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मानंतवाडी की सियासी जंग: अपनों की 'साजिश' वाले बयान पर भड़कीं उषा विजयन, चुनावी माहौल में गरमाई केरल की राजनीति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुर
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 25 Mar 2026 11:21 AM IST
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सार
यह मामला पीके जयलक्ष्मी के एक बयान से जुड़ा हुआ है। दरअसल, उन्होंने कांग्रेस के कुछ नेताओं पर 'भीतरघात' का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि 2016 और 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के पीछे अपने ही नेता थे। अब इसी पर उषा विजयन ने पलटवार किया है।
कांग्रेस पार्टी का झंडा
- फोटो : ANI Photos
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विस्तार
Kerala Elections 2026: केरल विधानसभा चुनाव से पहले ही मानंतवाडी सीट पर सियासी पारा चढ़ने लगा है। पिछले दिनों कांग्रेस नेता पीके जयलक्ष्मी ने कांग्रेस के ही कुछ नेताओं पर पार्टी में 'भीतरघात' का आरोप लगाया था। हालांकि, अब उषा विजयन ने पलटवार किया है। उन्होंने 'आंतरिक तोड़फोड़' के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, बीते मंगलवार को यूडीएफ सम्मेलन के दौरान पूर्व मंत्री पीके जयलक्ष्मी ने अपनी ही पार्टी के एक गुट पर गंभीर आरोप जड़ दिए थे। जयलक्ष्मी का कहना था कि 2016 और 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के हार के पीछे अपने ही नेताओं की साजिश थी। उन्होंने कहा कि अपनों के धोखे की वजह से उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा।
उषा विजयन का पलटवार
जयलक्ष्मी के बयान पर जवाब देते हुए वर्तमान उम्मीदवार उषा विजयन ने साफ कहा कि मौजूदा चुनावी माहौल में ऐसे बयान देने की कोई जरूरत नहीं थी। उषा ने कहा, "जयलक्ष्मी अपने पुराने अनुभव साझा किए होंगे, लेकिन मुझे ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है। मैंने यह जांचने की भी कोशिश नहीं की कि उनके आरोप सही हैं या नहीं।" उषा विजयन ने कहा कि जयलक्ष्मी की टिप्पणी से गठबंधन को कोई नुकसान नहीं होगा। इससे कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा आई है। उन्होंने कहा कि इस बार ऐसा कुछ नहीं होगा।
यह भी पढ़ें: आप विधायक हरमीत पठानमाजरा गिरफ्तार: दुष्कर्म केस में चल रहे थे फरार, पटियाला पुलिस ने ग्वालियर से पकड़ा
रिश्तेदारी और सियासत की दिलचस्प जंग
मानंतवाडी की यह सियासी लड़ाई इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि उषा विजयन का मुकाबला एलडीएफ उम्मीदवार और मौजूदा मंत्री ओआर केलू से है। खास बात यह है कि केलू रिश्ते में उषा विजयन के संबंधी लगते हैं। उषा ने कहा कि केलू के साथ उनके सिर्फ राजनीतिक मतभेद हैं, व्यक्तिगत नहीं। उषा विजयन ने दावा किया है कि जनता पिछले 10 वर्षों के एलडीएफ शासन से ऊब चुकी है और बदलाव चाहती है।
राजनीति नहीं तो क्या?
उषा विजयन ने यह भी कहा कि अगर वह राजनीति के मैदान में नहीं उतरतीं, तो वह एक सामान्य सरकारी नौकरी की तलाश करतीं। फिलहाल, सबकी नजरें 9 अप्रैल को होने वाले मतदान पर हैं। अब देखना यह है कि मानंतवाडी की जनता उषा के आत्मविश्वास पर मुहर लगाती है या केलू का किला बरकरार रहता है।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, बीते मंगलवार को यूडीएफ सम्मेलन के दौरान पूर्व मंत्री पीके जयलक्ष्मी ने अपनी ही पार्टी के एक गुट पर गंभीर आरोप जड़ दिए थे। जयलक्ष्मी का कहना था कि 2016 और 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के हार के पीछे अपने ही नेताओं की साजिश थी। उन्होंने कहा कि अपनों के धोखे की वजह से उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा।
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उषा विजयन का पलटवार
जयलक्ष्मी के बयान पर जवाब देते हुए वर्तमान उम्मीदवार उषा विजयन ने साफ कहा कि मौजूदा चुनावी माहौल में ऐसे बयान देने की कोई जरूरत नहीं थी। उषा ने कहा, "जयलक्ष्मी अपने पुराने अनुभव साझा किए होंगे, लेकिन मुझे ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है। मैंने यह जांचने की भी कोशिश नहीं की कि उनके आरोप सही हैं या नहीं।" उषा विजयन ने कहा कि जयलक्ष्मी की टिप्पणी से गठबंधन को कोई नुकसान नहीं होगा। इससे कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा आई है। उन्होंने कहा कि इस बार ऐसा कुछ नहीं होगा।
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रिश्तेदारी और सियासत की दिलचस्प जंग
मानंतवाडी की यह सियासी लड़ाई इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि उषा विजयन का मुकाबला एलडीएफ उम्मीदवार और मौजूदा मंत्री ओआर केलू से है। खास बात यह है कि केलू रिश्ते में उषा विजयन के संबंधी लगते हैं। उषा ने कहा कि केलू के साथ उनके सिर्फ राजनीतिक मतभेद हैं, व्यक्तिगत नहीं। उषा विजयन ने दावा किया है कि जनता पिछले 10 वर्षों के एलडीएफ शासन से ऊब चुकी है और बदलाव चाहती है।
राजनीति नहीं तो क्या?
उषा विजयन ने यह भी कहा कि अगर वह राजनीति के मैदान में नहीं उतरतीं, तो वह एक सामान्य सरकारी नौकरी की तलाश करतीं। फिलहाल, सबकी नजरें 9 अप्रैल को होने वाले मतदान पर हैं। अब देखना यह है कि मानंतवाडी की जनता उषा के आत्मविश्वास पर मुहर लगाती है या केलू का किला बरकरार रहता है।