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West Asia Crisis: तेल पर सरकार का बड़ा फैसला, PDA में घटेगी टूटे चावल की हिस्सेदारी, एथेनॉल में होगा प्रयोग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 24 Mar 2026 03:08 PM IST
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सार
केंद्र सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली में टूटे चावल की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने की तैयारी में है, जिससे 90 लाख टन चावल एथेनॉल उत्पादन के लिए उपलब्ध होगा। इस कदम से तेल आयात घटाने, विदेशी मुद्रा बचाने और एथेनॉल ब्लेंडिंग 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पेट्रोल-डीजल भंडारण की गाइडलाइन।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्र सरकार देश के एथेनॉल क्षेत्र को मजबूत करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रही है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने मंगलवार को जानकारी दी कि सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किए जाने वाले अनाज में टूटे हुए चावल की हिस्सेदारी को 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने का प्रस्ताव कैबिनेट के पास ले जाने वाली है। इस कदम से सालाना लगभग 90 लाख टन टूटा हुआ चावल एथेनॉल उत्पादन के लिए उपलब्ध हो सकेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
यह निर्णय ऐसे समय में लिया जा रहा है जब पिछले तीन हफ्तों में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत का उछाल आया है। खाद्य सचिव ने बताया कि भारत में पेट्रोल में एथेनॉल सम्मिश्रण पहले ही 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो 2013 में मात्र 1.5 प्रतिशत था। इस पहल से 2014 के बाद से देश को 1.63 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है और कच्चे तेल के आयात में 277 लाख मीट्रिक टन की कटौती हुई है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बदलाव
वर्तमान में, सरकार की खाद्य योजना के तहत लगभग 80 करोड़ लोगों को मुफ्त वितरित किए जाने वाले अनाज में 25 प्रतिशत हिस्सा टूटे हुए चावल का होता है। नई योजना के तहत इसे घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा। हर साल वितरित होने वाले 360-370 लाख टन अनाज में से जो अतिरिक्त टूटा हुआ चावल बचेगा, उसे एथेनॉल निर्माताओं, पशु चारा उत्पादकों और अन्य संबंधित उद्योगों को नीलामी के माध्यम से बेचा जाएगा। इस योजना का ट्रायल रन पांच राज्यों में सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।
ये भी पढ़ें: Supreme Court: 'अब भारतीय सेना की महिला अफसरों को परमानेंट कमीशन', शॉर्ट सर्विस मामले में अदालत का अहम
क्या हैं भविष्य की योजनाएं?
संजीव चोपड़ा ने 'ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन' (एआईडीए) के सम्मेलन में कहा कि अगले साल से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के स्टॉक से डिस्टिलरीज को साबुत चावल की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी। इसकी जगह संशोधित खाद्य योजना से प्राप्त टूटा हुआ चावल एक विश्वसनीय और साल भर उपलब्ध रहने वाले कच्चे माल तौर पर अपनी जगह बना लेगा। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि एथेनॉल क्षेत्र को टूटे हुए चावल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो। सरकार अब एथेनॉल सम्मिश्रण की सीमा को 20 प्रतिशत से ऊपर ले जाने, एथेनॉल को डीजल के साथ मिलाने और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने पर भी सक्रिय रूप से विचार कर रही है।
कितनी है मौजूदा उत्पादन क्षमता?
सरकार मक्के को दूसरे वैकल्पिक कच्चे माल के रूप में बढ़ावा दे रही है। कृषि मंत्रालय मक्के की ऐसी उच्च उपज वाली किस्में विकसित कर रहा है जो प्रति हेक्टेयर पांच से छह टन उत्पादन दे सकें। वर्तमान में एथेनॉल आपूर्ति का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित स्रोतों, मुख्य रूप से मक्के से आता है। भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता 2013-14 के 420 करोड़ लीटर से बढ़कर आज लगभग 2,000 करोड़ लीटर हो गई है।
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सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बदलाव
वर्तमान में, सरकार की खाद्य योजना के तहत लगभग 80 करोड़ लोगों को मुफ्त वितरित किए जाने वाले अनाज में 25 प्रतिशत हिस्सा टूटे हुए चावल का होता है। नई योजना के तहत इसे घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा। हर साल वितरित होने वाले 360-370 लाख टन अनाज में से जो अतिरिक्त टूटा हुआ चावल बचेगा, उसे एथेनॉल निर्माताओं, पशु चारा उत्पादकों और अन्य संबंधित उद्योगों को नीलामी के माध्यम से बेचा जाएगा। इस योजना का ट्रायल रन पांच राज्यों में सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।
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कितनी है मौजूदा उत्पादन क्षमता?
सरकार मक्के को दूसरे वैकल्पिक कच्चे माल के रूप में बढ़ावा दे रही है। कृषि मंत्रालय मक्के की ऐसी उच्च उपज वाली किस्में विकसित कर रहा है जो प्रति हेक्टेयर पांच से छह टन उत्पादन दे सकें। वर्तमान में एथेनॉल आपूर्ति का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित स्रोतों, मुख्य रूप से मक्के से आता है। भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता 2013-14 के 420 करोड़ लीटर से बढ़कर आज लगभग 2,000 करोड़ लीटर हो गई है।
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