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VHP: विश्व हिंदू परिषद ने की उदयनिधि की निंदा, विधानसभा की कार्यवाही से सनातन विरोधी बयान हटाने की मांग
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 13 May 2026 01:31 PM IST
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सार
VHP: वीएचपी ने डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन के सनातन विरोधी बयान की निंदा करते हुए उनसे सवाल किया कि क्या वह अन्य धर्मों के खिलाफ भी ऐसी टिप्पणी करने की हिम्मत दिखाएंगे। संगठन ने नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री जोसेफ विजय से भी इस मामले पर उनका रुख स्पष्ट करने को कहा। पढ़िए रिपोर्ट-
आलोक कुमार, वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने बुधवार को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के नेता उदयनिधि स्टालिन के तमिलनाडु विधानसभा में दिए गए 'सनातन विरोधी' बयान की निंदा की। वीएचपी ने मांग की कि उनके बयान को सदन की कार्यवाही से हटाया जाए। आरएसएस से जुड़े संगठन वीएचपी ने यह भी सवाल किया कि क्या उदयनिधि किसी अन्य धर्म के खिलाफ भी ऐसी टिप्पणी करने की हिम्मत करेंगे।
वीएचपी की ओर से यह प्रतिक्रिया उस बयान के बाद आई है, जिसमें तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मंगलवार को कहा था कि सनातन धर्म को खत्म किया जाना चाहिए, क्योंकि यह लोगों को बांटता है। उन्होंने सितंबर 2023 में दिए गए अपने विवादित बयान को फिर दोहराया।
वीएचपी ने उदयनिधि के बयान पर क्या कहा?
वरिष्ठ वकील और वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, सनातन हिंदू धर्म और हिंदू आस्थाओं का बार-बार अपमान करना लोकतांत्रिक और सांविधानिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा, ऐसे आपत्तिजनक और समाज को बांटने वाले बयान तुरंत विधानसभा की कार्यवाही से हटाए जाने चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।
आलोक कुमार ने कहा, तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी सरकार सनातन परंपराओं और हिंदू आस्थाओं का सम्मान करती है या फिर ऐसे 'विभाजनकारी, दुर्भावनापूर्ण और हिंदू विरोधी बयानों' का समर्थन करती है।
'तमिलनाडु सरकार को मिलता है मंदिरों से राजस्व'
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार को राज्य के प्रसिद्ध मंदिरों और सनातन परंपरा से जुड़े धार्मिक संस्थानों से बड़ा राजस्व मिलता है। उन्होंने कहा, यह बेहद विडंबनापूर्ण है कि जिन परिवारों और राजनीतिक दलों को सनातन परंपराओं, मंदिरों और हिंदू समाज से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है, वही सनातन को खत्म करने की बात कर रहे हैं।
वीएचपी अध्यक्ष ने दावा किया कि सनातन हिंदू धर्म केवल तमिलनाडु ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक आत्मा है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि सनातन को मिटाने की कोशिश करने वाली कई विचारधाराएं खुद खत्म हो गईं। लेकिन सनातन आज भी उसी शक्ति और विश्वास के साथ समाज का मार्गदर्शन कर रहा है और आगे भी करता रहेगा।
ये भी पढ़ें: 'अमेरिका दौरे का असर', PAK से बातचीत जारी रखने वाले बयान को लेकर कांग्रेस का होसबाले और RSS पर तंज
उदयनिधि स्टालिन ने क्या कहा था?
तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपने पहले भाषण में उदयनिधि स्टालिन ने यह भी कहा कि 'तमिल थाई वाझ्थु' यानी तमिल प्रार्थना गीत को नजरअंदाज करने की किसी भी कोशिश को विपक्ष बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा, सनातन धर्म, जो लोगों को बांटता है, उसे निश्चित रूप से खत्म किया जाना चाहिए। उदयनिधि के 2023 वाले इसी तरह के बयान पर भी बड़ा विवाद हुआ था। उस समय हिंदुत्व समर्थक संगठनों ने उनकी आलोचना की थी और उनके खिलाफ मामले दर्ज कराए थे।
विधानसभा में उन्होंने हाल ही में तमिलनाडु सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य गीत को कार्यक्रम में तीसरे स्थान पर रखा गया था। उन्होंने कहा, आपकी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में जो हुआ, वह गलती थी और दोबारा ऐसा नहीं होना चाहिए। हम इसकी अनुमति नहीं देंगे। डीएमके नेता ने कहा कि सिर्फ विधानसभा ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु में होने वाले हर कार्यक्रम में 'तमिल थाई वाझ्थु' को हमेशा पहला स्थान मिलना चाहिए।
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वीएचपी की ओर से यह प्रतिक्रिया उस बयान के बाद आई है, जिसमें तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मंगलवार को कहा था कि सनातन धर्म को खत्म किया जाना चाहिए, क्योंकि यह लोगों को बांटता है। उन्होंने सितंबर 2023 में दिए गए अपने विवादित बयान को फिर दोहराया।
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वीएचपी ने उदयनिधि के बयान पर क्या कहा?
वरिष्ठ वकील और वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, सनातन हिंदू धर्म और हिंदू आस्थाओं का बार-बार अपमान करना लोकतांत्रिक और सांविधानिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा, ऐसे आपत्तिजनक और समाज को बांटने वाले बयान तुरंत विधानसभा की कार्यवाही से हटाए जाने चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।
आलोक कुमार ने कहा, तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी सरकार सनातन परंपराओं और हिंदू आस्थाओं का सम्मान करती है या फिर ऐसे 'विभाजनकारी, दुर्भावनापूर्ण और हिंदू विरोधी बयानों' का समर्थन करती है।
'तमिलनाडु सरकार को मिलता है मंदिरों से राजस्व'
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार को राज्य के प्रसिद्ध मंदिरों और सनातन परंपरा से जुड़े धार्मिक संस्थानों से बड़ा राजस्व मिलता है। उन्होंने कहा, यह बेहद विडंबनापूर्ण है कि जिन परिवारों और राजनीतिक दलों को सनातन परंपराओं, मंदिरों और हिंदू समाज से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है, वही सनातन को खत्म करने की बात कर रहे हैं।
वीएचपी अध्यक्ष ने दावा किया कि सनातन हिंदू धर्म केवल तमिलनाडु ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक आत्मा है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि सनातन को मिटाने की कोशिश करने वाली कई विचारधाराएं खुद खत्म हो गईं। लेकिन सनातन आज भी उसी शक्ति और विश्वास के साथ समाज का मार्गदर्शन कर रहा है और आगे भी करता रहेगा।
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उदयनिधि स्टालिन ने क्या कहा था?
तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपने पहले भाषण में उदयनिधि स्टालिन ने यह भी कहा कि 'तमिल थाई वाझ्थु' यानी तमिल प्रार्थना गीत को नजरअंदाज करने की किसी भी कोशिश को विपक्ष बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा, सनातन धर्म, जो लोगों को बांटता है, उसे निश्चित रूप से खत्म किया जाना चाहिए। उदयनिधि के 2023 वाले इसी तरह के बयान पर भी बड़ा विवाद हुआ था। उस समय हिंदुत्व समर्थक संगठनों ने उनकी आलोचना की थी और उनके खिलाफ मामले दर्ज कराए थे।
विधानसभा में उन्होंने हाल ही में तमिलनाडु सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य गीत को कार्यक्रम में तीसरे स्थान पर रखा गया था। उन्होंने कहा, आपकी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में जो हुआ, वह गलती थी और दोबारा ऐसा नहीं होना चाहिए। हम इसकी अनुमति नहीं देंगे। डीएमके नेता ने कहा कि सिर्फ विधानसभा ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु में होने वाले हर कार्यक्रम में 'तमिल थाई वाझ्थु' को हमेशा पहला स्थान मिलना चाहिए।
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