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मुंबई से जामनगर पहुंचे रूबियो: ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे अमेरिकी विदेश मंत्री, एजेंडा में और क्या?
Wed, 21 Oct 2026 12:57 PM IST
देवेश त्रिपाठी
एएनआई, मुंबई
एएनआई, मुंबई
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Wed, 21 Oct 2026 12:57 PM IST
सार
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो बुधवार को मुंबई से गुजरात के जामनगर के लिए रवाना हुए। उनके दौरे में भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। इससे पहले मुंबई में रुबियो और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सुरक्षा पर बातचीत की।
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो बुधवार को गुजरात के जामनगर पहुंचे। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज की तेल रिफाइनरी का दौरा करेंगे। इस दौरान कंपनी की वेनेजुएला से अधिक कच्चा तेल आयात करने और उसे प्रोसेस करने की क्षमता के साथ भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
गुजरात रवाना होने से पहले मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए रूबियो ने कहा कि रिलायंस के साथ बैठक में कंपनी की व्यापक रिफाइनिंग क्षमता पर चर्चा होगी। इसमें वेनेजुएला से आने वाले भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने की उसकी क्षमता भी शामिल है। उन्होंने संकेत दिया कि इस दौरे के दौरान दोनों पक्षों के बीच सहयोग बढ़ाने के नए अवसरों पर भी विचार किया जाएगा। रूबियो ने अमेरिका में रिलायंस के मौजूदा निवेश का भी जिक्र किया।
रिलायंस की रिफाइनरी क्यों खास?
रूबियो का यह दौरा रिलायंस के जामनगर स्थित रिफाइनिंग परिसर पर केंद्रित है। यहां प्रतिदिन लगभग 14 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की संयुक्त क्षमता है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी एकल-स्थल रिफाइनिंग सुविधा माना जाता है। इस रिफाइनरी में भारी और अधिक सल्फर वाले कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता है। यही वजह है कि वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति को लेकर होने वाली चर्चाओं में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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ऊर्जा और निवेश के मुद्दे पर होगी चर्चा
रूबियो का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब वॉशिंगटन भारत के साथ ऊर्जा सहयोग मजबूत करने और रिलायंस को वेनेजुएला से अधिक मात्रा में कच्चा तेल प्रोसेस करने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रहा है। यह बातचीत भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा तथा निवेश के मुद्दों पर व्यापक चर्चा के बीच हो रही है।
रूबियो ने वेनेजुएला से कच्चे तेल के आयात की कोई निश्चित मात्रा या रिलायंस की ओर से किसी विशेष निवेश प्रतिबद्धता का जिक्र नहीं किया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा से जुड़े किसी विशिष्ट अनुरोध के बारे में विस्तृत जानकारी अमेरिकी ऊर्जा विभाग के स्तर पर दी जाएगी।
व्यापार, रक्षा और तकनीक पर भी चर्चा
रूबियो ने मंगलवार को मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ व्यापक बातचीत की थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सुरक्षा जैसे प्रमुख रणनीतिक क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने व्यापार समझौते की बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया और इसे जल्द अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। मंत्रालय ने कहा कि रूबियो का दौरा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्कों में लगातार बनी गति को दर्शाता है। साथ ही, यह 21वीं सदी के लिए भारत-अमेरिका कॉम्पैक्ट को आगे बढ़ाने के महत्व को भी रेखांकित करता है।
ट्रेड डील पर बोले रूबियो- बेहद करीब पहुंचे दोनों देश
रूबियो ने मंगलवार रात एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अंतिम चरण के करीब है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसे महीनों के बजाय कुछ ही हफ्तों में अंतिम रूप दिया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापार प्रतिनिधि समझौते की बातचीत संभाल रहे हैं और वह सीधे तौर पर इसमें शामिल नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह बातचीत की प्रगति पर करीबी नजर रख रहे हैं।
रूबियो ने कहा, "मैंने पहले भी ऐसा महसूस किया था। ऐसे समझौतों में यह जरूरी है कि सार्वजनिक घोषणा से पहले हर बिंदु पर पूरी सहमति हो। इतने महत्वपूर्ण संबंध को इस वजह से जोखिम में नहीं डाला जा सकता कि समझौते की घोषणा कर दी जाए और बाद में पता चले कि उसे अंतिम रूप नहीं दिया गया था।"
उन्होंने आगे कहा, "समझौता बेहद करीब है। मुझे लगता है कि अब कुछ तकनीकी मुद्दों पर काम होना बाकी है। ये तकनीकी बिंदु भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि दोनों पक्षों को इस बात पर सहमत होना होगा कि समझौते की भाषा का अर्थ एक जैसा है। बातचीत अब इसी स्तर पर पहुंच गई है।"
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गुजरात रवाना होने से पहले मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए रूबियो ने कहा कि रिलायंस के साथ बैठक में कंपनी की व्यापक रिफाइनिंग क्षमता पर चर्चा होगी। इसमें वेनेजुएला से आने वाले भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने की उसकी क्षमता भी शामिल है। उन्होंने संकेत दिया कि इस दौरे के दौरान दोनों पक्षों के बीच सहयोग बढ़ाने के नए अवसरों पर भी विचार किया जाएगा। रूबियो ने अमेरिका में रिलायंस के मौजूदा निवेश का भी जिक्र किया।
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रिलायंस की रिफाइनरी क्यों खास?
