TMC Rift: कहीं 20 बागी साथ जैसा दावा, कोई ममता के साथ खड़ा; सौगत रॉय से कीर्ति आजाद तक; किस नेता ने क्या कहा?
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पार्टी में बढ़ते आंतरिक मतभेद, इस्तीफे और बागी नेताओं के दावों ने अनिश्चितता बढ़ा दी है। बयानबाजी का सिलसिला जारी है। बागी धड़े के नेता का दावा है कि वे 15 जून यानी सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर उन्हें अलग गुट की तरह मान्यता देने की मांग करेंगे। इस उथल-पुथल के बीच किस नेता की वफादारी पूर्व सीएम ममता बनर्जी के साथ है? कौन से नेता किस गुट का समर्थन कर रहे हैं? बंगाल के इस अहम सियासी घटनाक्रम से जुड़े ऐसे तमाम अपडेट्स जानिए इस खबर में
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विस्तार
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे चार मई को आए थे। इस चुनाव के बाद सत्ता गंवा चुकी पार्टी- तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में आंतरिक कलह जारी है। नतीजों की घोषणा के बाद से ही तृणमूल नेताओं में असंतोष देखा जा रहा है। आलम ये है कि पार्टी अब दो फाड़ होने की कगार पर है। संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) को मिलाकर कभी 40 सांसदों के साथ विपक्ष में दमदार भूमिका निभाने वाली टीएमसी अब अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। पार्टी के नेता मुखर होकर ममता बनर्जी के खिलाफ बोल रहे हैं। कई सांसदों ने पूर्व मुख्यमंत्री के साथ खड़े रहने की बात भी कही है। कौन से तृणमूल नेता ने किस खेमे में हैं? ममता बनर्जी के पास कितने सांसदों का समर्थन बचा है? क्या पाला बदलने वाले सांसदों के कारण टीएमसी का हश्र भी शिवसेना जैसा होगा? ऐसे तमाम सवालों के जवाब इस खबर में जानिए
सौगत रॉय का रुख क्या?
वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने शुक्रवार को बागी नेताओं के दल बदलने और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने की प्रवृत्ति को अनैतिक बताया। उन्होंने 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली हार के बाद सदस्यों की बदलती निष्ठा पर चिंता जताई। रॉय ने पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती देने वाले सांसद कल्याण बनर्जी के बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अभिषेक को पार्टी की खराब स्थिति के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराने से इनकार किया। रॉय ने इसे "अवसरवादी" कदम बताया। उन्होंने कहा कि वह पार्टी की एकता बनाए रखने के लिए सदस्यों से बात कर रहे हैं।
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समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक बागी सांसदों के गुट में शामिल जगदीश बसुनिया ने कहा है कि वे सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करेंगे और उनके धड़े को 'असली टीएमसी' के रूप में मान्यता देने की अपील करेंगे।
क्या कटघरे में ममता और अभिषेक समेत TMC के बड़े नेता?
एक अन्य समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए बसुनिया ने टीएमसी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि अब इस पार्टी में 'बोलने या दूसरों की बात सुनने की प्रवृत्ति खत्म हो चुकी है। पार्टी में बढ़ते आंतरिक संकट के लिए पार्टी प्रतिनिधियों और जमीनी स्तर के नेताओं की बात न सुनने जैसे कारक जिम्मेदार हैं। असली समस्या टीएमसी के काम करने के तरीके में है। अभिषेक बनर्जी, ममता बनर्जी और अन्य पार्टी नेता या टीएमसी के दूसरे जन प्रतिनिधि किसी की नहीं सुनते।
पीएम मोदी और NDA के समर्थन का कारण क्या?
