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तमिलनाडु: हिंदी के विरोध में सलेम में 85 वर्षीय डीएमके कार्यकर्ता ने किया आत्मदाह, सीएम स्टालिन ने कही ये बात
Sun, 27 Nov 2022 04:45 AM IST
योगेश साहू
एएनआई, सलेम।
एएनआई, सलेम।
Published by: योगेश साहू
Updated Sun, 27 Nov 2022 04:45 AM IST
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आत्मदाह
- फोटो : Social Media
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तमिलनाडु के मेट्टुल के पास करुमलाईकूडल के रहने वाले द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के कार्यकर्ता और किसान 85 वर्षीय थंगावेल ने कथित तौर पर आत्मदाह कर लिया। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। थंगावेल सलेम जिले में डीएमके के दफ्तर के बाहर हिंदी थोपे जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान वहां कुछ बैनर भी लगे थे, जिन पर मोदी सरकार, केंद्र सरकार, हमें हिंदी नहीं चाहिए लिखा गया था।
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रिपोर्टों के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 11 बजे थंगावेल ने कथित तौर पर अपने शरीर पर पेट्रोल डाला और खुद को आग लगा ली। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। थंगावेल हिंदी को शिक्षा के माध्यम के रूप में लागू करने के केंद्र सरकार के कथित कदम से व्यथित थे। इसके बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा।
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मुख्यमंत्री स्टालिन ने इस घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यकर्ता ऐसा आत्मघाती कदम नहीं उठाएं। हिंदी थोपने के खिलाफ लड़ाई तब तक नहीं रुकेगी, जब तक कि यह मांग केंद्र सरकार के कानों तक नहीं पहुंचती। इससे पहले अक्तूबर में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने राज्य विधानसभा में 'हिंदी थोपने' के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया था।
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प्रस्ताव में कहा गया था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली राजभाषा पर संसदीय समिति द्वारा हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी गई रिपोर्ट पर आज देश भर में बहस हुई है। तमिलनाडु सरकार ने कहा कि उस रिपोर्ट में की गई कई सिफारिशें तमिलनाडु सहित गैर-हिंदी भाषी राज्यों के लोगों के लिए हानिकारक हैं और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा किए गए वादे के विपरीत हैं।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि यह सदन इस बात पर चिंता व्यक्त करता है कि संसदीय समिति की सिफारिशें, जो अब प्रस्तुत की गई हैं, इस अगस्त सदन में पेरारिग्नर अन्ना द्वारा पेश किए गए और पारित किए गए दो-भाषा नीति प्रस्ताव के खिलाफ हैं। यह पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू द्वारा किए गए वादे के विपरीत गैर- हिंदी भाषी राज्य और राजभाषा को लेकर 1968 और 1976 में पारित प्रस्तावों द्वारा सुनिश्चित की गई आधिकारिक भाषा के रूप में अंग्रेजी के उपयोग के खिलाफ हैं।
अब तमिलनाडु को एक बार फिर मातृभाषा तमिल की रक्षा, अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा के रूप में बनाए रखने के लिए संघर्ष करना है। प्रस्ताव में कहा गया कि संविधान की 8वीं अनुसूची में सभी 22 भाषाओं को संरक्षित करने और गैर- हिंदी भाषी राज्यों के लोगों के अधिकारों को बनाए रखने के लिए उन्हें सबसे आगे रखा गया है।