रूबियो का यह दौरा रिलायंस के जामनगर स्थित रिफाइनिंग परिसर पर केंद्रित है। यहां प्रतिदिन लगभग 14 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की संयुक्त क्षमता है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी एकल-स्थल रिफाइनिंग सुविधा माना जाता है। इस रिफाइनरी में भारी और अधिक सल्फर वाले कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता है। यही वजह है कि वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति को लेकर होने वाली चर्चाओं में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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ऊर्जा और निवेश के मुद्दे पर होगी चर्चा
रूबियो का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब वॉशिंगटन भारत के साथ ऊर्जा सहयोग मजबूत करने और रिलायंस को वेनेजुएला से अधिक मात्रा में कच्चा तेल प्रोसेस करने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रहा है। यह बातचीत भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा तथा निवेश के मुद्दों पर व्यापक चर्चा के बीच हो रही है।
रूबियो ने वेनेजुएला से कच्चे तेल के आयात की कोई निश्चित मात्रा या रिलायंस की ओर से किसी विशेष निवेश प्रतिबद्धता का जिक्र नहीं किया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा से जुड़े किसी विशिष्ट अनुरोध के बारे में विस्तृत जानकारी अमेरिकी ऊर्जा विभाग के स्तर पर दी जाएगी।
व्यापार, रक्षा और तकनीक पर भी चर्चा
रूबियो ने मंगलवार को मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ व्यापक बातचीत की थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
#WATCH | Gujarat: U.S. Secretary of State Marco Rubio arrives in Jamnagar. https://t.co/GZUVoOlfZ3
— ANI (@ANI) October 21, 2026
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सुरक्षा जैसे प्रमुख रणनीतिक क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने व्यापार समझौते की बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया और इसे जल्द अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। मंत्रालय ने कहा कि रूबियो का दौरा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्कों में लगातार बनी गति को दर्शाता है। साथ ही, यह 21वीं सदी के लिए भारत-अमेरिका कॉम्पैक्ट को आगे बढ़ाने के महत्व को भी रेखांकित करता है।
ट्रेड डील पर बोले रूबियो- बेहद करीब पहुंचे दोनों देश
रूबियो ने मंगलवार रात एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अंतिम चरण के करीब है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसे महीनों के बजाय कुछ ही हफ्तों में अंतिम रूप दिया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापार प्रतिनिधि समझौते की बातचीत संभाल रहे हैं और वह सीधे तौर पर इसमें शामिल नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह बातचीत की प्रगति पर करीबी नजर रख रहे हैं।
रूबियो ने कहा, "मैंने पहले भी ऐसा महसूस किया था। ऐसे समझौतों में यह जरूरी है कि सार्वजनिक घोषणा से पहले हर बिंदु पर पूरी सहमति हो। इतने महत्वपूर्ण संबंध को इस वजह से जोखिम में नहीं डाला जा सकता कि समझौते की घोषणा कर दी जाए और बाद में पता चले कि उसे अंतिम रूप नहीं दिया गया था।"
उन्होंने आगे कहा, "समझौता बेहद करीब है। मुझे लगता है कि अब कुछ तकनीकी मुद्दों पर काम होना बाकी है। ये तकनीकी बिंदु भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि दोनों पक्षों को इस बात पर सहमत होना होगा कि समझौते की भाषा का अर्थ एक जैसा है। बातचीत अब इसी स्तर पर पहुंच गई है।"