सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Vande Mataram Protocol Maulana Sajid Rashidi has expressed opposition to singing all stanzas of Vande Mataram

Vande Mataram: 'हमारा सिर कट जाए, हम इन पंक्तियों को नहीं गाएंगे', वंदे मातरम पर मौलाना साजिद रशीदी का बयान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: लव गौर Updated Fri, 13 Feb 2026 09:21 AM IST
विज्ञापन
सार

Vande Mataram Protocol: केंद्र सरकार ने आधिकारिक मौकों पर 'वंदे मातरम्' के सभी छह अंतरा वाले संस्करण को बजाना या गायन अनिवार्य किया है। जिस पर मुस्लिम संगठन और समुदाय के नेताओं ने विरोध जताया है। वंदे मातरम पर मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि हम सिर कटा लेंगे, लेकिन राष्ट्रगीत की विशेष पंक्तियां नहीं पढ़ेंगे।  

Vande Mataram Protocol Maulana Sajid Rashidi has expressed opposition to singing all stanzas of Vande Mataram
मौलाना साजिद रशीदी का बयान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार

केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर नए दिशा निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन-गण-मन की तरह ही सम्मान देना अनिवार्य कर दिया गया है। नए प्रोटोकॉल के तहत सभी सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के सभी छह छंद बजाए या गाए जाएंगे। ऐसे में अब मुस्लिम नेता इसके विरोध में उतर आए हैं।
Trending Videos


ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने वंदे मातरम के सभी छंद गाने पर विरोध जताया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि हम सिर तो कटा सकते हैं, लेकिन राष्ट्रगीत की उन विशेष पंक्तियों (बाकी के चार छंद) का गायन नहीं करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


वंदे मातरम 1937 से ही विवाद का विषय: साजिद रशीदी
न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए राष्ट्रगान से पहले वंदे मातरम के सभी छह श्लोकों का पाठ अनिवार्य करने पर मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि वंदे मातरम 1937 से ही विवाद का विषय रहा है। 1937 में उस समय के प्रमुख नेताओं, जैसे अबुल कलाम आजाद और हुसैन अहमद मदानी ने कांग्रेस को पत्र लिखकर कहा था कि वंदे मातरम की कुछ पंक्तियां हमारी (मुस्लिम समुदाय की) धार्मिक आस्था के विपरीत हैं। तब कांग्रेस ने एक प्रस्ताव पारित कर वंदे मातरम से उन कुछ पंक्तियों को हटा दिया।
 
'चाहे हमारे सिर काट दिए जाएं, हम राष्ट्रगीत...'
उन्होंने आगे कहा कि 2016 में सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले में कहा गया कि यदि कोई वंदे मातरम के पाठ के दौरान खड़ा नहीं होता है, तो उसे देशद्रोही नहीं माना जाएगा। मेरा मानना है कि राष्ट्रगान की वे पंक्तियां, जिनमें देश को 'मां दुर्गा' और 'मां सरस्वती' आदि कहा गया है, हमारी धार्मिक आस्था के विपरीत हैं। मुसलमान अपनी जान दे सकते हैं, लेकिन अपनी धार्मिक आस्था से समझौता नहीं कर सकते। चाहे हमारे सिर काट दिए जाएं, हम राष्ट्रगान की उन विशेष पंक्तियों का पाठ नहीं करेंगे। यदि कोई हम पर यह आदेश थोपने का प्रयास करें, तो हम इसे सहन नहीं करेंगे। मुसलमान राष्ट्रगीत की उन विशेष पंक्तियों का पाठ नहीं करेंगे। 

ये भी पढ़ें: वंदे मातरम पर नई गाइडलाइन: अब जन गण मन से पहले 3.10 मिनट तक बजेगा राष्ट्रगीत, गायन के दौरान खड़े रहना अनिवार्य

वारिस पठान ने जताया विरोध

वहीं AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, "मैं वंदे मातरम् का आदर और सम्मान करता हूं, लेकिन यह कहना कि वंदे मातरम् हमें बोलना ही पड़ेगा, यह असंवैधानिक है। भाजपा और आरएसएस यह कहती है कि अगर आपने वंदे मातरम् नहीं बोला तो आप देश विरोधी हैं। यह गलत बात है। हम राष्ट्रीय गान को खुशी-खुशी पढ़ते हैं। इन्होंने सभी मुद्दों से ध्यान भटका दिया है।

अन्य वीडियो

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed