West Bengal: 'धर्मस्थल को राजनीति का अड्डा ना बनने दें', हुमायूं कबीर के बयान पर बोले मंत्री सिद्दीकुल्लाह
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मुर्शिदाबाद में बाबरी जैसी मस्जिद की नींव रखने की चर्चा ने सियासत गरम कर दी है। निलंबित TMC नेता हुमायूं कबीर के बयान पर मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा कि राज्य में शांति बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने चेताया कि मस्जिद को राजनीति का मंच न बनाया जाए।
विस्तार
पश्चिम बंगाल में जहां एक ओर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों के बीच रस्साकसी मची हुई है। वहीं दूसरी ओर राज्य के मुर्शिदाबाद में बाबरी जैसी मस्जिद की नींव रखने की बात कहने वाले निलंबित टीएमसी नेता हुमायूं कबीर के ताजा बयान ने सियासत की गर्महाट को चरम पर पहुंचा दिया है। ऐसे में अब हुमायूं के बयान पर पश्चिम बंगाल के मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राज्य में शांति बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और जनता को सही दिशा दिखाना सरकार का कर्तव्य है।
साथ ही मस्जिद निर्माण को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने साफ किया कि धार्मिक स्थल राजनीति का मंच नहीं बनना चाहिए और किसी भी ऐसे कदम का विरोध किया जाएगा जो लोगों के बीच दूरी बढ़ाए। उन्होंने सवाल उठाया कि मस्जिद वाकई अल्लाह के लिए बन रही है या किसी अन्य उद्देश्य के लिए, यह बात आगे चलकर साफ होगी।
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मस्जिद राजनीति का मैदान नहीं- सिद्दीकुल्लाह चौधरी
मंत्री ने आगे कहा कि अगर कहीं अल्लाह के नाम पर मस्जिद बनाई जा रही है, तो वह जगह अल्लाह के लिए ही रहे। मस्जिद राजनीति का मैदान नहीं है और हम ऐसे किसी भी कदम का विरोध करते हैं जो लोगों के बीच दूरी पैदा करे। इसके साथ ही चौधरी ने बताया कि उन्हें मस्जिद से जुड़े विवाद की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन जो बातें सामने आई हैं, उनसे लगा कि कुछ लोग पार्टी से दूरी बनाकर मस्जिद बनाने का फैसला कर रहे हैं क्योंकि पार्टी के सदस्य उनकी बात नहीं मान रहे थे।
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मस्जिद को लेकर क्यों बढ़ा सियासी पारा?
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में सियासी पारा सातवें आसमान पर तब पहुंचा जब कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भाजपा में रहने के बाद फिर टीएमसी लौटकर विधायक बने हुमायूं कबीर ने छह दिसंबर को बंगाल में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद के उद्घाटन की बात कही। हुमायूं ने धमकी भरे लहजे में कहा है कि अगर राज्य प्रशासन उन्हें रोकने का प्रयास करेगा तो उसका व्यापक विरोध होगा।
इतना ही नहीं उन्होंने हाईवे जाम करने और आग से न खेलने तक की धमकी तक दे डाली। छह दिसंबर का उनका चयन राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। उसी दिन 1992 में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। टीएमसी इस दिन को ‘संघर्ष दिवस’ के रूप में मनाती है। राज्य सरकार ने इस साल छह दिसंबर को अवकाश भी घोषित किया है।
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