तृणमूल से बगावत के बाद राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन करने के फैसले को समझाते हुए, बसुनिया ने कहा, हमारी प्राथमिकता निर्वाचन क्षेत्रों का विकास है। उन्होंने कहा, 'हम विकास के लिए चुने गए थे। अगर हम स्थानीय आबादी की परवाह करते हैं, तो हमें विकास को गति देने वाली शक्तियों के साथ जुड़ना होगा। फिलहाल, हम टीएमसी के साथ नहीं हैं, न ही हम राज्य या केंद्र सरकार का हिस्सा हैं। हालांकि, विकास के लिए राज्य और केंद्र दोनों सरकारों का सहयोग आवश्यक है। इसलिए, अगर हम केंद्र सरकार के साथ जुड़ते हैं या उसका समर्थन करते हैं, तो हम इस क्षेत्र के विकास में कुछ हद तक मदद कर सकते हैं; इसीलिए हम एनडीए के साथ जुड़ेंगे।
बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा ने दोहराई प्रतिबद्धता, कहा- मेरी नेता सिर्फ ममता बनर्जी
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने पाला बदलने को लेकर चल रही अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि वह पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी किसी अन्य राजनीतिक दिशा में जाने या किसी अन्य गठबंधन से जुड़ने की कोई मंशा नहीं है। उन्होंने एक दिन पहले समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए भी अपने इसी रुख को स्पष्ट किया था।
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असंतुष्ट नेताओं पर व्यक्तिगत टिप्पणी करने से परहेजशत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, मैं लोगों के सुख-दुख का मजबूत समर्थक हूं और इस समय ममता जी के साथ हूं। मैं पहले भी उनके साथ था और आगे भी उनके साथ रहूंगा। फिलहाल मेरी किसी और दिशा में जाने या किसी अन्य गठबंधन का हिस्सा बनने की कोई मंशा नहीं है। अभिषेक बनर्जी पर लगाए जा रहे आरोपों के संबंध में सिन्हा ने पार्टी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि कुछ सहयोगी लालच, डर या एजेंसियों के दबाव के कारण पार्टी छोड़ रहे होंगे। हालांकि उन्होंने असंतुष्ट नेताओं पर व्यक्तिगत टिप्पणी करने से परहेज किया। सिन्हा ने कहा, "उनमें से कोई भी मेरा नेता नहीं है। मेरा केवल एक ही नेता है और वह ममता बनर्जी हैं।
असंतुष्ट गुट के पास कितने सांसदों का समर्थन?
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी उथल-पुथल के बीच बागी सांसद अरूप चक्रवर्ती ने दावा किया है कि लगभग 20 सांसद असंतुष्ट गुट का समर्थन कर रहे हैं। यह गुट टीएमसी को नए रूप में बनाना चाहता है और राज्य-केंद्र के बीच 'संयुक्त इंजन' की तरह काम करेगा। चक्रवर्ती ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन उनके गुट के साथ है। बागी सांसदों का समर्थन भी भाजपा के साथ रहेगा।
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सत्ता के भूखे हैं बागी नेता, संसद में पाला बदलने की जिद क्यों?चक्रवर्ती ने अभिषेक बनर्जी पर पार्टी के कामकाज में अत्यधिक हस्तक्षेप के आरोपों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को नेताओं के बीच चर्चा से काम करना चाहिए। निर्णय उसी के अनुसार लिए जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जबरदस्ती से कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता, सभी को मिलकर काम करना चाहिए। 'सत्ता के भूखे' होने जैसे आरोपों पर चक्रवर्ती ने कहा कि ये आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे टीएमसी को बचाना चाहते हैं और अपनी 20 सीटों के साथ संसद में अलग बैठना चाहते हैं।
- तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद डोला सेन ने बागी तेवर दिखा रहे 19 सांसदों के बारे में पूछे जाने पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
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बागी तेवर वाले किन नेताओं के हस्ताक्षर सामने आए?इससे पहले शुक्रवार को उन सांसदों के हस्ताक्षर वाले कथित लेटर की तस्वीर भी सामने आई जिसके माध्यम से गत 18 मई को तृणमूल नेताओं ने लोकसभा स्पीकर को अपनी राय से अवगत कराया था। जिन सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं इसमें सायोनी घोष और युसूफ पठान जैसे सांसदों के नाम शामिल हैं।
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बागी तेवर दिखा रहे नेताओं को लेकर पूर्व सीएम ममता के गुट का क्या रुख?
पार्टी में फूट और अस्तित्व के संकट से जूझ रही तृणमूल के एक धड़े में ममता बनर्जी के करीबी और वरिष्ठ टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने भी गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि बागी नेता सत्ता के भूखे हैं और बीजेपी के सत्ता में होने के कारण पार्टी छोड़ रहे हैं।
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गौरतलब है कि गुरुवार को प्रकाश चिक बराइक और कोयल मल्लिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। बराइक और कोयल मल्लिक से पहले सुखेंदु शेखर रॉय और बंगाल से निर्वाचित महिला सांसद सुष्मिता देव ने भी सांसदी छोड़ दी है। सुखेंदु शेखर ने पद छोड़ने के बाद तृणमूल के कार्यकाल पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि उन्होंने आरजी कर अस्पताल में हुए दुष्कर्म और हत्या मामले के बाद ही पार्टी छोड़ने का मन बना लिया था। दूसरी तरफ सुष्मिता देव ने पार्टी छोड़ने के बाद अपने गृह राज्य असम की राजनीति पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।