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पश्चिम बंगाल: कोलकाता में जमीन कब्जाने वाले गिरोह पर ईडी का शिकंजा, जांच के दायरे में 30 पुलिसकर्मी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 25 May 2026 03:34 PM IST
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सार
कोलकाता में जमीन हड़पने के बड़े रैकेट की जांच तेज करते हुए ईडी ने करीब 30 पुलिस अधिकारियों को जांच के दायरे में लिया है। एजेंसी सिंडिकेट, अवैध संपत्ति सौदों, धमकी और दुबई तक फैले पैसों के नेटवर्क की जांच कर रही है।
ईडी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोलकाता में जमीन हड़पने के एक बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच तेज हो गई है। इस मामले में कोलकाता पुलिस के लगभग 30 अधिकारी अब ईडी की जांच के दायरे में हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
जांच में अलग-अलग रैंक के पुलिसकर्मियों पर एक सिंडिकेट के साथ मिले होने का शक है। यह सिंडिकेट बुजुर्ग नागरिकों को डरा-धमकाकर उनकी कीमती जमीनें बाजार भाव से बहुत कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर करता था। ईडी के अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान कई पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है और अब उनके असली काम की बारीकी से जांच हो रही है।
एजेंसी को कुछ ऐसे दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले हैं जिनका विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का मुख्य केंद्र अब पैसों के लेनदेन का पता लगाना और उन सभी लोगों की पहचान करना है जिन्हें इस खेल से फायदा हुआ। जब्त किए गए मोबाइल फोन से कुछ डेटा डिलीट कर दिया गया है। फॉरेंसिक जांच की मदद से उस जानकारी को वापस पाने की कोशिश हो रही है।
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ईडी फिलहाल तीन मुख्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। इनमें विश्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू, कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा विश्वास और कारोबारी जॉय कामदार शामिल हैं। जांचकर्ताओं को शक है कि यह सिंडिकेट पुलिस के प्रभाव का गलत इस्तेमाल करके लोगों को डराता था।
सोना पप्पू कथित तौर पर संपत्ति के मालिकों को धमकाता था। वहीं, शांतनु सिन्हा विश्वास पर आरोप है कि उन्होंने स्थानीय पुलिस तंत्र का इस्तेमाल करके पीड़ितों पर दबाव बनाया। इसके बाद उन जमीनों को कम दाम पर खरीद लिया गया और कामदार से जुड़े कारोबारी संपर्कों से उन्हें विकसित किया गया।
ये भी पढ़ें: मुनंबम भूमि विवाद: 'नहीं होगी बेदखली', केरल के CM सतीशन का एलान; वक्फ बोर्ड पहले ही करा चुका जमीन का पंजीकरण
शुक्रवार को ईडी ने कारोबारी मोहम्मद अली उर्फ मैक्स राजू, शांतनु सिन्हा विश्वास के भतीजे सौरव अधिकारी और सब-इंस्पेक्टर रुहिल अमीन अली के ठिकानों पर छापेमारी की। इसके अलावा मुर्शिदाबाद में सिन्हा विश्वास के घर की भी तलाशी ली गई। यह कार्रवाई सोना पप्पू और सिन्हा विश्वास से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर हुई। अधिकारी अब पैसों के लेनदेन और पश्चिम बंगाल के बाहर, खासकर दुबई में सिन्हा विश्वास की संपत्तियों की भी जांच कर रहे हैं। सोना पप्पू और सिन्हा विश्वास को हाल ही में गिरफ्तार किया गया है, जबकि कामदार अप्रैल से ही गिरफ्त में है।
जांच में अलग-अलग रैंक के पुलिसकर्मियों पर एक सिंडिकेट के साथ मिले होने का शक है। यह सिंडिकेट बुजुर्ग नागरिकों को डरा-धमकाकर उनकी कीमती जमीनें बाजार भाव से बहुत कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर करता था। ईडी के अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान कई पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है और अब उनके असली काम की बारीकी से जांच हो रही है।
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एजेंसी को कुछ ऐसे दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले हैं जिनका विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का मुख्य केंद्र अब पैसों के लेनदेन का पता लगाना और उन सभी लोगों की पहचान करना है जिन्हें इस खेल से फायदा हुआ। जब्त किए गए मोबाइल फोन से कुछ डेटा डिलीट कर दिया गया है। फॉरेंसिक जांच की मदद से उस जानकारी को वापस पाने की कोशिश हो रही है।
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सोना पप्पू कथित तौर पर संपत्ति के मालिकों को धमकाता था। वहीं, शांतनु सिन्हा विश्वास पर आरोप है कि उन्होंने स्थानीय पुलिस तंत्र का इस्तेमाल करके पीड़ितों पर दबाव बनाया। इसके बाद उन जमीनों को कम दाम पर खरीद लिया गया और कामदार से जुड़े कारोबारी संपर्कों से उन्हें विकसित किया गया।
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शुक्रवार को ईडी ने कारोबारी मोहम्मद अली उर्फ मैक्स राजू, शांतनु सिन्हा विश्वास के भतीजे सौरव अधिकारी और सब-इंस्पेक्टर रुहिल अमीन अली के ठिकानों पर छापेमारी की। इसके अलावा मुर्शिदाबाद में सिन्हा विश्वास के घर की भी तलाशी ली गई। यह कार्रवाई सोना पप्पू और सिन्हा विश्वास से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर हुई। अधिकारी अब पैसों के लेनदेन और पश्चिम बंगाल के बाहर, खासकर दुबई में सिन्हा विश्वास की संपत्तियों की भी जांच कर रहे हैं। सोना पप्पू और सिन्हा विश्वास को हाल ही में गिरफ्तार किया गया है, जबकि कामदार अप्रैल से ही गिरफ्त में है।