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टीएमसी में बगावत के बीच बड़ा फैसला: बंगाल की सभी संगठनात्मक समितियां भंग, पार्टी में व्यापक पुनर्गठन का ऐलान

पीटीआई, कोलकाता Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 03 Jun 2026 02:38 PM IST
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सार

तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने अपने संगठन में आमूलचूल बदलाव करते हुए संगठन की सभी समितियों को भंग कर दिया है। पार्टी का यह फैसला ऐसे समय सामने आया है, जब पार्टी में टूट की खबरें सामने आ रही हैं और कई विधायक बगावत के मूड में हैं। 

TMC rift Unrest in west bengal party dissolve all committees frontal organization
Mamata Banerjee - फोटो : PTI
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विस्तार

तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में अपनी सभी संगठनात्मक समितियों और सहयोगी मोर्चा संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग करने की घोषणा की। पार्टी ने साथ ही संगठन की व्यापक समीक्षा और पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू करने का भी ऐलान किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर बड़े पैमाने पर बगावत के संकेत सामने आए हैं और असंतुष्ट विधायकों का एक गुट विधानसभा अध्यक्ष से अलग विधायक दल के रूप में मान्यता देने की मांग कर चुका है।


पार्टी का बयान- आत्ममंथन किया जाएगा
टीएमसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा, 'गहन विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है कि पश्चिम बंगाल में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की सभी समितियां और उसके सभी संगठन तत्काल प्रभाव से भंग किए जाते हैं।' पार्टी ने कहा कि अब संगठन के हर स्तर पर आत्ममंथन, प्रदर्शन समीक्षा और संगठनात्मक मूल्यांकन का व्यापक अभियान चलाया जाएगा। बयान में कहा गया, 'इस समीक्षा प्रक्रिया के निष्कर्षों के आधार पर मूल संगठन और सभी  संगठन ढांचे का पुनर्गठन किया जाएगा तथा समय आने पर इसकी घोषणा की जाएगी।'
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फैसले की वजह नहीं बताई
हालांकि पार्टी ने इस फैसले के पीछे के कारणों का स्पष्ट वजह नहीं बताई गई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम संगठन पर नेतृत्व की पकड़ मजबूत करने और मौजूदा संकट के बीच पार्टी ढांचे को नए सिरे से खड़ा करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। गौरतलब है कि बुधवार को ही टीएमसी के असंतुष्ट विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अलग विधायक दल के रूप में मान्यता की मांग पेश की थी। इससे पार्टी के भीतर जारी संकट और गहरा गया है।
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टीएमसी के इतिहास का सबसे बड़ा संगठनात्मक कदम
हालिया चुनावी झटके के बाद पार्टी पहले से ही आंतरिक असंतोष का सामना कर रही है। ऐसे में सभी समितियों को भंग करने का फैसला टीएमसी के इतिहास के सबसे बड़े संगठनात्मक कदमों में से एक माना जा रहा है। पार्टी ने अपने बयान में कहा कि वह संगठन को और मजबूत बनाने तथा भविष्य की चुनौतियों का मुकाबला नई ऊर्जा और उद्देश्य के साथ करने के लिए प्रतिबद्ध है। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को टीएमसी नेतृत्व, विशेषकर ममता बनर्जी के लिए संगठन पर नियंत्रण बनाए रखने और संभावित विद्रोह को सीमित करने की दिशा में उठाए गए निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है। 
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