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UP Nagar Nikay Chunav: नगर निकाय चुनाव के लिए सपा ने बदली रणनीति, अखिलेश यादव फिर हुए एक्टिव

इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Mon, 19 Dec 2022 03:04 PM IST
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सार

सपा ने चुनाव के लिए अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। आइए जानते हैं नगर निकाय चुनाव में किस रणनीति के साथ उतरने को तैयार है समाजवादी पार्टी? आखिलेश यादव इसके लिए क्या कर रहे हैं? 

UP Nagar Nikay Chunav: SP changed strategy for municipal elections, Akhilesh Yadav again active
अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है। कल यानी 20 दिसंबर के बाद कभी भी चुनाव का एलान हो सकता है। 20 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करने पर रोक लगाई है। 
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इस बार का मुख्य मुकाबला सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी के बीच बताया जा रहा है। सपा ने चुनाव के लिए अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। आइए जानते हैं नगर निकाय चुनाव में किस रणनीति के साथ उतरने को तैयार है समाजवादी पार्टी? आखिलेश यादव इसके लिए क्या कर रहे हैं? 
 

क्या है समाजवादी पार्टी की रणनीति? 
इसे समझने के लिए हमने वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर श्रीवास्तव से बात की। उन्होंने कहा, 'इस बार विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी जीत के लिए काफी आश्वस्त थी। इसके लिए पार्टी ने जातीय समीकरण मजबूत किया था। दलित-मुस्लिम और पिछड़े वोटर्स को साथ लाने के लिए कई तरह का प्रयोग भी किए थे। हालांकि, इसके बावजूद वह ज्यादा सफल नहीं हो पाए। चुनाव के बाद जरूर मुस्लिम वोटर्स की सपा से नाराजगी की खबरें आने लगीं। बसपा को इसमें अच्छा मौका दिखा और मायावती ने तुरंत मुस्लिम वोटर्स पर निशाना साधना शुरू कर दिया।' उन्होंने कहा, 'रामपुर, खतौली और मैनपुरी उपचुनाव में सपा ने फिर से एक प्रयोग किया। इस बार वह काफी हद तक सफल भी हुए। 

उमाशंकर ने आगे तीन पॉइंट्स भी बताए कि कैसे सपा नगर निकाय चुनाव के लिए तैयारियां कर रहीं हैं। 
 

1. दलित वोटर्स पर फिर फोकस : विधानसभा चुनाव के दौरान भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद से टिकट को लेकर अखिलेश यादव का विवाद हो गया था। इसके चलते चुनाव से पहले ही चंद्रशेखर और सपा का गठबंधन टूट गया था। अब एक बार फिर से अखिलेश ने चंद्रशेखर को अपने साथ जोड़ लिया है। दलित वोटर्स और खासतौर पर युवाओं के बीच चंद्रशेखर का अलग क्रेज है। खतौली और मैनपुरी में आजाद ने सपा के लिए प्रचार किया और इसका फायदा भी मिला। दोनों सीटों पर सपा की जीत हुई, हालांकि रामपुर में जरूर खेल बिगड़ गया। अब आजाद के जरिए एक बार फिर से अखिलेश दलित वोटर्स को साथ लाने की कोशिश में जुटे हैं। नगर निकाय चुनाव में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। 
 

2. नाराज मुस्लिम वोटर्स को मनाने की कोशिश : आजम खान से जेल में न मिलने पर मुस्लिम वोटर्स अखिलेश यादव से काफी नाराज हुए थे। विधानसभा चुनाव के बाद कुछ मुस्लिम नेताओं ने भी पार्टी छोड़ दी थी। कई तरह के आरोप भी लगाए थे। अब अखिलेश उस नाराजगी को दूर करने की कोशिश में जुटे हैं। यही कारण है कि वह आजम खान को कहीं भी पीछे नहीं छोड़ते। हर मामले में वह आजम को साथ लेकर चल रहे हैं। सपा के दूसरे कद्दावर मुस्लिम नेता और कानपुर से विधायक इरफान सोलंकी से मिलने के लिए जेल भी जा रहे हैं। इरफान कई मामलों में फंसे हैं और पिछले दस दिन से जेल में बंद हैं। 
 

3. युवाओं को साथ जोड़ने की कोशिश : बड़ी संख्या में युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए भी सपा मुखिया ने प्लान बनाया है। इसके अनुसार, सपा के नेता और कार्यकर्ता युवाओं से जुड़े हर मुद्दे को सड़क से लेकर विधानसभा और संसद तक उठाएंगे। बेरोजगारी, फीस बढ़ोतरी समेत तमाम मुद्दों पर युवाओं को अपने साथ लाकर भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। 
 

निकाय चुनाव के लिए सपा ने लिए ये बड़े फैसले
  • समाजवादी पार्टी ने नगर निकाय के सभी पदों को पार्टी सिंबल पर लड़ने का फैसला किया है। ऐसे में सक्रिय सदस्य और समाजवादी बुलेटिन के आजीवन सदस्य ही यह चुनाव लड़ पाएंगे। प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल इसके लिए आदेश जारी कर चुके हैं। 
  • नगर निगम महापौर, पार्षद, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष एवं नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर सभी प्रत्याशियों को सिंबल पर ही चुनाव लड़ाया जाएगा। 
  • प्रत्याशियों के चयन के लिए जिलों में आवेदन लिए जा रहे हैं। हर जिले में पहले आवेदकों की स्क्रीनिंग होगी और उसके बाद उनमें से पांच नाम प्रदेश मुख्यालय भेजे जाएंगे, जहां से उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की जाएगी। 
  • चुनाव लड़ने वालों को आवेदन के साथ सक्रिय सदस्य होने और समाजवादी बुलेटिन का आजीवन सदस्य होने की रसीद भी लगानी होगी। 

नए वार्डों में विशेष निगरानी रखने का फैसला
सपा ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं एवं पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि नगरीय क्षेत्र में आने वाले गांवों को मिलाकर बने नए वार्डों में विशेष निगरानी रखी जाए। निकाय में शामिल होने वाले जिस गांव के लोगों का नाम काट दिया गया है, उसके बारे में स्थानीय प्रशासन को सूचना दी जाए। साथ ही पूरे मामले से प्रदेश कार्यालय को भी अवगत कराया जाए। साथ ही सपा के परंपरागत वोटबैंक से जुड़े लोग आपस में लड़ने की बजाय आपसी सहमति के आधार पर उम्मीदवार तय करें।
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