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केरल में श्वेत पत्र को लेकर बवाल: पूर्व वित्त मंत्री ने गोपनीयता पर उठाए सवाल, कहा- निजी लोगों ने किया तैयार

पीटीआई, तिरुवनंतपुरम Published by: Asmita Tripathi Updated Thu, 04 Jun 2026 11:40 AM IST
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सार

केरल सरकार ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र पेश किए। इस पर विवाद छिड़ गया। विपक्षी एलडीएफ ने आरोप लगाया कि दस्तावेज निजी व्यक्तियों ने तैयार किया है। यह नियमों और संविधान का उल्लंघन है। 

Uproar over white paper in Kerala Former Finance Minister raises questions on confidentiality
के.एन. बालागोपाल, पूर्व वित्त मंत्री, केरल - फोटो : एएनआई
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विस्तार

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशान ने गुरुवार को राज्य की वित्तीय स्थिति पर एक श्वेत पत्र पेश किया। इसके चलते सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच जुबानी जंग छिड़ गई। एलडीएफ ने आरोप लगाया कि यह दस्तावेज संविधान, कानून और नियमों का उल्लंघन करते हुए बनाया गया था।

पूर्व वित्त मंत्री ने क्या आरोप लगाया?
राज्य के पूर्व वित्त मंत्री के.एन. बालागोपाल ने दस्तावेज को पेश किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसे निजी लोगों ने तैयार किया है, जिनके साथ सरकार के आंतरिक खातों को साझा नहीं किया जाना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि यह पद की शपथ, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और संविधान का उल्लंघन है।

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'आश्चर्यजनक और गंभीर चिंता का विषय'
बालागोपाल ने कहा कि अतीत में जारी किए गए सभी श्वेत पत्र वित्त विभाग ने तैयार किए थे। वह राजनीतिक दस्तावेज थे। उन्होंने कहा, 'अगर इस दस्तावेज को पेश करने की अनुमति दी जाती है, तो यह भविष्य के लिए एक गलत मिसाल कायम करेगा।' विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनारयी विजयन ने भी इसी तरह के तर्क दिए। इसके साथ ही दावा किया कि यह 'आश्चर्यजनक' और गंभीर चिंता का विषय है कि श्वेत पत्र वित्त विभाग ने तैयार नहीं किया था। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष सरकार द्वारा विशेषज्ञ सलाह लेने के खिलाफ नहीं है, लेकिन श्वेत पत्रों के मामले में इन्हें हमेशा वित्त विभाग द्वारा तैयार किया जाता है। 


ऋण 5.07 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा
रिपोर्ट के अनुसार केरल का कुल सार्वजनिक ऋण 5.07 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, राज्य के राजस्व का लगभग 77 प्रतिशत वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे व्ययों पर खर्च किया जा रहा है।  रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि विकास पर पूंजीगत व्यय देश में सबसे कम है। इसमें बताया गया है कि केरल का पूंजीगत व्यय उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का मात्र 1.3 प्रतिशत है, जो भारतीय राज्यों में सबसे कम में से एक है। वहीं, राज्य का राजकोषीय घाटा भी सबसे अधिक है। राज्य ने 2025 में 262 दिनों तक आर्थिक सहायता (वेज एंड मीन्स एडवांसेज) पर निर्भर रहा और वर्ष के दौरान 84 दिनों तक अतिऋण में रहा।

मुख्यमंत्री सतीशान ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री सतीशान ने कहा कि श्वेत पत्र वित्त विभाग के पर्यवेक्षण और नेतृत्व में तैयार किया गया था। यह बजट जैसे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित था। उन्होंने कहा, 'इसे मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। यह कोई राजनीतिक दस्तावेज नहीं है। इसे अध्यक्ष की अनुमति से सदन में रखा जा सकता है। उसके बाद इस पर आपत्तियों पर विचार किया जा सकता है। यही सामान्य प्रक्रिया है।'
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'राज्य की वित्तीय स्थिति पर एक रिपोर्ट'
सतीशान ने यह भी सवाल उठाया कि विजयन और बालागोपाल यह दावा कैसे कर सकते हैं कि श्वेत पत्र एक राजनीतिक दस्तावेज था। इसे बिना देखे या पढ़े कानून, नियमों और संविधान का उल्लंघन करते हुए तैयार किया गया था। उन्होंने कहा, 'यह राज्य की वित्तीय स्थिति पर एक रिपोर्ट है। इसे जनता को केरल की आर्थिक स्थिति के बारे में सूचित करने के लिए जारी किया जा रहा है।' उन्होंने कहा कि इससे राज्य की वित्तीय स्थिति के बारे में कुछ लोगों की गढ़ी गई भ्रमित धारणाएं दूर हो जाएंगी।

'जनता को आपकी नीतियां पसंद नहीं आईं'
सतीशान ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार जहां भी आवश्यकता होगी, विशेषज्ञ सलाह लेगी क्योंकि उसका मानना है कि वह सब कुछ नहीं जानती है। उन्होंने कहा कि सरकार पिछली सरकार के उदाहरणों या नीतियों का पालन नहीं करेगी क्योंकि यूडीएफ को जनता ने इसके लिए सत्ता में नहीं लाया था। उन्होंने आगे कहा, 'आप (एलडीएफ) इसलिए हारे क्योंकि जनता को आपकी नीतियां पसंद नहीं आईं।' दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अध्यक्ष थिरुवनचूर राधाकृष्णन ने कहा, 'अध्यक्ष को श्वेत पत्र प्रस्तुत करने में नियमों का कोई उल्लंघन नहीं मिला है। यह विधानसभा के रिकॉर्ड का हिस्सा बन चुका है।'

 

 

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