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IT Ministry: यूजरनेम विवाद के बाद सरकार सख्त, व्हाट्सएप के बाद टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस
Thu, 02 Jul 2026 08:49 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 02 Jul 2026 08:49 PM IST
सार
सरकार ने यूजरनेम फीचर को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अब टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस भेजा है और पूछा है कि वे इन जोखिमों को कैसे नियंत्रित कर रहे हैं। इससे पहले व्हाट्सऐप के नए फीचर पर भी रोक लगाई गई थी और मेटा से स्पष्टीकरण मांगा गया था। पढ़िए रिपोर्ट-
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- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
यूजरनेम विवाद के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने अब टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस भेजा है। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
सूत्रों के अनुसार, टेलीग्राम को भेजे गए नोटिस में सरकार ने पूछा है कि उसे यूजरनेम फीचर बनाए रखने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए। साथ ही यह भी पूछा गया है कि प्लेटफॉर्म धोखाधड़ी और पहचान की नकल (इम्परसनेशन) से जुड़ी चिंताओं को कैसे संभाल रहा है।
इससे पहले, भारत सरकार ने व्हाट्सएप के नए 'यूजरनेम' फीचर के रोलआउट पर फिलहाल रोक लगा दी है। सरकार को डर है कि इस फीचर से साइबर अपराध, फिशिंग और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी घटनाओं में तेजी आ सकती है। केंद्र सरकार ने मेटा को नोटिस भेजकर तीन दिनों के भीतर इस पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।
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सूत्रों ने बताया कि सरकार ने अब अपनी जांच का दायरा अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स तक भी बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, आईटी मंत्रालय ने टेलीग्राम और सिग्नल को भी पत्र लिखा है। दोनों प्लेटफॉर्म्स में पहले से यूजरनेम फीचर मौजूद है और उनसे पूछा गया है कि वे धोखाधड़ी और पहचान की नकल से जुड़ी चिंताओं को कैसे नियंत्रित कर रहे हैं।
ये भी पढ़ें: किसकी होगी टीएमसी?: EC ने अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को लेकर ऋतब्रत और ममता गुट से मांगा जवाब; 6 जुलाई तक का समय
सरकार को साइबर अपराध का डर
आईटी मंत्रालय का मानना है कि यूजरनेम फीचर की मदद से जालसाज सरकारी एजेंसियों, बैंकों या मशहूर हस्तियों के नाम से मिलते-जुलते अकाउंट बना सकते हैं। इससे लोगों की पहचान चोरी करना और उन्हें ठगना आसान हो जाएगा। सरकार ने साफ किया है कि जब तक वह सुरक्षा उपायों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक भारत में यह फीचर रोलआउट नहीं होगा। सरकार ने मेटा से पूछा है कि उन पर आईटी अधिनियम के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।
भारत व्हाट्सऐप का सबसे बड़ा बाजार है, जहां इसके 50 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं। यहां इसका उपयोगकर्ता (यूजर्स) आधार टेलीग्राम से कहीं अधिक है।
पिछले एक महीने में टेलीग्राम भी भारत में नियामकीय जांच के दायरे में रहा है। उस पर धोखाधड़ी, पहचान की नकल और संवेदनशील सामग्री के प्रसार को लेकर सवाल उठे थे। इससे पहले सरकार ने टेलीग्राम और उससे जुड़े वेब सेवाओं पर 22 जून तक प्रतिबंध लगाया था, क्योंकि प्लेटफॉर्म पर नीट परीक्षा के लीक और फर्जी पेपर, भ्रामक सामग्री और मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी को रोकने में विफल रहने के आरोप लगे थे। हालांकि, एक सप्ताह के सरकारी प्रतिबंध के बाद यह सेवा भारत में फिर से शुरू हो गई।
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सूत्रों के अनुसार, टेलीग्राम को भेजे गए नोटिस में सरकार ने पूछा है कि उसे यूजरनेम फीचर बनाए रखने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए। साथ ही यह भी पूछा गया है कि प्लेटफॉर्म धोखाधड़ी और पहचान की नकल (इम्परसनेशन) से जुड़ी चिंताओं को कैसे संभाल रहा है।
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इससे पहले, भारत सरकार ने व्हाट्सएप के नए 'यूजरनेम' फीचर के रोलआउट पर फिलहाल रोक लगा दी है। सरकार को डर है कि इस फीचर से साइबर अपराध, फिशिंग और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी घटनाओं में तेजी आ सकती है। केंद्र सरकार ने मेटा को नोटिस भेजकर तीन दिनों के भीतर इस पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।
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सूत्रों ने बताया कि सरकार ने अब अपनी जांच का दायरा अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स तक भी बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, आईटी मंत्रालय ने टेलीग्राम और सिग्नल को भी पत्र लिखा है। दोनों प्लेटफॉर्म्स में पहले से यूजरनेम फीचर मौजूद है और उनसे पूछा गया है कि वे धोखाधड़ी और पहचान की नकल से जुड़ी चिंताओं को कैसे नियंत्रित कर रहे हैं।
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सरकार को साइबर अपराध का डर
आईटी मंत्रालय का मानना है कि यूजरनेम फीचर की मदद से जालसाज सरकारी एजेंसियों, बैंकों या मशहूर हस्तियों के नाम से मिलते-जुलते अकाउंट बना सकते हैं। इससे लोगों की पहचान चोरी करना और उन्हें ठगना आसान हो जाएगा। सरकार ने साफ किया है कि जब तक वह सुरक्षा उपायों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक भारत में यह फीचर रोलआउट नहीं होगा। सरकार ने मेटा से पूछा है कि उन पर आईटी अधिनियम के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।
भारत व्हाट्सऐप का सबसे बड़ा बाजार है, जहां इसके 50 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं। यहां इसका उपयोगकर्ता (यूजर्स) आधार टेलीग्राम से कहीं अधिक है।
पिछले एक महीने में टेलीग्राम भी भारत में नियामकीय जांच के दायरे में रहा है। उस पर धोखाधड़ी, पहचान की नकल और संवेदनशील सामग्री के प्रसार को लेकर सवाल उठे थे। इससे पहले सरकार ने टेलीग्राम और उससे जुड़े वेब सेवाओं पर 22 जून तक प्रतिबंध लगाया था, क्योंकि प्लेटफॉर्म पर नीट परीक्षा के लीक और फर्जी पेपर, भ्रामक सामग्री और मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी को रोकने में विफल रहने के आरोप लगे थे। हालांकि, एक सप्ताह के सरकारी प्रतिबंध के बाद यह सेवा भारत में फिर से शुरू हो गई।