गया है कि वह इस विषय पर 'वैधानिक हस्तक्षेप' पर विचार कर रही है। केंद्रीय बलों में आईपीएस प्रतिनियुक्ति को लेकर 'कानून' बनाया जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुरुप सीएपीएफ के संगठनात्मक ढांचे की व्यापक समीक्षा की जा रही है। सीएपीएफ के कैडर अफसरों को 'ओजीएएस' का दर्जा मिले, इस पर विचार हो रहा है। प्रस्तावित वैधानिक हस्तक्षेप का मकसद, ओजीएएस में स्पष्टता लाना है। इसे केवल पदोन्नति तक सीमित न रख कर, दूसरे मामलों में भी लागू किया जाए। लंबे समय से पदोन्नति में पिछड़े कई रैंकों का स्थायी समाधान क्या हो, इस पर काम हो रहा है। सही मायने में ओजीएएस के लागू होने से सीएपीएफ की सेवा शर्तें, पदोन्नति और वरिष्ठता से जुड़े मामलों में स्थायित्व आ सकता है।
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क्यों पड़ रही वैधानिक संशोधन की जरुरत ...
पिछले साल 23 मई को सीएपीएफ कैडर अफसरों के करियर प्रोग्रेशन के संबंधित एक केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सीएपीएफ में 'एसएजी' (वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड) स्तर तक के पदों पर आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को सरकार, अगले दो साल में धीरे-धीरे कम करे। इन बलों में आईपीएस के चलते सीएपीएफ के कैडर अधिकारी, पदोन्नति में पिछड़ जाते हैं। उन्हें नेतृत्व का अवसर नहीं मिल पाता। इन बलों में केवल एनएफएफयू (नॉन फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन) के लिए नहीं, बल्कि सभी कार्यों के लिए 'संगठित समूह ए सेवा' (ओजीएएस) पैटर्न' लागू हो। छह महीने में 'कैडर रिव्यू' हो। सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 'पुनर्विचार याचिका' दायर की, मगर वह भी खारिज हो गई। अवमानना केस में सरकार को नोटिस जारी हो गया। अब सरकार के पास, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए वैधानिक संशोधन के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
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सभी रैंकों में आईपीएस प्रतिनियुक्ति का कोटा बना रहेगा ...
फिलहाल केंद्रीय बलों में आईपीएस प्रतिनियुक्ति का कोटा डीआईजी स्तर पर 20-25 प्रतिशत, आईजी स्तर पर 50 प्रतिशत और एडीजी स्तर पर 75 प्रतिशत तय है। अब इन पदों में कटौती नहीं होगी। गत वर्ष सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरित केंद्र में आईपीएस प्रतिनियुक्ति की संख्या बढ़ा दी गई। गत जून माह के दौरान केंद्र में 678 आईपीएस थे, दिसंबर में यह संख्या 700 के पार चली गई। आईपीएस की संख्या कम होने की जगह बढ़ गई। पीएमओ में कई प्रपोजल पर विचार के बाद यह निर्णय लिया गया है कि आईपीएस के पदों में कटौती न की जाए। यानी मौजूदा कोटा बना रहेगा। अब यह देखने वाली बात है कि सरकार किस तरह से नियमों में बदलाव करती है।
सुप्रीम कोर्ट में दिया था ये शपथ पत्र ...
सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल शपथ पत्र में कहा गया है कि वह इस विषय पर 'वैधानिक हस्तक्षेप' पर विचार कर रही है। केंद्रीय बलों में आईपीएस प्रतिनियुक्ति को लेकर 'कानून' बनाया जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुरुप सीएपीएफ के संगठनात्मक ढांचे की व्यापक समीक्षा की जा रही है। सीएपीएफ के कैडर अफसरों को 'ओजीएएस' का दर्जा मिले, इस पर विचार हो रहा है। प्रस्तावित वैधानिक हस्तक्षेप का मकसद, ओजीएएस में स्पष्टता लाना है। इसे केवल पदोन्नति तक सीमित न रख कर, दूसरे मामलों में भी लागू किया जाए। लंबे समय से पदोन्नति में पिछड़े कई रैंकों का स्थायी समाधान क्या हो, इस पर काम हो रहा है। सही मायने में ओजीएएस के लागू होने से सीएपीएफ की सेवा शर्तें, पदोन्नति और वरिष्ठता से जुड़े मामलों में स्थायित्व आ सकता है।
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