VL-Shtil: एक साथ 12 लक्ष्यों को भेदता है रूस का ये घातक हथियार, भारत ने कर लिया सौदा; घुटनों पर आएगा पाकिस्तान
भारत ने नौसेना की हवाई सुरक्षा मजबूत करने के लिए 5,083 करोड़ रुपये की रक्षा खरीद को मंजूरी दी है, जिसमें ALH MK-III (MR) हेलीकॉप्टर और VL-Shtil एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
भारत ने नौसेना की हवाई सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए बड़ा रक्षा सौदा किया है। रक्षा मंत्रालय ने कुल 5,083 करोड़ रुपये की खरीद को मंजूरी दी है, जिसमें ALH MK-III (MR) हेलीकॉप्टर और वर्टिकल लॉन्च श्तिल एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम (VL-Shtil) शामिल हैं।
मंत्रालय के अनुसार, भारतीय नौसेना ने 2,182 करोड़ रुपये में सतह से हवा में मार करने वाले VL-Shtil मिसाइल सिस्टम की खरीद के लिए रूस की कंपनी जेएससी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ समझौता किया है। इस प्रणाली के शामिल होने से भारत की समुद्री रक्षा क्षमता और मजबूत होगी और पाकिस्तान जैसे नजदीकी दुश्मनों से आने वाले हवाई खतरों से निपटने में मदद मिलेगी। यह प्रणाली एक साथ 12 लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता रखती है।
श्तिल-1 क्या है?
- श्तिल-1 एक मध्यम दूरी की नौसैनिक वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली है।
- इसे रूस की अलमाज-आंते कंपनी ने विकसित किया है।
- इसे मुख्य रूप से हल्के युद्धपोतों के लिए डिजाइन किया गया है ताकि समुद्र में जहाजों को हवाई हमलों से सुरक्षित रखा जा सके।
- यह प्रणाली 9M317ME Semi-Active Radar Homing (SARH) मिसाइल का उपयोग करती है।
- यह एक सिंगल-स्टेज ठोस ईंधन आधारित इंटरसेप्टर मिसाइल है, जिसके पंख मोड़े जा सकते हैं और जिसे नौसैनिक युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया है।
श्तिल-1 क्या-क्या कर सकता है?
- श्तिल-1 अपनी तेज प्रतिक्रिया और लगातार फायरिंग क्षमता के लिए जाना जाता है।
- यह सिस्टम हर 2 से 3 सेकंड में एक मिसाइल दाग सकता है।
- यह प्रणाली सुपरसोनिक विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और एंटी-शिप मिसाइल जैसे हवाई खतरों को निशाना बनाने में सक्षम है।
- इसकी मारक क्षमता 3.5 किमी से 50 किमी तक है, जबकि ऊंचाई पर यह 5 मीटर से लेकर 15 किमी तक के लक्ष्यों को भेद सकती है।
- यह सिस्टम एक साथ 12 अलग-अलग लक्ष्यों को ट्रैक और नष्ट करने की क्षमता रखता है, जिससे युद्ध या संघर्ष की स्थिति में जहाजों की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है।
भारत ने श्तिल-1 को क्यों चुना?
- इस प्रणाली को चुनने के पीछे एक बड़ी वजह इसकी किफायती लागत भी है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, SARH आधारित मिसाइलें बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए अपेक्षाकृत सस्ती और सरल होती हैं।
- इस प्रणाली में जहाज पर लगे हाई-पावर फायर-कंट्रोल रडार (जैसे MR-90 Orekh) लक्ष्य को लगातार रोशन करते हैं, जिससे मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचने में मदद मिलती है।
- इसके विपरीत, Active Radar Homing (ARH) सिस्टम, जैसे इस्राइल का बराक MR-SAM, मिसाइल के अंदर लगे छोटे रेडियो-फ्रीक्वेंसी ट्रांसमीटर पर निर्भर करते हैं। इससे लक्ष्य की पहचान अपेक्षाकृत कम स्पष्ट हो सकती है।
एसएआरएच प्रणाली की सीमाएं क्या है?
- हालांकि SARH प्रणाली के कुछ सीमित पहलू भी हैं। यह तकनीक अपेक्षाकृत कम दूरी के लक्ष्यों के लिए अधिक प्रभावी मानी जाती है।
- इसके अलावा, इस प्रणाली में लक्ष्य को जहाज के रडार से लगातार रोशन करना पड़ता है। जैसे-जैसे लक्ष्य की दूरी बढ़ती है, रडार से परावर्तित सिग्नल कमजोर होता जाता है, जिससे लक्ष्य की पहचान और ट्रैकिंग चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि लागत, विश्वसनीयता और तेज प्रतिक्रिया क्षमता के कारण श्तिल-1 जैसी प्रणाली भारतीय नौसेना के लिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने वाला अहम कदम साबित हो सकती है।
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