बजट से किसे मिलेगी राहत?: क्या बदल जाएगा, अर्थशास्त्रियों ने समझाया पूरा गणित; जानिए सभी जरूरी सवालों के जवाब
केंद्रीय बजट-2026 विकसित भारत की आर्थिक नींव को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसमें तत्काल नकदी राहत की बजाय बुनियादी ढांचा, औद्योगिक क्षमता, कौशल रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर जोर है। ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि इस बजट से क्या बदलेगा? किसे राहत मिलेगी? आइए यहां सभी सवालों के जवाब जनाते है?
विस्तार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए 'विकसित भारत' की नींव को और मजबूत करने का रोडमैप साझा किया है। बजट-2026 विकसित भारत की आर्थिक नींव मजबूत करने पर केंद्रित है। इस बार सरकार ने तत्काल नकदी राहत की बजाय बुनियादी ढांचा, औद्योगिक क्षमता, कौशल आधारित रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर जोर दिया है। सार्वजनिक पूंजीगत खर्च, निर्यात-उन्मुख उद्योग और सेवा क्षेत्र के साथ कर प्रशासन सुधारों को एकसाथ आगे बढ़ाया गया है।
ऐसे में सवाल तो बनता है कि आखिर इस बजट से क्या बदलेगा, किस-किस को राहत मिलेगी? अर्थशास्त्रियों ने इस बजट को लेकर पूरा गणित समझाया कि कैसे इस बजट के माध्मय से बुनियादी ढांचा, निर्यात वाले उद्योगों, सेवा क्षेत्र और कर प्रशासन सुधारों को एकसाथ आगे बढ़ाया गया है। आइए यहां सभी सवालों के जवाब जानते है।
केंद्रीय आर्थिक संदेश क्या है?
बजट-2026 विकसित भारत की आर्थिक नींव मजबूत करने पर केंद्रित है। इसमें तत्काल नकदी राहत के बजाय औद्योगिक क्षमता, बुनियादी ढांचा, कौशल आधारित रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर जोर दिया गया है। सार्वजनिक पूंजीगत खर्च, निर्यात-उन्मुख उद्योगों, सेवा क्षेत्र और कर प्रशासन सुधारों को एकसाथ आगे बढ़ाया गया है। अर्थशास्त्रियों का कहना है, यह बजट मांग बढ़ाने से अधिक आपूर्ति-पक्ष सुधारों पर आधारित है, जिससे मध्यम अवधि में स्थिर विकास का लक्ष्य रखा गया है।
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टैरिफ की मार से प्रभावित कपड़ा क्षेत्र को क्या राहत मिली?
अमेरिकी टैरिफ, सख्त नियम और वैश्विक संरक्षणवाद के चलते भारतीय कपड़ा निर्यात, खासकर तैयार परिधान और होम टेक्सटाइल्स पर दबाव बढ़ा था। बजट में आधुनिक-पारंपरिक टेक्सटाइल क्लस्टरों के विस्तार, चैलेंज मोड में मेगा टेक्सटाइल पार्क और महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के जरिये इस दबाव से निपटने की रणनीति सामने आई है।
एमएसएमई व पुराने औद्योगिक क्लस्टरों के लिए बजट में क्या बदला है?
सरकार ने इन्फ्रा और तकनीकी उन्नयन के जरिये 200 लीगेसी औद्योगिक समूहों के पुनरुद्धार का प्रस्ताव रखा है। एमएसएमई को चैंपियन के रूप में विकसित करने के लिए 10 हजार करोड़ का एसएमई ग्रोथ फंड और 2,000 करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत फंड को जारी रखा गया है। यह बदलाव एमएसएमई को छोटे उद्यम को निर्यात योग्य इकाइयों में बदलने में मदद करेगा।
क्या बजट वास्तव में बुनियादी ढांचे पर केंद्रित है?
2026-27 के लिए सार्वजनिक पूंजीगत खर्च बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है। इन्फ्रा रिस्क गारंटी फंड, नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, 20 राष्ट्रीय जलमार्ग, तटीय कार्गो प्रोमोशन स्कीम और सीप्लेन कनेक्टिविटी की घोषणा जैसे कदम परिवहन लागत घटाएंगे। इससे उद्योग और उपभोक्ता दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
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ऊर्जा सुरक्षा, ग्रीन ट्रांजिशन पर रुख है?
बजट में ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता को साधने की कोशिश की गई है। कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण यानी सीसीयूएस तकनीकों के लिए 20,000 करोड़ रुपये का आवंटन, बैटरी, सोलर ग्लास, महत्वपूर्ण खनिज और न्यूक्लियर पावर परियोजनाओं को शुल्क राहत इसका संकेत हैं। ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार, यह भारत को व्यावहारिक ग्रीन ट्रांजिशन की ओर ले जाने वाला बजट है।
महिलाओं के लिए क्या मायने हैं?
महिला छात्रावास की स्थापना, स्वास्थ्य और देखभाल सेवाओं में बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण एवं खादी-हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों को मजबूती देने के कदम महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर केंद्रित हैं। बजट महिलाओं को सिर्फ कल्याण योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि उत्पादक कार्यबल के रूप में स्थापित करने की कोशिश करता है।
किसानों की आय कैसे बढ़ाएगी?
बजट में किसानों की आय बढ़ाने का फोकस पारंपरिक समर्थन योजनाओं से आगे बढ़कर उच्च मूल्य कृषि और बाजार से सीधे जुड़ाव पर रखा गया है। मत्स्य पालन, पशुपालन, अमृत सरोवरों और जलाशयों के एकीकृत विकास के साथ नारियल, काजू, कोको, बादाम और अखरोट जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को लक्षित समर्थन दिया गया है।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच निर्यात और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने के लिए क्या ठोस प्रावधान हैं?
वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती, भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति शृंखला में आ रहे व्यवधानों को देखते हुए बजट में निर्यात और लॉजिस्टिक्स को संरचनात्मक रूप से मजबूत करने पर जोर दिया गया है। निर्यात को सीधे समर्थन देने के लिए टेक्सटाइल, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी सेवाओं में शुल्क और कर सरलीकरण किया गया है। ई-कॉमर्स के जरिये निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कूरियर निर्यात की 10 लाख रुपये प्रति खेप की सीमा को पूरी तरह हटाया गया है, जिससे छोटे व्यवसायों, कारीगरों और स्टार्टअप को वैश्विक बाजारों तक सीधी पहुंच मिलेगी।
आम आदमी को सीधे क्या राहत मिलेगी?
नया आयकर अधिनियम, सरल कर फॉर्म, टीडीएस-टीसीएस को तर्कसंगत बनाना, मुकदमेबाजी में कमी और आसान सीमा-शुल्क प्रक्रियाएं आम आदमी के लिए सुगमता बढ़ाने वाले हैं। इन सुधारों से अनुपालन आसान होगा और करदाता पर प्रशासनिक दबाव कम पड़ेगा। दीर्घकालिक विकास की बात है, तो बजट खपत-आधारित राहत की बजाय आय-सृजन विकास पर भरोसा करता है, जिसका लाभ निम्न व मध्य वर्ग को मिलेगा।
कुल मिलाकर बजट को कैसे देखा जाना चाहिए?
विशेषज्ञों की राय में यह दिशा-निर्देशक और संरचनात्मक बजट है। यह टैरिफ दबाव, घरेलू रोजगार की जरूरत और विकसित भारत लक्ष्य को एकसाथ साधने की कोशिश करता है। यह तात्कालिक राहत से अधिक भविष्य की अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत करने पर केंद्रित है।
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