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टाइम कैप्सूल: धरती का अतीत अगली पीढ़ी के लिए सुरक्षित, अंटार्कटिका में संरक्षित की सदियों पुरानी बर्फ
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली/जिनेवा।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 19 Jan 2026 07:03 AM IST
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सार
तेजी से पिघलते ग्लेशियरों के बीच वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के जलवायु इतिहास को बचाने की एक अनोखी पहल की है। यूरोपीय आल्प्स की सदियों पुरानी बर्फ को अब अंटार्कटिका में सुरक्षित रखा गया है, ताकि यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित रहे। यह बर्फ क्या-क्या राज समेटे है और क्यों इसे बचाना जरूरी था, पढ़िए रिपोर्ट-
आर्कटिक महासागर
- फोटो : इंस्टाग्राम
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विस्तार
वैश्विक तापमान में लगातार वृद्धि और दुनिया भर के ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के बीच वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के अतीत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। यूरोपीय आल्प्स से निकाली गई सदियों-हजारों वर्ष पुरानी बर्फ को अब अंटार्कटिका में विशेष रूप से बनाए गए एक बर्फीले आश्रय में संरक्षित किया गया है। यह परियोजना न केवल जलवायु परिवर्तन के इतिहास को समझने का अवसर देगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए वैज्ञानिक धरोहर भी सहेज कर रखेगी।
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शोधकर्ताओं ने यूरोपीय आल्प्स के मॉन्ट ब्लांक और ग्रांद कॉम्बिन जैसे क्षेत्रों से प्राचीन आइस कोर निकालकर उन्हें अंटार्कटिका के कॉनकॉर्डिया स्टेशन में सुरक्षित रखा है। यह अभिलेखागार वास्तव में बर्फ में खोदी गई एक गुफा है, जो लगभग 35 मीटर लंबी और पांच मीटर ऊंची-चौड़ी है तथा सतह से लगभग 10 मीटर नीचे स्थित है। यहां तापमान स्थायी रूप से माइनस 52 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, जिससे बर्फ के नमूनों को सदियों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
मानवता के लिए साझा प्रयास
आइस मेमोरी फाउंडेशन के अध्यक्ष और स्विस जलवायु वैज्ञानिक थॉमस स्टॉकर के अनुसार जो कुछ हमेशा के लिए खो सकता था, उसे बचाना मानवता के लिए एक सामूहिक प्रयास है। उनका कहना है कि ये आइस कोर पृथ्वी के अतीत की ऐसी जानकारियां समेटे हुए हैं, जिन्हें दोबारा कभी प्राप्त नहीं किया जा सकता।
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आइस कोर क्या बताते हैं पृथ्वी के बारे में...ग्लेशियरों से निकाले गए आइस कोर पृथ्वी के जलवायु इतिहास के मौन साक्षी होते हैं। इनमें प्राचीन तापमान, मौसम के पैटर्न, वायुमंडलीय संरचना और यहां तक कि पुराने ज्वालामुखीय विस्फोटों के संकेत भी सुरक्षित रहते हैं। लेकिन वैश्विक तापन के कारण हजारों ग्लेशियर आने वाले दशकों में समाप्त हो सकते हैं, जिससे यह अमूल्य रिकॉर्ड हमेशा के लिए नष्ट होने का खतरा है।
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शोधकर्ताओं ने यूरोपीय आल्प्स के मॉन्ट ब्लांक और ग्रांद कॉम्बिन जैसे क्षेत्रों से प्राचीन आइस कोर निकालकर उन्हें अंटार्कटिका के कॉनकॉर्डिया स्टेशन में सुरक्षित रखा है। यह अभिलेखागार वास्तव में बर्फ में खोदी गई एक गुफा है, जो लगभग 35 मीटर लंबी और पांच मीटर ऊंची-चौड़ी है तथा सतह से लगभग 10 मीटर नीचे स्थित है। यहां तापमान स्थायी रूप से माइनस 52 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, जिससे बर्फ के नमूनों को सदियों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
मानवता के लिए साझा प्रयास
आइस मेमोरी फाउंडेशन के अध्यक्ष और स्विस जलवायु वैज्ञानिक थॉमस स्टॉकर के अनुसार जो कुछ हमेशा के लिए खो सकता था, उसे बचाना मानवता के लिए एक सामूहिक प्रयास है। उनका कहना है कि ये आइस कोर पृथ्वी के अतीत की ऐसी जानकारियां समेटे हुए हैं, जिन्हें दोबारा कभी प्राप्त नहीं किया जा सकता।
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आइस कोर क्या बताते हैं पृथ्वी के बारे में...ग्लेशियरों से निकाले गए आइस कोर पृथ्वी के जलवायु इतिहास के मौन साक्षी होते हैं। इनमें प्राचीन तापमान, मौसम के पैटर्न, वायुमंडलीय संरचना और यहां तक कि पुराने ज्वालामुखीय विस्फोटों के संकेत भी सुरक्षित रहते हैं। लेकिन वैश्विक तापन के कारण हजारों ग्लेशियर आने वाले दशकों में समाप्त हो सकते हैं, जिससे यह अमूल्य रिकॉर्ड हमेशा के लिए नष्ट होने का खतरा है।
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