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तमिलनाडु: 'मेरा आशय जाति व्यवस्था खत्म करने से था', सनातन धर्म पर टिप्पणी के बाद बचाव में बोले उदयनिधि स्टालिन
पीटीआई, चेन्नई।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 15 May 2026 12:21 PM IST
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सार
डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने अपने सनातन धर्म संबंधी बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनका आशय जाति व्यवस्था को खत्म करने से था, न कि किसी की आस्था या मंदिर जाने के अधिकार के खिलाफ होना। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को समाज और धर्मस्थलों में समान अधिकार मिलना चाहिए। पढ़िए रिपोर्ट-
उदयनिधि स्टालिन, डीएमके नेता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के नेता उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा में सनातन धर्म को लेकर दिए बयान का बचाव किया है। इस मामले में विवाद खड़ा होने के बाद उदयनिधि ने स्पष्ट किया कि उनका मतलब उस व्यवस्था को खत्म करना था, जो लोगों को ऊंची और नीची जातियों में बांटती है।
उदयनिधि ने अपने बयान पर क्या कहा?
उन्होंने गुरुवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि जाति व्यवस्था को खत्म करने का मतलब यह नहीं है कि कोई मंदिर नहीं जाएगा। इसका मतलब यह है कि सभी लोगों को समान अधिकार मिलने चाहिए, न सिर्फ मंदिर में बल्कि पूरे समाज में। उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि जब उन्होंने तमिलनाडु विधानसभा में भाषण दिया था, तब उन्होंने कहा था कि जो जाति व्यवस्था लोगों को बांटती है, उसे खत्म किया जाना चाहिए। कुछ लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो डरते हैं। द्रविड़ आंदोलन विरोध से ही पैदा हुआ है। इसी संदर्भ में वह एक छोटा सा स्पष्टीकरण देना चाहते हैं।
ये भी पढ़ें: NEET-UG: नीट की नई तारीख का एलान, अब 21 जून को देशभर में होगी परीक्षा, पेपर लीक के आरोपों के चलते रद्द हुई थी
उन्होंने कहा कि जब वह जाति व्यवस्था खत्म करने की बात करते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि कोई मंदिर नहीं जाएगा। इसका मतलब है कि सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए, चाहे वह मंदिर हो या समाज। उन्होंने यह भी कहा कि उनका आशय उस व्यवस्था को खत्म करने से था जो लोगों को ऊंची और नीची जातियों में बांटती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पेरियार, अंबेडकर, अन्ना और कलैगनर के बताए सिद्धांतों पर भी बात की थी। वह किसी के भी भगवान में विश्वास के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन वह असमानता और उत्पीड़न का सख्त विरोध करते हैं।
विधानसभा में उदयनिधि ने क्या कहा था?
तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और डीएमके विधायक उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को लेकर बयान दिया था। विधानसभा में उन्होंने कहा था कि सनातन, जिसने लोगों को बांटने का काम किया, उसे खत्म कर देना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई थी।
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उदयनिधि ने अपने बयान पर क्या कहा?
उन्होंने गुरुवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि जाति व्यवस्था को खत्म करने का मतलब यह नहीं है कि कोई मंदिर नहीं जाएगा। इसका मतलब यह है कि सभी लोगों को समान अधिकार मिलने चाहिए, न सिर्फ मंदिर में बल्कि पूरे समाज में। उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि जब उन्होंने तमिलनाडु विधानसभा में भाषण दिया था, तब उन्होंने कहा था कि जो जाति व्यवस्था लोगों को बांटती है, उसे खत्म किया जाना चाहिए। कुछ लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो डरते हैं। द्रविड़ आंदोलन विरोध से ही पैदा हुआ है। इसी संदर्भ में वह एक छोटा सा स्पष्टीकरण देना चाहते हैं।
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उन्होंने कहा कि जब वह जाति व्यवस्था खत्म करने की बात करते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि कोई मंदिर नहीं जाएगा। इसका मतलब है कि सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए, चाहे वह मंदिर हो या समाज। उन्होंने यह भी कहा कि उनका आशय उस व्यवस्था को खत्म करने से था जो लोगों को ऊंची और नीची जातियों में बांटती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पेरियार, अंबेडकर, अन्ना और कलैगनर के बताए सिद्धांतों पर भी बात की थी। वह किसी के भी भगवान में विश्वास के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन वह असमानता और उत्पीड़न का सख्त विरोध करते हैं।
विधानसभा में उदयनिधि ने क्या कहा था?
तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और डीएमके विधायक उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को लेकर बयान दिया था। विधानसभा में उन्होंने कहा था कि सनातन, जिसने लोगों को बांटने का काम किया, उसे खत्म कर देना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई थी।
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