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'निजता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं': केरल की MLA ने ऑनलाइन मीडिया को लेकर दी चेतावनी, कहा- पीछा करने पर कार्रवाई
पीटीआई, तिरुवनंतपुरम
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 16 Jun 2026 01:12 PM IST
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सार
केरल की IUML विधायक फातिमा तहलिया ने निजी जीवन में दखल देने और बिना अनुमति वीडियो बनाने वाले ऑनलाइन मीडिया चैनलों को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां स्टाकिंग और निजता के उल्लंघन के दायरे में आती हैं तथा इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फातिमा तहलिया
- फोटो : fathimathahiliya: Instagram
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विस्तार
केरल की मुस्लिम लीग (IUML) विधायक फातिमा तहलिया ने ऑनलाइन मीडिया चैनलों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि उनके निजी जीवन में दखल देने और 'पापाराजी' की तरह वीडियो बनाने वाले चैनलों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पेराम्ब्रा से पहली बार विधायक बनीं फातिमा ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने साफ कहा कि इस तरह की हरकतें पीछा करने (स्टाकिंग) के दायरे में आती हैं और इन्हें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फातिमा ने बताया कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाना उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन आजकल एक नया चलन शुरू हो गया है। कुछ लोग बिना किसी पहचान पत्र या अनुमति के मीडिया के नाम पर कार्यक्रमों में घुस जाते हैं। आयोजक आमतौर पर आधिकारिक फोटोग्राफर और वीडियोग्राफर रखते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर खुद को मीडिया बताने वाले लोग बिना किसी पहचान के वीडियो बनाने लगते हैं। इससे असली और फर्जी मीडिया के बीच फर्क करना बहुत मुश्किल हो जाता है।
विधायक ने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस स्थिति का गलत फायदा उठाते हैं। वे उनकी निजी बातचीत, सामान्य व्यवहार और निजी पलों को रिकॉर्ड कर लेते हैं। बाद में इन वीडियो को गलत तरीके से पेश किया जाता है ताकि जनता को गुमराह किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह निजता का गंभीर उल्लंघन है। साधारण पलों को सनसनीखेज कैप्शन के साथ दिखाया जाता है ताकि ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके। इससे समाज में बेवजह की नकारात्मकता और गलत प्रतिक्रियाएं पैदा होती हैं।
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फातिमा ने उन दावों को भी पूरी तरह खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि ये चैनल उनके पीआर (PR) काम का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इन दावों का कोई आधार नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर भी हर व्यक्ति को अपनी निजता का पूरा अधिकार है। मोबाइल फोन लेकर किसी के निजी दायरे में घुसना और बिना किसी नियम के रिकॉर्डिंग करना पूरी तरह गलत है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह सिलसिला नहीं रुका, तो वे इसे पीछा करने और निजता के उल्लंघन का मामला मानकर कानूनी कदम उठाएंगी।
ये भी पढ़ें: Shiv Sena UBT Rift: उद्धव ठाकरे ने 22 जून को बैठक बुलाई, पार्टी में असंतोष की अटकलों पर किस नेता ने क्या कहा?
यह मामला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में अभिनेता सलीम कुमार के अंतिम संस्कार के दौरान ऑनलाइन मीडिया के व्यवहार की काफी आलोचना हुई थी। उस समय अभिनेता के बेटे चंदू को भीड़ में घुस रहे मीडियाकर्मियों को हटाना पड़ा था। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने भी इस पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इस समस्या का समाधान केवल कानून से नहीं हो सकता, बल्कि मीडिया संगठनों को खुद जिम्मेदार बनना होगा।
फातिमा ने बताया कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाना उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन आजकल एक नया चलन शुरू हो गया है। कुछ लोग बिना किसी पहचान पत्र या अनुमति के मीडिया के नाम पर कार्यक्रमों में घुस जाते हैं। आयोजक आमतौर पर आधिकारिक फोटोग्राफर और वीडियोग्राफर रखते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर खुद को मीडिया बताने वाले लोग बिना किसी पहचान के वीडियो बनाने लगते हैं। इससे असली और फर्जी मीडिया के बीच फर्क करना बहुत मुश्किल हो जाता है।
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विधायक ने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस स्थिति का गलत फायदा उठाते हैं। वे उनकी निजी बातचीत, सामान्य व्यवहार और निजी पलों को रिकॉर्ड कर लेते हैं। बाद में इन वीडियो को गलत तरीके से पेश किया जाता है ताकि जनता को गुमराह किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह निजता का गंभीर उल्लंघन है। साधारण पलों को सनसनीखेज कैप्शन के साथ दिखाया जाता है ताकि ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके। इससे समाज में बेवजह की नकारात्मकता और गलत प्रतिक्रियाएं पैदा होती हैं।
फातिमा ने उन दावों को भी पूरी तरह खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि ये चैनल उनके पीआर (PR) काम का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इन दावों का कोई आधार नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर भी हर व्यक्ति को अपनी निजता का पूरा अधिकार है। मोबाइल फोन लेकर किसी के निजी दायरे में घुसना और बिना किसी नियम के रिकॉर्डिंग करना पूरी तरह गलत है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह सिलसिला नहीं रुका, तो वे इसे पीछा करने और निजता के उल्लंघन का मामला मानकर कानूनी कदम उठाएंगी।
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यह मामला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में अभिनेता सलीम कुमार के अंतिम संस्कार के दौरान ऑनलाइन मीडिया के व्यवहार की काफी आलोचना हुई थी। उस समय अभिनेता के बेटे चंदू को भीड़ में घुस रहे मीडियाकर्मियों को हटाना पड़ा था। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने भी इस पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इस समस्या का समाधान केवल कानून से नहीं हो सकता, बल्कि मीडिया संगठनों को खुद जिम्मेदार बनना होगा।