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Budget 2026: 'मुनाफे के बावजूद निजी निवेश नदारद, घटती घरेलू बचत से बढ़ी चिंता', कांग्रेस ने सरकार को ऐसे घेरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: लव गौर
Updated Mon, 12 Jan 2026 02:26 PM IST
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सार
Union Budget 2026: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्रीय बजट 2026 से पहले देश की अर्थव्यवस्था को लेकर चुनौतियां गिनाई। उन्होंने इसके तीन प्रमुख कारण भी बताए। साथ ही उम्मीद जताई कि इस बजट में उनपर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
बजट से पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश का बयान
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
केंद्र सरकार का आम बजट 2026 अगले महीने फरवरी में पेश किया जाएगा। इससे पहले कांग्रेस ने उम्मीद जताई कि आने वाला केंद्रीय बजट में सुस्त प्राइवेट कॉर्पोरेट निवेश और आय में असमानताओं की चुनौतियों से निपटने के लिए सार्थक कदम उठाए जाएंगे। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि घरेलू बचत दरें काफी कम हो गई हैं, और धन, आय व उपभोग में असमानताएं लगातार बढ़ रही हैं।
जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह देखना बाकी है कि आने वाला केंद्रीय बजट सांख्यिकीय भ्रम के आराम से दायर से बाहर निकलकर वास्तविकताओं और चुनौतियों को स्वीकार करता है, और उनसे निपटने के लिए सार्थक कदम उठाता है या नहीं। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि संसद के आने वाले सत्र का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। 2026-27 का बजट अब से 20 दिन बाद पेश किया जाएगा।
बजट 2026 को लेकर क्या बोले कांग्रेस नेता?
अपने एक्स पोस्ट में जयराम रमेश ने कहा, 'संसद के आगामी सत्र का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2026/27 का बजट अब से बीस दिन बाद पेश किया जाएगा। यह बजट निस्संदेह 16वें वित्त आयोग की सिफ़ारिशों को प्रतिबिंबित करेगा, जिसने 17 नवंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। ये सिफारिशें 2026/27 से 2031/32 की अवधि को कवर करती हैं और केंद्र व राज्यों के बीच कर राजस्व के बँटवारे तथा राज्यों के बीच इन राजस्व के वितरण से संबंधित हैं।'
तीन सबसे प्रमुख चुनौतियां गिनाईं
उन्होंने आगे कहा कि मनरेगा को बुलडोजर से खत्म करने वाले नए कानून में लागू किए गए 60:40 लागत को साझा करने के फॉर्मूले से पहले ही बेहद चिंतित राज्य सरकारें अब निश्चित रूप से और भी अधिक आशंका में उंगलियाँ क्रॉस किए बैठी होंगी। अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें तीन सबसे प्रमुख हैं। पहला, टैक्स में कटौती और अच्छे मुनाफ़े के बावजूद निजी कॉरपोरेट निवेश की दरें अब भी स्पष्ट रूप से सुस्त बनी हुई हैं। दूसरा, घरेलू बचत दरों में काफ़ी गिरावट आई है, जिससे निवेश की क्षमता सीमित हुई है। तीसरा, संपत्ति, आय और उपभोग से जुड़ी असमानताएं लगातार गहराती जा रही हैं।
ये भी पढ़ें: बजट 2026: संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से होगा शुरू, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी; दो चरणों में चलेगी कार्यवाही
कांग्रेस नेता ने कहा कि अब देखना यह है कि आने वाला बजट सांख्यिकीय भ्रमों के अपने आरामदेह दायरे से बाहर निकलकर इन वास्तविकताओं और चुनौतियों को स्वीकार करता है या नहीं, और उनसे निपटने के लिए कोई सार्थक कदम उठाता है या नहीं। रोजगार सृजन के बड़े पैमाने पर विस्तार के लिए अत्यंत आवश्यक उच्च जीडीपी वृद्धि दरें भी तब तक टिकाऊ नहीं हो सकतीं, जब तक ये कदम अभी नहीं उठाए जाते।
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बजट 2026 को लेकर क्या बोले कांग्रेस नेता?
अपने एक्स पोस्ट में जयराम रमेश ने कहा, 'संसद के आगामी सत्र का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2026/27 का बजट अब से बीस दिन बाद पेश किया जाएगा। यह बजट निस्संदेह 16वें वित्त आयोग की सिफ़ारिशों को प्रतिबिंबित करेगा, जिसने 17 नवंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। ये सिफारिशें 2026/27 से 2031/32 की अवधि को कवर करती हैं और केंद्र व राज्यों के बीच कर राजस्व के बँटवारे तथा राज्यों के बीच इन राजस्व के वितरण से संबंधित हैं।'
तीन सबसे प्रमुख चुनौतियां गिनाईं
उन्होंने आगे कहा कि मनरेगा को बुलडोजर से खत्म करने वाले नए कानून में लागू किए गए 60:40 लागत को साझा करने के फॉर्मूले से पहले ही बेहद चिंतित राज्य सरकारें अब निश्चित रूप से और भी अधिक आशंका में उंगलियाँ क्रॉस किए बैठी होंगी। अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें तीन सबसे प्रमुख हैं। पहला, टैक्स में कटौती और अच्छे मुनाफ़े के बावजूद निजी कॉरपोरेट निवेश की दरें अब भी स्पष्ट रूप से सुस्त बनी हुई हैं। दूसरा, घरेलू बचत दरों में काफ़ी गिरावट आई है, जिससे निवेश की क्षमता सीमित हुई है। तीसरा, संपत्ति, आय और उपभोग से जुड़ी असमानताएं लगातार गहराती जा रही हैं।
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कांग्रेस नेता ने कहा कि अब देखना यह है कि आने वाला बजट सांख्यिकीय भ्रमों के अपने आरामदेह दायरे से बाहर निकलकर इन वास्तविकताओं और चुनौतियों को स्वीकार करता है या नहीं, और उनसे निपटने के लिए कोई सार्थक कदम उठाता है या नहीं। रोजगार सृजन के बड़े पैमाने पर विस्तार के लिए अत्यंत आवश्यक उच्च जीडीपी वृद्धि दरें भी तब तक टिकाऊ नहीं हो सकतीं, जब तक ये कदम अभी नहीं उठाए जाते।
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